देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी विभागों में कार्यरत हजारों उपनल (UPNL) कर्मियों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से चल रही ऊहापोह की स्थिति को समाप्त करते हुए शासन ने समान पद-समान वेतन और महंगाई भत्ते (DA) के क्रियान्वयन की दिशा में ठोस कदम उठा लिए हैं। कार्मिक विभाग ने न केवल अनुबंध का नया प्रारूप जारी कर दिया है, बल्कि विभागों को प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय भी प्रदान किया है।
हजारों परिवारों में खुशी की लहर
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (उपनल) के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न विभागों में लगभग 22,000 से अधिक कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकार के इस ताजा फैसले से उन कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा जो वर्षों से अल्प वेतन में काम कर रहे थे। शासन द्वारा अनुबंध (Contract) का प्रारूप तय किए जाने के बाद अब विभागों के पास उपनल कर्मियों के साथ नया करार करने का स्पष्ट आधार उपलब्ध हो गया है।
शासनादेश और कट-ऑफ डेट का गणित
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने इसी वर्ष 2 फरवरी को उपनल कर्मियों को समान कार्य के बदले समान वेतन और महंगाई भत्ता देने का ऐतिहासिक शासनादेश जारी किया था।
* कट-ऑफ डेट: इस लाभ के लिए 12 नवंबर, 2018 को आधार तिथि (कट-ऑफ डेट) माना गया है।
* किसे मिलेगा प्राथमिकता पर लाभ: प्रथम चरण में उन कर्मचारियों को शामिल किया गया है जो वर्ष 2015 से पहले से तैनात हैं और अपनी सेवा के 10 वर्ष पूरे कर चुके हैं।
* भविष्य की योजना: सरकार की योजना के अनुसार, शेष बचे कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2028 तक इस दायरे में लाया जाएगा।
अनुबंध की समय-सीमा में विस्तार
पूर्व में सरकार ने विभागों को उपनल कर्मियों के साथ अनुबंध की कार्रवाई पूर्ण करने के लिए दो माह का समय दिया था। हालांकि, प्रक्रियात्मक जटिलताओं और प्रारूप तैयार न होने के कारण यह समय-सीमा समाप्त हो गई थी। कर्मचारियों के हितों को देखते हुए शासन ने अब इस अवधि को दो माह के लिए और बढ़ा दिया है। अब संबंधित विभाग बिना किसी तकनीकी बाधा के अनुबंध की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर सकेंगे।
अनुबंध (Contract) के प्रारूप की मुख्य बातें
शासन द्वारा जारी किए गए नए अनुबंध प्रारूप में कर्मचारियों के अधिकारों के साथ-साथ उनके उत्तरदायित्वों को भी स्पष्ट किया गया है। इसकी प्रमुख शर्तें निम्नलिखित हैं:
* अवकाश की सुविधा: अब कर्मियों को एक वर्ष में 12 आकस्मिक अवकाश और 15 उपार्जित अवकाश (Earned Leaves) का लाभ मिलेगा, जो उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने में सहायक होगा।
* अनुशासन पर जोर: प्रारूप में स्पष्ट कहा गया है कि कर्मचारियों को कड़े अनुशासन का पालन करना होगा। अनुशासनहीनता की स्थिति में सेवा निरस्त करने का अधिकार विभाग के पास सुरक्षित रहेगा।
* स्वास्थ्य मानक: यदि कोई कर्मचारी स्वास्थ्य कारणों से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में पूरी तरह असमर्थ पाया जाता है, तो उसकी सेवाएं समाप्त की जा सकेंगी।
* सेवा विस्तार: अनुबंध के दौरान सेवा की अवधि निश्चित होगी और इसे आगे बढ़ाने का अंतिम निर्णय पूरी तरह सरकार के पास सुरक्षित होगा।
* विधिक कार्रवाई: किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य में लिप्त पाए जाने पर कर्मचारी को तुरंत निलंबित कर दिया जाएगा और दोष सिद्ध होने पर उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने जताई खुशी
शासन के इस कदम का उपनल कर्मचारी संघों ने स्वागत किया है। कर्मचारियों का कहना है कि समान वेतन और DA मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और वे अधिक मनोयोग से सरकारी कार्यों में अपना योगदान दे सकेंगे। हालांकि, कुछ संगठनों ने सभी 22 हजार कर्मियों को एक साथ लाभ देने की मांग भी दोहराई है।
निष्कर्ष
धामी सरकार का यह निर्णय उत्तराखंड के उन युवाओं और पूर्व सैनिकों के परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो प्रदेश के विकास की रीढ़ बने हुए हैं। अनुबंध की अवधि बढ़ाने से अब विभागों के पास पर्याप्त समय है कि वे प्रत्येक पात्र कर्मचारी तक इस योजना का लाभ पहुँचा सकें। आने वाले कुछ हफ़्तों में जिलों और मुख्यालयों में अनुबंध की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
ब्यूरो रिपोर्ट, दून प्राइम न्यूज़।







