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देहरादून/रुद्रप्रयाग:

देश के दिग्गज उद्योगपति और अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी शुक्रवार को सपरिवार बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए हिमालयी धाम पहुंचे। अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने भगवान शिव का जलाभिषेक किया और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। हालांकि, इस यात्रा का महत्व केवल आध्यात्मिक नहीं रहा, बल्कि इसमें उत्तराखंड की भविष्य की कनेक्टिविटी और पर्यटन विकास की झलक भी देखने को मिली। दर्शन के उपरांत अडानी ने क्षेत्र की महत्वाकांक्षी ‘सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे’ परियोजना का हवाई सर्वेक्षण (Aerial Survey) भी किया।

​कड़ी सुरक्षा के बीच वीआईपी आगमन

​शुक्रवार सुबह गौतम अडानी अपनी पत्नी प्रीति अडानी के साथ विशेष चार्टर्ड विमान से दिल्ली से देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से वे निजी हेलीकॉप्टर के जरिए सीधे केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुए। उनके आगमन को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। वीआईपी मूवमेंट के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि आम श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई असुविधा न हो। मंदिर परिसर में पहुंचते ही तीर्थ पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ उनका स्वागत किया।

​आध्यात्मिक शांति और विशेष पूजा-अर्चना

​गर्भगृह में गौतम अडानी और उनकी पत्नी ने लगभग 20 मिनट तक विशेष पूजा-अर्चना की। बाबा केदार के दर्शन के बाद वे काफी अभिभूत नजर आए। उन्होंने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां मौजूद श्रद्धालुओं का अभिवादन भी स्वीकार किया। बद्री-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अधिकारियों ने उन्हें भगवान केदारनाथ का प्रसाद और स्मृति चिह्न भेंट किया।

​रोपवे प्रोजेक्ट: केदारनाथ यात्रा की बदलती तस्वीर

​आध्यात्मिक दर्शन के बाद गौतम अडानी का मुख्य ध्यान सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना पर केंद्रित रहा। उन्होंने हेलीकॉप्टर के माध्यम से प्रस्तावित रोपवे रूट का विस्तृत एरियल सर्वे किया

​इस प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:

• ​दूरी और समय की बचत: वर्तमान में सोनप्रयाग से केदारनाथ तक की पैदल दूरी लगभग 16-18 किलोमीटर है, जिसे तय करने में श्रद्धालुओं को 8 से 10 घंटे लगते हैं। इस रोपवे के बनने के बाद यह सफर मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा हो सकेगा।
• ​दुर्गम पहाड़ियों की चुनौती: यह रोपवे दुनिया के सबसे ऊंचे और चुनौतीपूर्ण रोपवे प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है, जो करीब 11,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित धाम को जोड़ेगा।
• ​आर्थिक और पर्यटन विकास: अडानी समूह द्वारा इस प्रोजेक्ट में गहरी रुचि दिखाना उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के लिए एक बड़ा संकेत है। यह न केवल बुजुर्ग और दिव्यांग तीर्थयात्रियों के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि स्थानीय रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

​क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी पर प्रभाव

​सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजनरी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा है। गौतम अडानी द्वारा इस रूट का हवाई दौरा करने के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले समय में इस प्रोजेक्ट के निर्माण में तेजी आ सकती है। हवाई सर्वेक्षण के दौरान अडानी ने भौगोलिक परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों का जायजा लिया।

​विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई बड़ा औद्योगिक समूह इस तरह की बुनियादी परियोजनाओं में सहयोग करता है, तो इससे न केवल निर्माण की गुणवत्ता बढ़ती है, बल्कि प्रोजेक्ट समय पर पूरा होने की संभावना भी प्रबल हो जाती है। यह रोपवे यात्रा को हर मौसम के अनुकूल (All-weather) बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

​निष्कर्ष

​गौतम अडानी की यह यात्रा आस्था और विकास के संगम के रूप में देखी जा रही है। एक ओर जहां उन्होंने बाबा केदार का आशीर्वाद लिया, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की संभावनाओं को तलाशा। सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट यदि धरातल पर उतरता है, तो यह हिमालयी पर्यटन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा।

​मुख्य बिंदु एक नज़र में:

• ​स्थान: केदारनाथ धाम, उत्तराखंड।
• ​मुख्य अतिथि: गौतम अडानी (चेयरमैन, अडानी समूह) एवं पत्नी प्रीति अडानी।
• ​उद्देश्य: आध्यात्मिक दर्शन और रोपवे प्रोजेक्ट का हवाई सर्वेक्षण।
• ​प्रोजेक्ट का नाम: सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे।

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