नई दिल्ली: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते युद्ध के तनाव और वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था और आम आदमी की बुनियादी जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए कमर कस ली है। रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की उच्च स्तरीय बैठक में देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक स्थिरता पर भी गहन मंथन किया गया।
इस बैठक का सबसे बड़ा और स्पष्ट संदेश यह था कि दुनिया के किसी भी कोने में हलचल हो, भारत की सप्लाई चैन (Supply Chain) और आम नागरिक की थाली पर उसका आंच नहीं आने दी जाएगी।
सरकार का ‘संपूर्ण सरकार’ विजन
प्रधानमंत्री मोदी ने निर्देश दिए कि वर्तमान वैश्विक संकट एक निरंतर बदलती स्थिति है, जिससे दुनिया का हर देश प्रभावित हो रहा है। ऐसे में भारत को एक ‘यूनिट’ के रूप में काम करना होगा। पीएम ने ‘Whole of Government’ (संपूर्ण सरकार) दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया, ताकि सभी मंत्रालय और विभाग मिलकर काम करें और नागरिकों को वैश्विक संघर्ष का कम से कम असर झेलना पड़े।
बैठक के 5 सबसे महत्वपूर्ण निर्णय
1. ऊर्जा और ईंधन की सुरक्षा:
बैठक में देश की ऊर्जा जरूरतों का विस्तृत आकलन किया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ईंधन और ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह की योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। तेल की कीमतों में उछाल के जोखिम को देखते हुए बैकअप प्लान तैयार है।
2. किसानों को खाद की ‘नो-टेंशन’ गारंटी:
आगामी खरीफ सीजन के मद्देनजर खाद (Fertilizer) की उपलब्धता की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि देश में खाद के स्टॉक की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय स्रोतों और नए आपूर्तिकर्ताओं से बातचीत तेज कर दी गई है।
3. बिजली आपूर्ति और कोयला स्टॉक:
औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में निर्बाध बिजली सुनिश्चित करने के लिए देश के पावर प्लांटों में कोयले के पर्याप्त स्टॉक की पुष्टि की गई है। सरकार का लक्ष्य है कि युद्ध की वजह से देश के उत्पादन या सामान्य जीवन में बिजली कटौती जैसी समस्या न आए।
4. आयात-निर्यात के नए रास्तों की तलाश:
केमिकल, फार्मा और पेट्रोकेमिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए कच्चा माल जुटाने हेतु भारत अब केवल पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर नहीं रहेगा। नए वैश्विक बाजारों और नए देशों के साथ व्यापारिक रास्ते तलाशने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इंडस्ट्री की रफ्तार न रुके।
5. कालाबाजारी पर ‘जीरो टॉलरेंस’:
सबसे अहम फैसला जमाखोरी के खिलाफ लिया गया है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि युद्ध की आड़ में कोई भी मुनाफाखोर जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी न कर सके। इसके लिए केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर सख्त निगरानी रखेगी।
भविष्य की रणनीति और सख्त निगरानी
प्रधानमंत्री ने मंत्रियों और सचिवों के एक विशेष समूह के गठन का निर्देश दिया है जो पल-पल बदलती वैश्विक स्थिति पर नजर रखेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी स्टेकहोल्डर्स (हितधारकों) के साथ लगातार संपर्क में रहें ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तत्काल जवाबी कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष:
यह बैठक दर्शाती है कि भारत वैश्विक संकटों के प्रति न केवल सतर्क है, बल्कि एक मजबूत ‘सुरक्षा कवच’ के साथ तैयार भी है। सरकार का मुख्य ध्यान भोजन, ईंधन और उर्वरक की त्रिवेणी को सुरक्षित रखना है, जिससे आम आदमी की रसोई और देश की प्रगति दोनों अप्रभावित रहें।
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ग्लोबल क्राइसिस में भारत का ‘सुरक्षा कवच’: पीएम मोदी की हाई-लेवल मीटिंग और सप्लाई चैन बचाने का मास्टरप्लान
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