नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट के इतिहास में साल 2026 सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रनों से करारी शिकस्त देकर टीम इंडिया ने तीसरी बार विश्व कप की ट्रॉफी अपने नाम की। इस जीत के हीरो भले ही जसप्रीत बुमराह (4 विकेट) और अभिषेक शर्मा रहे हों, लेकिन इस पूरी सफलता के पीछे मुख्य कोच गौतम गंभीर का वो ‘मास्टरमाइंड’ था, जिसने डगआउट में बैठकर हारी हुई बाजी को पलटने का दम दिखाया।
आइए जानते हैं गौतम गंभीर की उन 5 रणनीतियों के बारे में, जिन्होंने भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ बना दिया:
1. संजू सैमसन पर ‘गंभीर’ भरोसा: प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट का सफर
गौतम गंभीर हमेशा से संजू सैमसन के टैलेंट के कायल रहे हैं। कोच बनते ही उन्होंने सबसे पहले संजू को टीम में वह सुरक्षा और आत्मविश्वास दिया, जिसकी उन्हें सालों से तलाश थी। गंभीर का यह दांव सही साबित हुआ। संजू ने टूर्नामेंट के अहम मैचों में लगातार तीन अर्धशतक जड़े और ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का खिताब जीतकर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया।
2. अभिषेक शर्मा: फ्लॉप शो के बाद भी मिला साथ
टूर्नामेंट की शुरुआत में अभिषेक शर्मा अपनी लय खोते दिख रहे थे, लेकिन गंभीर को उनकी काबिलियत पर शक नहीं था। फाइनल जैसे बड़े मंच पर जब टीम को तेज शुरुआत की जरूरत थी, तब अभिषेक ने मात्र 21 गेंदों पर 52 रनों की आतिशी पारी खेलकर कीवी गेंदबाजों को पस्त कर दिया। गंभीर का डगआउट में मुस्कुराता हुआ चेहरा यह बताने के लिए काफी था कि उनकी योजना सटीक बैठी है।
3. तिलक वर्मा: फिनिशर के रूप में नया अवतार
मिडल ऑर्डर में संघर्ष कर रहे तिलक वर्मा को बाहर करने के बजाय गंभीर ने उन्हें ‘फिनिशर’ की नई भूमिका दी। कप्तान सूर्या और गंभीर के अटूट समर्थन ने तिलक को निडर बनाया, जिसके चलते उन्होंने डेथ ओवर्स में तूफानी बल्लेबाजी कर भारत को बड़े स्कोर (255 रन) तक पहुँचाने में मदद की।
4. ईशान किशन का ‘मास्टर स्ट्रोक’
6 महीने पहले जो खिलाड़ी टीम से बाहर चल रहा था, उसे गंभीर ने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी के प्रदर्शन के आधार पर वर्ल्ड कप स्क्वाड में शामिल किया। ईशान ने फाइनल में 25 गेंदों पर 54 रनों की धमाकेदार पारी खेलकर गंभीर के चयन को पूरी तरह सही साबित कर दिया।
5. सूर्या और गंभीर की जुगलबंदी
खराब फॉर्म से जूझ रहे सूर्यकुमार यादव को न केवल टीम में बनाए रखा, बल्कि उन्हें नेतृत्व की पूरी आजादी दी। गंभीर और सूर्या का तालमेल मैदान पर साफ नजर आया। फाइनल की जीत के बाद दोनों का भावुक होकर गले मिलना भारतीय क्रिकेट की एक नई सुबह का संकेत था।
डगआउट से पलटा मैच का पासा
सेमीफाइनल में जब मैच फंसा हुआ था, तब गंभीर ने ही सूर्या को संकेत देकर 19वां ओवर हार्दिक पांड्या से करवाया। हार्दिक ने केवल 9 रन दिए और वहीं से भारत की जीत तय हो गई। गंभीर की यही ‘गेम अवेयरनेस’ आज भारत को चैंपियन बना चुकी है।
निष्कर्ष:
यह विश्व कप जीत केवल खिलाड़ियों के प्रदर्शन की नहीं, बल्कि गौतम गंभीर के अडिग विश्वास और रणनीतिक सूझबूझ की जीत है। गंभीर ने साबित कर दिया कि एक अच्छा कोच केवल तकनीक नहीं सिखाता, बल्कि खिलाड़ियों को मानसिक रूप से विजेता बनाता है।

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