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देहरादून:

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून को नया प्रशासनिक नेतृत्व मिल गया है। वर्ष 2012 बैच के तेजतर्रार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सोमवार को देहरादून के नए जिलाधिकारी (District Magistrate) के रूप में विधिवत कार्यभार ग्रहण कर लिया है। शासन द्वारा जारी स्थानांतरण सूची के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली है। वहीं, देहरादून के पूर्व जिलाधिकारी सविन बंसल का स्थानांतरण सचिवालय में किया गया है, जहाँ वे अपनी नई भूमिका में सेवाएं देंगे।

​डॉ. आशीष चौहान की गिनती उत्तराखंड के बेहद कुशल, संवेदनशील और तकनीक-प्रेमी अधिकारियों में होती है। राजधानी के जिलाधिकारी के रूप में उनकी नियुक्ति को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और उम्मीद जताई जा रही है कि उनके आने से जिले के विकास कार्यों को एक नई गति और दिशा मिलेगी।
​कोषागार से की शुरुआत, अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश

​नवनियुक्त जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने पदभार ग्रहण करने की शुरुआत मुख्य कोषागार (Treasury) पहुंचकर की। कार्यभार संभालने से ठीक पहले उन्होंने पूरे कोषागार परिसर का औचक निरीक्षण किया और वहाँ की मौजूदा व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कोषागार के विभिन्न पटलों पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत कर कामकाज की जानकारी ली।

​निरीक्षण के दौरान डॉ. चौहान ने शासकीय अभिलेखों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने बुजुर्ग पेंशनरों की सहूलियत के लिए ‘डिजिटल सत्यापन’ (Digital Verification) की प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के कड़े निर्देश दिए, ताकि किसी भी वरिष्ठ नागरिक को अनावश्यक रूप से दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
​चारधाम यात्रा और आपदा प्रबंधन रहेंगी मुख्य प्राथमिकताएं

​पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों से मुखातिब होते हुए डॉ. आशीष चौहान ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा संचालित सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से पहुंचाना उनकी सबसे पहली प्राथमिकता होगी।

​चूंकि देहरादून जिला चारधाम यात्रा का मुख्य प्रवेश द्वार भी है, इसलिए डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चल रही चारधाम यात्रा के सुचारू और सुरक्षित प्रबंधन को और अधिक मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही, उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मानसून सीजन से पहले आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की तैयारियों को समय पर पूरा करने और जिले में लंबित पड़ी बड़ी विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा।
​तकनीक और नवाचार के पर्याय रहे हैं डॉ. आशीष चौहान

​डॉ. आशीष चौहान इससे पहले प्रदेश के कई महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण जिलों जैसे पिथौरागढ़, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल में जिलाधिकारी के रूप में अपनी सफल सेवाएं दे चुके हैं। इन जिलों में उनके कार्यकाल के दौरान तकनीक आधारित जनहितकारी पहलों, स्वास्थ्य सेवाओं में किए गए नए प्रयोगों, सड़क सुरक्षा और पर्यटन विकास के कार्यों को राज्य स्तर पर काफी सराहना मिली है।

• ​’सेफ सफर ऐप’ (Safe Safar App): पौड़ी गढ़वाल के जिलाधिकारी रहते हुए डॉ. चौहान ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ‘सेफ सफर ऐप’ की शुरुआत की थी, जिसे सड़क सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना गया।
• ​’काव्या ऐप’ (Kavya App): स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार करते हुए उन्होंने हाई रिस्क (उच्च जोखिम) वाली गर्भवती महिलाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए ‘काव्या ऐप’ लॉन्च किया था। इस डिजिटल पहल ने ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में बेहद प्रभावी भूमिका निभाई।
• ​’त्रिशूल पार्क’ परियोजना: इसके अतिरिक्त, पौड़ी में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन को एक नया आयाम देने के लिए उनके नेतृत्व में ‘त्रिशूल पार्क’ को विकसित करने की योजना पर काम शुरू हुआ, जो आज पर्यटन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।

​प्रशासन में तकनीक और मानवीय संवेदनाओं के बेहतरीन समन्वय के लिए पहचाने जाने वाले डॉ. चौहान से अब राजधानी देहरादून के निवासियों को भी इसी प्रकार की नवाचार आधारित कार्यशैली और त्वरित प्रशासनिक समाधानों की बड़ी उम्मीदें हैं।

​याद किया जाएगा पूर्व डीएम सविन बंसल का ‘पीपुल्स एडमिनिस्ट्रेटर’ का कार्यकाल

​देहरादून के निर्वतमान जिलाधिकारी सविन बंसल का कार्यकाल भी जिले के इतिहास में काफी ऐतिहासिक रहा। सितंबर 2024 में पदभार संभालने के बाद से उन्होंने जिला प्रशासन को सीधे जनता से जोड़ने के लिए कई यादगार काम किए।

​अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावी कार्यकाल में सविन बंसल ने समाज के वंचित वर्गों के लिए कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए। बालिकाओं की शिक्षा और उनके उज्जवल भविष्य को समर्पित उनकी ‘नंदा-सुनंदा’ पहल को राज्यभर में व्यापक सराहना मिली। इसके अलावा, देहरादून की सड़कों पर भिक्षावृत्ति (भीख मांगने वाले) और कूड़ा बीनने वाले बेसहारा बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके शिक्षा-पुनर्वास के लिए चलाया गया उनका विशेष अभियान बेहद सफल रहा। जनता की शिकायतों को सीधे सुनने और उनका तुरंत निस्तारण करने की अद्भुत क्षमता के कारण देहरादून की जनता उन्हें “पीपुल्स एडमिनिस्ट्रेटर” (जनता का अधिकारी) के रूप में याद करती है।

​चुनौतियों से भरा होगा देहरादून का सफर

​राजधानी देहरादून की कमान संभालना किसी भी प्रशासनिक अधिकारी के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती होता है। यहाँ शहरीकरण, ट्रैफिक जाम, अतिक्रमण, और मानसून के समय जलभराव जैसी कई स्थानीय समस्याएं हमेशा सिर उठाए रहती हैं।

​चूंकि डॉ. आशीष चौहान को पहाड़ों में काम करने का लंबा अनुभव है और वे जमीनी हकीकत से भली-भांति वाकिफ हैं, ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि वे अपनी तकनीकी सूझबूझ और दूरदर्शी सोच के जरिए देहरादून की इन ढांचागत समस्याओं का क्या स्थायी समाधान निकालते हैं। जिला प्रशासन के तमाम अधिकारियों ने नए जिलाधिकारी का स्वागत करते हुए शासन की नीतियों के अनुरूप काम करने का संकल्प दोहराया है।

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