​नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर भीषण अग्निकांड से दहल उठी है। शाहदरा जिले के विवेक विहार इलाके में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात एक चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने नौ परिवारों की खुशियां छीन लीं। तड़के करीब 4 बजे जब पूरी दुनिया गहरी नींद में थी, तब विवेक विहार फेज-1 स्थित कैंपस नंबर B-13 की इमारत आग की लपटों के आगोश में समा गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 9 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए हैं।

​तड़के 4 बजे चीख-पुकार से गूंजा इलाका

​विवेक विहार पुलिस स्टेशन को रविवार तड़के करीब 03:48 बजे एक पीसीआर कॉल के जरिए इस भयावह आग की सूचना मिली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी भीषण थी कि चंद मिनटों में ही इसने तीसरी और चौथी मंजिल के फ्लैटों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय निवासियों ने बताया कि आग की लपटें खिड़कियों से बाहर निकल रही थीं और चारों तरफ धुएं का काला गुबार छाया हुआ था।

​सूचना मिलते ही एसएचओ और एसीपी विवेक विहार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) की 12 गाड़ियां तुरंत घटनास्थल पर भेजी गईं। संकरी गलियों और धुएं के बीच दमकलकर्मियों को राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में भारी मशक्कत करनी पड़ी।

​रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई

​शाहदरा जिले के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (DCP) राजेंद्र प्रसाद मीणा ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद बताया कि पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तत्परता दिखाते हुए जलती हुई इमारत से करीब 10 से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाए गए लोगों में से दो को मामूली चोटें आई थीं, जिन्हें तत्काल गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल ले जाया गया।

​हालांकि, बदकिस्मती से तीसरी और चौथी मंजिल पर फंसे 9 लोगों को बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने अब तक 9 शव बरामद किए हैं, जिन्हें पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। फिलहाल बिल्डिंग के अंदर तलाशी अभियान अभी भी जारी है, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे कुछ और लोग दबे हो सकते हैं। मौके पर डीडीएमए (DDMA) स्टाफ, ट्रैफिक पुलिस और क्राइम टीम भी जांच में जुटी है।

​शुरुआती जांच में क्या आया सामने?

​पुलिस की क्राइम टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके से साक्ष्य जुटाना शुरू कर दिया है। शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, लेकिन आधिकारिक तौर पर अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। जिस तरह से आग ने पूरी मंजिल को अपनी चपेट में लिया, उससे यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा मानकों (Fire Safety Norms) का पालन किया गया था या नहीं।
​जांच अधिकारियों का कहना है कि इमारत के अंदरूनी हिस्सों में वेंटिलेशन की कमी और ज्वलनशील पदार्थों की मौजूदगी ने आग को और भी घातक बना दिया। धुएं के कारण दम घुटने से भी कई लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है।

​राजधानी में बार-बार होते अग्निकांड: एक बड़ी चेतावनी

​विवेक विहार की यह घटना दिल्ली में अग्नि सुरक्षा की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती है। इससे पहले भी मुंडका, बवाना और झंडेवालान जैसे इलाकों में हुए अग्निकांडों ने प्रशासन को झकझोरा है, लेकिन धरातल पर नियमों की अनदेखी जारी है। घनी आबादी वाले विवेक विहार जैसे इलाकों में कई ऐसी इमारतें हैं जहाँ न तो फायर एनओसी है और न ही आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था।
​मृतकों के परिजनों में मातम

​अस्पताल के बाहर मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अपनों को खोने का गम और प्रशासन की कथित लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। स्थानीय विधायक और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया गया है।

​आगे की कार्रवाई

​पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिल्डिंग के मालिक और वहां चल रही गतिविधियों की जांच की जा रही है। डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने कहा कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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