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पिथौरागढ़/धारचूला:

उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के धारचूला क्षेत्र में कुदरत का कहर बरपा है। शुक्रवार रात को हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। धारचूला और आसपास की घाटियों में तबाही मचाते हुए इस आसमानी आफत ने चीन सीमा को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

 

सीमांत क्षेत्र को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र लाइफलाइन ‘टनकपुर-तवाघाट नेशनल हाईवे’ मलबे में तब्दील हो चुका है, जिससे देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील चीन सीमा का संपर्क पूरी तरह से कट गया है। इस आपदा के कारण पांच दर्जन से अधिक सीमांत गांव दुनिया से अलग-थलग पड़ गए हैं, और क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में आदि कैलाश तीर्थयात्री और स्थानीय लोग फंसे हुए हैं।

​आसमानी आफत: 82 मिलीमीटर बारिश ने रोकी जिंदगी की रफ्तार

​मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार, धारचूला तहसील मुख्यालय और उसके उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बीती रात रिकॉर्ड 82 मिलीमीटर (mm) बारिश दर्ज की गई है। इस अत्यधिक वर्षा के कारण पहाड़ी नदी-नाले उफान पर आ गए हैं और जगह-जगह भूस्खलन (Landslides) शुरू हो गया है।

​तबाही का सबसे बड़ा असर टनकपुर-तवाघाट नेशनल हाईवे पर देखने को मिला है। तवाघाट पास के नजदीक विशालकाय चट्टानें खिसककर सड़क पर आ गिरी हैं, जिससे हाईवे का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका है।

इसके अलावा, प्रसिद्ध आदि कैलाश मार्ग पर ‘मलघाट’ के पास पहाड़ी से लगातार भारी पत्थरों की बारिश हो रही है, जिससे इस मार्ग पर पैदल चलना भी मौत को दावत देने जैसा हो गया है। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से इस मार्ग पर आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया है।

​बहे पुल, पांच दर्जन गांवों में ब्लैकआउट और संपर्क भंग

​धारचूला तहसील मुख्यालय में आपदा का भयानक मंजर देखने को मिला। भारी बारिश और नदी के रौद्र रूप के कारण घटखोला से सीनियाखोला को आपस में जोड़ने वाला पैदल पुल भरभराकर बह गया। पुल बह जाने से सीनियाखोला और आसपास के इलाकों का धारचूला मुख्य बाजार से संपर्क पूरी तरह टूट गया है।

​नदियों के बढ़ते जलस्तर और पहाड़ों से गिरते मलबे के कारण चीन सीमा को जोड़ने वाला सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण

तवाघाट-सोबला-तिदाग मार्ग भी चार से पांच अलग-अलग स्थानों पर भारी मलबे के कारण ठप पड़ा है। इस मार्ग के बंद होने से सीमांत क्षेत्र के लगभग 60 से अधिक (पांच दर्जन) गांवों का संपर्क पूरी तरह से भंग हो चुका है।

इन गांवों में न तो राशन की आपूर्ति हो पा रही है और न ही आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं पहुंच पा रही हैं। कई इलाकों में बिजली के पोल बह जाने से ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है।

खौफ की रात: मलबे के डर से रातभर जागते रहे सात परिवार

इस प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय निवासियों के भीतर गहरे खौफ का माहौल पैदा कर दिया है। सीनियाखोला के पास रहने वाले सात परिवारों के घरों के ठीक ऊपर और आसपास से लगातार मलबा और पानी का सैलाब बह रहा था।

घर ढहने और भूस्खलन की चपेट में आने के डर से इन सातों परिवारों ने पूरी रात सो कर नहीं, बल्कि जागकर बिताई। छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर लोग सुरक्षित स्थानों पर दुबके रहे और सुबह होने का इंतजार करते रहे। स्थानीय प्रशासन को सुबह घटना की सूचना दी गई, जिसके बाद राहत और बचाव टीमें मौके के लिए रवाना की गईं।

​आदि कैलाश यात्रा ठप, तवाघाट में फंसे सैकड़ों श्रद्धालु

 

इस मार्ग बंद होने का सबसे बड़ा खामियाजा आदि कैलाश और लिपुलेख (कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग) की यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को भुगतना पड़ रहा है।

एनएच (National Highway) और दोनों प्रमुख सीमा मार्गों के पूरी तरह बंद हो जाने के कारण आदि कैलाश जा रहे तीर्थयात्री बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। धारचूला से व्यास घाटी और दारमा घाटी की ओर जाने वाले दर्जनों यात्री वाहन और मालवाहक गाड़ियां इस समय तवाघाट में ही अटकी हुई हैं। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि जब तक मौसम साफ नहीं हो जाता और मार्ग पूरी तरह से नहीं खुल जाते, तब तक वे अपनी यात्रा को जहां हैं वहीं रोक दें।

युद्धस्तर पर सड़क खोलने का काम शुरू, चुनौतियां बरकरार

​सीमा सड़क संगठन (BRO) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमें भारी मशीनों और जेसीबी (JCB) के साथ बंद रास्तों को खोलने के लिए मोर्चे पर जुट गई हैं।

हालांकि, लगातार खराब हो रहा मौसम और रुक-रुक कर हो रही बारिश राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रही है। पहाड़ी से रह-रह कर गिर रहे बोल्डर (विशाल चट्टानें) मशीनों के ऑपरेटरों के लिए भी जान का जोखिम पैदा कर रहे हैं।

जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। संवेदनशील इलाकों में एसडीआरएफ (SDRF) और स्थानीय पुलिस को अलर्ट मोड पर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि पहली प्राथमिकता फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और पैदल संपर्क मार्गों को बहाल करना है, ताकि आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों तक मदद पहुंचाई जा सके।

मुख्य बिंदु (Quick Takeaways):

कुल बारिश:धारचूला क्षेत्र में बीती रात 82 एमएम भारी वर्षा दर्ज।

प्रभावित मार्ग:टनकपुर-तवाघाट हाईवे, आदि कैलाश मार्ग, लिपुलेख मार्ग और तवाघाट-सोबला-तिदाग मार्ग बंद।

बड़ी क्षति: घटखोला से सीनियाखोला को जोड़ने वाला पैदल पुल नदी के तेज बहाव में बहा।

असर:चीन सीमा से संपर्क पूरी तरह कटा, 5 दर्जन से अधिक सीमांत गांव अलग-थलग पड़े।

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