देहरादून में जिला प्रशासन ने बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंटों की मनमानी के खिलाफ सख्ती शुरू कर दी है। लगातार शिकायतें मिलने के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने पुलिस और परिवहन विभाग को निर्देश दिए हैं कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही, अवैध यार्डों में खड़े किए गए वाहन भी जांच के दायरे में आएंगे।
गाड़ियां जबरन उठाई जा रही हैं
कुछ वाहन मालिकों ने शिकायत की कि रिकवरी एजेंट फोन पर धमकी देने के बाद मौके पर दबंगई दिखाकर गाड़ियां जबरन उठा रहे हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई ने गाड़ी जब्त करने की साफ़ और कानूनी प्रक्रिया तय की है।
अवैध यार्डों में वाहन रखे जा रहे हैं
जबरन उठाए गए वाहन शहर के अलग-अलग यार्डों में रखे जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कई यार्ड पूरी तरह अवैध हैं। आईएसबीटी फ्लाईओवर, हरिद्वार बाईपास, रायवाला, ऋषिकेश और सिंघनीवाला जैसे स्थानों पर बाइक, कार और यहां तक कि ट्रक-बस रखी जाती हैं। हल्द्वानी में हाल ही में ऐसे यार्डों पर कार्रवाई की गई थी।
मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज्यादा प्रभावित
ज्यादातर लोग वाहन खरीदने के लिए लोन लेते हैं। किश्त चूकने पर बैंक और फाइनेंस कंपनियां दबाव बनाती हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों को परेशानी होती है।
किश्त न चुकाने पर गाइडलाइन
पहली किश्त न भरने पर: नोटिस और समय देकर भुगतान का मौका।
दो किश्तें चूकने पर: बैंक प्रतिनिधि फोन या घर जाकर संपर्क कर सकते हैं।
तीन किश्तें न भरने पर: गाड़ी जब्त करने का अधिकार, लेकिन वैधानिक प्रक्रिया अनिवार्य।
गाड़ी सरेंडर और नीलामी: मालिक को 15–30 दिन का समय। किश्त चुकाने पर वाहन वापस मिल सकता है। बाकी राशि वाहन स्वामी को लौटाना अनिवार्य।
नियम तोड़ने पर कार्रवाई
जिलाधिकारी ने कहा है कि सड़क पर वाहन जब्त करना गैरकानूनी है। ऐसे मामले में वाहन मालिक पुलिस को सूचित कर सकते हैं और एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकते हैं। परिवहन विभाग और पुलिस ने सभी एजेंसियों की जांच शुरू कर दी है और यार्डों पर निगरानी बढ़ा दी है।