झांसी/लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सुरक्षा में कटौती को लेकर केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकार पर तीखा प्रहार किया है। झांसी के एक दिवसीय दौरे पर मीडिया से रूबरू होते हुए यादव ने आरोप लगाया कि सरकार सुरक्षा प्रोटोकॉल का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के तौर पर कर रही है।
सुरक्षा के मुद्दे पर घेरा: “राहुल गांधी जैसा हाल मेरा भी किया”
अखिलेश यादव ने अपनी NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) सुरक्षा हटाए जाने की तुलना राहुल गांधी की SPG (विशेष सुरक्षा दल) सुरक्षा हटाए जाने से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह सोची-समझी रणनीति के तहत राहुल गांधी की सुरक्षा छीनी गई और उनका घर खाली कराया गया, ठीक उसी तरह उनसे भी एनएसजी सुरक्षा वापस ले ली गई।
”बीजेपी सरकार सुरक्षा मानकों के साथ खिलवाड़ करती है। मुझे एनएसजी कवर मिला था, जिसे बिना किसी ठोस कारण के हटा लिया गया। सरकार को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किस आधार पर यह सुरक्षा हटाई गई है?” – अखिलेश यादव
उन्होंने आगे कहा कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के लिए जो सुरक्षा प्रोटोकॉल तय हैं, उन्हें मिलना ही चाहिए। यादव ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार हमारे ड्राइवरों और गेट खोलने वालों की गिनती तो सार्वजनिक कर देती है, लेकिन असल सुरक्षा प्रोटोकॉल को दरकिनार कर देती है।
धार्मिक अपमान और ‘बुलडोजर’ नीति पर निशाना
सुरक्षा के अलावा, सपा प्रमुख ने बीजेपी पर शंकराचार्य और धार्मिक भावनाओं के अपमान का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने प्रयागराज माघ मेले की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा:
शंकराचार्य का अपमान: मुख्यमंत्री लगातार शंकराचार्य से प्रमाण पत्र मांगकर उन्हें अपमानित कर रहे हैं।
बटुकों के साथ दुर्व्यवहार: माघ मेले में बटुकों की शिखा खींचकर उन्हें प्रताड़ित किया गया, जो बेहद शर्मनाक है।
माफी की मांग: अखिलेश ने कहा कि मुख्यमंत्री को इन कृत्यों के लिए माफी मांगनी चाहिए थी, क्योंकि माफी मांगना साहस का काम है।
बुलडोजर संस्कृति पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि योगी वही है जो दूसरों का दुख समझे, लेकिन मौजूदा सरकार दूसरों का घर गिरते देख खुश होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब बुलडोजर चलता है, तो मुख्यमंत्री आवास में बैठकर खुशियां मनाई जाती हैं।
निष्कर्ष
अखिलेश यादव के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर ‘VVIP सुरक्षा’ और ‘धार्मिक अस्मिता’ के मुद्दे को गरमा दिया है। चुनाव से पहले विपक्ष का यह आक्रामक रुख साफ कर रहा है कि वे सुरक्षा और स्वाभिमान के मुद्दों पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में हैं।
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