मुख्य बिंदु:
• कहाँ हुआ हादसा: चंबा-मसरूंड मार्ग पर छतरूंड के समीप।
• वजह: मुंडन संस्कार के समारोह (धाम) से लौटते समय वाहन अनियंत्रित हुआ।
• नुकसान: एक ही गांव (महल) के 7 ग्रामीणों की जान गई, जिसमें तीन महिलाएं शामिल।
• स्थानीय आक्रोश: सड़क किनारे क्रैश बैरियर न होने के कारण प्रशासन के खिलाफ नाराजगी।
चंबा। हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में रफ्तार और संभल कर न चलने का खामियाजा एक बार फिर बेगुनाह जानों को चुकाना पड़ा है। जिला चंबा के अंतर्गत आने वाले चंबा-मसरूंड मार्ग पर बुधवार देर रात एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाला सड़क हादसा पेश आया है। यहाँ छतरूंड के पास एक तेज रफ्तार बोलेरो गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी।
इस खौफनाक हादसे में एक ही गांव के सात लोगों की असमय मौत हो गई है। मरने वालों में तीन महिलाएं और तीन पुरुष शामिल हैं, जबकि एक अन्य ने अस्पताल ले जाते समय या इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है।
खुशी का माहौल मातम में बदला, मुंडन की ‘धाम’ खाकर लौट रहे थे ग्रामीण
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दुर्घटना का शिकार हुई बोलेरो गाड़ी (पंजीकरण संख्या: HP-01C-2581) ग्राम पंचायत कुठेड़ के महल गांव की थी। महल गांव के निवासी पास ही स्थित पंचायत के काकड़ोथा गांव में एक मुंडन संस्कार के उपलक्ष्य में आयोजित पारंपरिक भोज (धाम) में शामिल होने गए थे। समारोह में हंसी-खुशी का माहौल था और सभी ग्रामीण जश्न मना रहे थे।
रात को धाम खाने के बाद, सभी लोग अपने घर वापस लौटने के लिए बोलेरो गाड़ी में सवार हुए। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होने वाला है। जैसे ही गाड़ी पुखरी के अंतर्गत चंबा-मसरूंड मार्ग पर छतरूंड के समीप पहुंची, चालक ने अचानक वाहन पर से नियंत्रण खो दिया। ढलान और तीखे मोड़ पर गाड़ी सीधे खाई की तरफ मुड़ गई और कई सौ फीट नीचे जा गिरी।
परखच्चे उड़ी गाड़ी, 6 लोगों की मौके पर ही थमी सांसें
हादसा इतना भीषण और भयावह था कि पहाड़ी से नीचे गिरते समय गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। वाहन के गिरने की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास का इलाका दहल उठा। इस भीषण टक्कर के कारण वाहन में सवार छह लोगों ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पहाड़ी घरों में रहने वाले लोग सहम गए।
देवदूत बनकर पहुंचे स्थानीय ग्रामीण, रात के अंधेरे में चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन
जैसे ही दुर्घटना की भनक आसपास के गांवों के लोगों को लगी, वे तुरंत बिना समय गंवाए पहाड़ी से नीचे खाई की ओर भागे। पुलिस या प्रशासन के पहुंचने से पहले स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाला और राहत एवं बचाव कार्य (Rescue Operation) शुरू किया।
रात के घाने अंधेरे और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते की परवाह न करते हुए ग्रामीण खाई में उतरे। उन्होंने मलबे में तब्दील हो चुकी बोलेरो से शवों और घायलों को बाहर निकालने का कठिन कार्य किया। घटना की सूचना मिलने के काफी बाद पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी मौके पर पहुंचीं, जिसके बाद शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया।
क्रैश बैरियर न होने पर फूटा जनता का गुस्सा
इस दर्दनाक हादसे ने पीडब्ल्यूडी (PWD) और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों का गुस्सा प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि जिस छतरूंड मार्ग पर यह हादसा हुआ, वह बेहद संवेदनशील और खतरनाक है। इसके बावजूद सड़क के किनारे कोई ‘क्रैश बैरियर’ या सुरक्षा दीवार नहीं लगाई गई थी।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अगर विभाग ने समय रहते इस खतरनाक मोड़ पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए होते या क्रैश बैरियर लगाए होते, तो अनियंत्रित होने के बाद भी गाड़ी खाई में नहीं गिरती और इन सात मासूमों की जान बचाई जा सकती थी। लोगों ने सरकार से मांग की है कि हिमाचल की सभी संवेदनशील सड़कों पर तुरंत क्रैश बैरियर लगाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
पुलिस और प्रशासन का बयान: हर पहलू से होगी जांच
हादसे की पुष्टि करते हुए चंबा के पुलिस अधीक्षक (SP) विजय कुमार सकलानी ने बताया, “छतरूंड के समीप एक बोलेरो वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने की सूचना मिलते ही तुरंत पुलिस बल को राहत कार्य के लिए रवाना कर दिया गया था। पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मिलकर शवों को निकाला है। मृतकों की शिनाख्त और अन्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।”
एसपी ने आगे कहा कि पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के असल कारणों की गहनता से जांच की जा रही है। गाड़ी में कोई तकनीकी खराबी थी या यह हादसा मानवीय भूल (ओवरस्पीडिंग/लापरवाही) के कारण हुआ, इसकी हर पहलू से पड़ताल की जाएगी।

