उत्तराखंड में लक्ष्मण झूला के पास बन रहे वैकल्पिक पुल (बजरंग सेतु) को मई 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही, डक्ट नीति के ड्राफ्ट को विभिन्न हितधारकों को भेजा गया है, जिनसे प्राप्त सुझावों या संशोधनों को ध्यान में रखते हुए इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने लक्ष्मण झूला के पास स्थित पुराने पुल के निकट नए वैकल्पिक पुल (बजरंग सेतु) का निर्माण कार्य शुरू किया है। यह पुल 132.30 मीटर लंबा और आठ मीटर चौड़ा होगा। इसकी अनुमानित लागत 68 करोड़ रुपये से अधिक है। इस पुल का निर्माण मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के तहत टिहरी गढ़वाल जिले के विधानसभा क्षेत्र में किया जा रहा है। इस पुल का उद्देश्य पुराने लक्ष्मण सेतु के पास एक सुरक्षित और स्थिर वैकल्पिक मार्ग प्रदान करना है, जो पर्यटन और यातायात के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, लोक निर्माण विभाग ने एक नई डक्ट नीति का मसौदा तैयार किया है, जो पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए सड़क के नीचे लाइन बिछाने की प्रक्रिया को सरल बनाएगा। इस नीति का उद्देश्य भविष्य में सड़क की खुदाई की समस्या को कम करना है। पहले चरण में, शहर की टू-लेन और फोर-लेन सड़कों पर इन लाइनों को डक्ट के माध्यम से बिछाया जाएगा।
इस मसौदे को जल संस्थान, यूपीसीएल, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को भेजा गया है, ताकि उनसे सुझाव या संशोधन प्राप्त किए जा सकें। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर इस नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।
**इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग की नई पहल**
वन विभाग राज्य में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। इसके तहत कई प्रमुख पर्यटक स्थलों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जा रहा है। इनमें नीर झरना, देवलसारी, पत्थरखोल-नागटिब्बा, कौड़िया, कोल्हू चौड़, दायरा बुग्याल, सातताल, हाथी डगर, थलेकदार जैसे क्षेत्रों को इको टूरिज्म जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, झिलमिल झील, देवबन और कनासर कैंपिंग साइट, केवर्स टेका, सांकरी-केदार कांठा ट्रैक रूट जैसे नए पर्यटन स्थल भी विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्य वन संरक्षक (इको टूरिज्म) के अनुसार, इन क्षेत्रों में पर्यटन सुविधाओं के विकास से न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद राज्य में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है, जिससे राज्य के इको टूरिज्म क्षेत्र को नया आयाम मिलेगा।