देहरादून। जब दुनिया भर में अमेरिकी टैरिफ नीतियों से व्यापारिक दबाव गहराता जा रहा है, ऐसे समय में उत्तराखंड के पारंपरिक और स्वदेशी उत्पाद राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए नई ताकत बनकर उभरे हैं। हिमालयी वादियों से निकलने वाले आर्गेनिक अनाज, महिला समूहों की कढ़ाई-बुनाई, पारंपरिक हस्तशिल्प और हर्बल प्रोडक्ट आज उत्तराखंड की ब्रांड पहचान बन चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा चलाया गया स्वदेशी अभियान इस सोच को और मजबूत करता है कि स्थानीय संसाधन ही वैश्विक बाजार में टिकाऊ हथियार साबित हो सकते हैं।
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बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड से हर्बल और आर्गेनिक वस्तुओं का निर्यात कई गुना बढ़ा है। अमेरिका और यूरोप के बाजारों में उत्तराखंड की बासमती चावल, मंडुवा और झंगोरा जैसे मोटे अनाज को हेल्दी फूड के रूप में अपनाया जा रहा है। वहीं, कुमाऊंनी शाल और गढ़वाली हैंडलूम की खाड़ी देशों में विशेष डिमांड है।
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“लोकल ही असली ढाल”
मुख्यमंत्री धामी का कहना है कि जब बड़े देशों की नीतियां उद्योग जगत के लिए चुनौती बनती हैं, तब स्वदेशी की ताकत ही अर्थव्यवस्था को संभाल सकती है। उत्तराखंड का यह मॉडल पूरे देश को दिखा रहा है कि जड़ों से जुड़कर और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच तक ले जाकर हम मजबूत अर्थव्यवस्था खड़ी कर सकते हैं।
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निर्यात में उत्तराखंड की बढ़त
नीति आयोग की रिपोर्ट: निर्यात तैयारी सूचकांक में राज्य को 59.13 अंक मिले और यह देशभर में 9वें स्थान पर है।
हिमालयी राज्यों में नंबर-1: इस श्रेणी में उत्तराखंड अव्वल है।
प्रमुख निर्यात सेक्टर: ऑटोमोबाइल और फार्मा उद्योग सबसे आगे। कृषि व खाद्य प्रसंस्करण, हर्बल उत्पाद, जैविक खेती और हस्तशिल्प भी अहम योगदान दे रहे हैं।
अन्य निर्यात: कीमती पत्थर, धातु, प्लास्टिक, रबर, रसायन और मशीनरी उपकरण।
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साल-दर-साल ग्रोथ
वर्ष निर्यात (₹ करोड़)
2011-12 3,530
2023-24 14,928
हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात 5 साल में 28% बढ़ा।
ऑर्गेनिक खेती में उत्तराखंड का योगदान देश के कुल उत्पादन का लगभग 10%।
यूरोप-अमेरिका में मंडुवा, झंगोरा और बासमती की खपत लगातार बढ़ रही।
कुमाऊंनी शाल और गढ़वाली हैंडलूम खाड़ी देशों में तेजी से लोकप्रिय।
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हिमालयी राज्यों की तुलना
राज्य निर्यात (₹ करोड़) राष्ट्रीय हिस्सेदारी
उत्तराखंड 13,239 0.41%
हिमाचल प्रदेश 16,000 0.50%
जम्मू-कश्मीर 1,600 0.05%
सिक्किम 150 0.00%
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दो दशकों की आर्थिक छलांग
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के मुताबिक, बीते 20 सालों में उत्तराखंड की औद्योगिक अर्थव्यवस्था 9.5 गुना बढ़ी है। वहीं हिमाचल प्रदेश की यह वृद्धि केवल 4.6 गुना रही। इससे साफ है कि पहाड़ी राज्य ने
अपने स्वदेशी संसाधनों के बल पर बड़े राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है।