धारचूला (पिथौरागढ़): हिमालय की दुर्गम चोटियों और आध्यात्मिक शांति के केंद्र आदि कैलाश (Adi Kailash) और ओम पर्वत (Om Parvat) की यात्रा के लिए काउंटडाउन शुरू हो गया है। आगामी 1 मई से इस पावन यात्रा का विधिवत आगाह होने जा रहा है। यात्रा को सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए सीमांत तहसील धारचूला में प्रशासन की ओर से इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit) जारी करने की प्रक्रिया मंगलवार से शुरू कर दी गई है।
प्रशासनिक तैयारियां तेज: धारचूला में खुला विशेष काउंटर
धारचूला तहसील कार्यालय में इनर लाइन परमिट जारी करने के लिए एक समर्पित काउंटर स्थापित किया गया है। प्रशासन ने यहाँ एक कर्मचारी की तैनाती विशेष रूप से इसी कार्य के लिए की है ताकि श्रद्धालुओं को कागजी कार्रवाई में किसी प्रकार की असुविधा न हो। पहले दिन हालांकि किसी यात्री ने परमिट के लिए आवेदन नहीं किया, लेकिन स्थानीय प्रशासन का मानना है कि बुधवार से आवेदनों की संख्या में तेजी आएगी।
यात्रा के पहले जत्थे के 1 मई को धारचूला से आगे प्रस्थान करने की उम्मीद है। सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना वैध परमिट के किसी भी यात्री को उच्च हिमालयी क्षेत्रों की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आगमन की संभावना
इस वर्ष की आदि कैलाश यात्रा का विशेष आकर्षण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संभावित दौरा है। भाजपा जिलाध्यक्ष गिरीश जोशी के अनुसार, मुख्यमंत्री से यात्रा का भव्य शुभारंभ करने का अनुरोध किया गया है। संभावना जताई जा रही है कि 1 मई को सीएम धामी गुंजी (Gunji) पहुंचकर यात्रा की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक शासन की ओर से इसका आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी नहीं हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन और स्थानीय कार्यकर्ता उनके स्वागत की तैयारियों में जुटे हैं।
ग्रामीणों और होमस्टे संचालकों में उत्साह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद इस क्षेत्र में पर्यटन और तीर्थाटन की लहर देखी जा रही है। यात्रा मार्ग पर स्थित गांवों—बूंदी, गर्ब्यांग, नलपल्यु्, गुंजी, नाबी, रौंगकोंग और कुटी—में जबरदस्त उत्साह है। कुटी के ग्रामीण यात्रियों के स्वागत के लिए विशेष तैयारियों में जुटे हैं। होमस्टे और होटल संचालकों ने अपने आवासों का नवीनीकरण किया है ताकि श्रद्धालुओं को दुर्गम पहाड़ों में भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें। ‘होमस्टे’ संस्कृति इस यात्रा का मुख्य आधार बन रही है, जिससे स्थानीय लोगों की आर्थिकी को भी मजबूती मिल रही है।
इनर लाइन परमिट (ILP) के लिए अनिवार्य औपचारिकताएं
चीन सीमा से सटे होने के कारण यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है, इसलिए सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने यात्रियों के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परमिट प्राप्त करने के लिए प्रत्येक श्रद्धालु को निम्नलिखित दस्तावेज जमा करने होंगे:
• शपथ पत्र: यात्रा की शर्तों के अनुपालन हेतु एक वैधानिक शपथ पत्र।
• मेडिकल सर्टिफिकेट: किसी भी सरकारी अस्पताल से जारी शारीरिक फिटनेस प्रमाणपत्र (उच्च हिमालयी क्षेत्र की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अनिवार्य)।
• चरित्र प्रमाण पत्र: यात्री के स्थायी निवास स्थान के संबंधित थाने से जारी पुलिस वेरिफिकेशन रिपोर्ट।
• पहचान पत्र: आधार कार्ड की मूल प्रति और छायाप्रति।
• फोटोग्राफ: हाल ही में खिंचवाई गई पासपोर्ट साइज फोटो।
• संपर्क सूत्र: यात्री का निजी मोबाइल नंबर और आपातकालीन स्थिति के लिए परिवार के किसी सदस्य का नंबर।
आदि कैलाश का धार्मिक एवं पर्यटन महत्व
आदि कैलाश को ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है और इसे भगवान शिव के मुख्य निवासों में से एक माना जाता है। वहीं, ओम पर्वत पर प्राकृतिक रूप से ‘ॐ’ की आकृति उभरी हुई है, जो दुनिया भर के श्रद्धालुओं और वैज्ञानिकों के लिए कौतूहल का विषय है। मानसखंड मंदिर माला मिशन के तहत उत्तराखंड सरकार इन क्षेत्रों को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है।
यात्रियों के लिए सलाह
प्रशासन ने अपील की है कि यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही अपनी योजना बनाएं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और अचानक बदलते मौसम को देखते हुए गर्म कपड़े और आवश्यक दवाइयां साथ रखने की सलाह दी गई है।







