चारधाम यात्रा को आसान बनाने के लिए कई बाईपास बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन ये अब तक कागजों में ही अटकी हुई हैं। बाईपास का काम शुरू करने से पहले कई तरह की सरकारी अनुमतियाँ लेनी पड़ती हैं, और यही वजह है कि अब तक इन योजनाओं को धरातल पर नहीं उतारा जा सका है।
चारधाम यात्रा के समय हर साल लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड आते हैं, जिससे सड़कों पर यातायात का भारी दबाव बढ़ जाता है। खासतौर पर ऋषिकेश में, जहाँ से आगे की यात्रा शुरू होती है, ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या बन जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए करीब 12 साल पहले ऋषिकेश में एक बाईपास बनाने की योजना बनी थी। लेकिन तकनीकी कारणों, सरकारी प्रक्रियाओं और मंज़ूरी में देरी की वजह से इस पर अब तक कोई ठोस काम शुरू नहीं हो सका।
ऋषिकेश ही नहीं, बल्कि कई और जगहों पर भी बाईपास की ज़रूरत है ताकि यात्रा सुगम हो सके और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो। लेकिन जब तक इन योजनाओं पर तेज़ी से काम नहीं होगा, तब तक श्रद्धालुओं को हर साल जाम और असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। अब देखना यह है कि सरकार कब तक इन अटकी हुई परियोजनाओं को पूरा करती है और चारधाम यात्रा को सुगम बनाती है।