हल्द्वानी (नैनीताल): उत्तराखंड के हल्द्वानी से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक पड़ोसी ने विश्वास की डोर को तार-तार करते हुए एक 16 वर्षीय किशोरी को अपनी हवस का शिकार बना डाला। मामला मुखानी थाना क्षेत्र का है, जहाँ किशोरी के अचानक बीमार पड़ने के बाद जब डॉक्टरी जांच कराई गई, तो वह दो माह की गर्भवती पाई गई। इस खुलासे के बाद परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
बीमारी के बहाने सामने आया खौफनाक सच
घटनाक्रम के अनुसार, मुखानी क्षेत्र के एक मोहल्ले में रहने वाली 16 वर्षीय किशोरी की पिछले चार-पांच दिनों से तबीयत खराब चल रही थी। परिजनों ने इसे सामान्य बीमारी समझकर उपचार के लिए अस्पताल ले गए। जब डॉक्टरों ने किशोरी की गहन जांच और अल्ट्रासाउंड किया, तो रिपोर्ट देखकर सब दंग रह गए। किशोरी दो माह की गर्भवती थी।
अस्पताल से मिली इस जानकारी के बाद जब परिजनों ने किशोरी से विश्वास में लेकर पूछताछ की, तो उसने रोते हुए आपबीती सुनाई। किशोरी ने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले एक युवक ने उसे डरा-धमकाकर उसके साथ गलत काम (दुष्कर्म) किया था। बदनामी और डर के चलते वह अब तक चुप रही, लेकिन शारीरिक परिवर्तनों और स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण यह सच छिप न सका।
पुलिस की सख्त कार्रवाई और गिरफ्तारी
परिजनों ने बिना देर किए मुखानी थाने में तहरीर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया। मुखानी एसओ सुशील कुमार ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत प्रभावी धाराओं में मामला दर्ज किया गया। रविवार को पुलिस ने आरोपी को दबिश देकर गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
गर्भपात के लिए न्यायालय की शरण
इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू भी सामने आया है। पीड़िता नाबालिग है और उसकी शारीरिक व मानसिक स्थिति को देखते हुए परिजनों ने न्यायालय से गर्भपात (Abortion) की अनुमति मांगी है। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और स्वास्थ्य संबंधी नए प्रावधानों के तहत, यदि गर्भ तीन माह से कम का हो, तो विशेष परिस्थितियों में कोर्ट से अनुमति लेकर गर्भपात कराया जा सकता है।
पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वे भी इस मामले में पूरी संजीदगी से काम कर रहे हैं। डीएनए (DNA) सैंपलिंग के लिए पुलिस कोर्ट में आवेदन करेगी, ताकि आरोपी के खिलाफ वैज्ञानिक साक्ष्य भी पुख्ता किए जा सकें।
समाज और सुरक्षा पर उठते सवाल
हल्द्वानी जैसी शांत वादियों में इस तरह की घटनाएं समाज की सुरक्षा व्यवस्था और नैतिक पतन पर गहरे सवाल खड़े करती हैं। विशेषकर ‘देवभूमि’ कहे जाने वाले उत्तराखंड में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय हैं। मुखानी की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि बच्चों के लिए कभी-कभी उनके पड़ोसी और परिचित ही सबसे बड़ा खतरा बन जाते हैं।
ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ संवाद बनाए रखने की आवश्यकता है। साथ ही, समाज को भी जागरूक होना होगा ताकि अपराधियों में कानून का खौफ बना रहे। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पीड़िता को उचित न्याय दिलाया जाएगा और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
* स्थान: मुखानी क्षेत्र, हल्द्वानी।
* पीड़िता: 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी।
* आरोपी: पड़ोस में रहने वाला युवक (न्यायिक हिरासत में)।
* स्थिति: किशोरी 2 माह की गर्भवती, गर्भपात के लिए कोर्ट में अर्जी।
* पुलिस कार्रवाई: पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज।

