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कानपुर, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से पुलिसिया बर्बरता का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रक्षक और भक्षक के बीच के अंतर को धुंधला कर दिया है। घाटमपुर थाना क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने छुट्टी पर घर आए भारतीय वायुसेना (IAF) के एक जवान के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि हवालात में उसे इतनी बेरहमी से पीटा कि उसका बाएं कान का पर्दा फट गया।
क्या है पूरा मामला?
गुजरात के जामनगर एयरफोर्स स्टेशन में तैनात वायुसैनिक नीतीश कुमार इन दिनों अपने घर आए हुए थे। घटना 19 फरवरी की रात करीब 11:30 बजे की है। नीतीश अपने एक दोस्त के भाई की शादी से पैदल ही घर लौट रहे थे। रेलवे क्रॉसिंग के पास गश्त कर रही पुलिस की बोलेरो ने उन्हें रोका।
नीतीश की मां रेखा सचान के अनुसार, उनके बेटे ने अपना परिचय देते हुए बताया कि वह ‘फौजी’ है, लेकिन आरोप है कि दरोगा रविंद्र सिंह बुंदेला ने उनका कॉलर पकड़ लिया और गाली-गलौज शुरू कर दी।
वीडियो बनाने पर भड़की पुलिस, दी ‘थर्ड डिग्री’
परिजनों का आरोप है कि जब नीतीश ने पुलिस की इस बदसलूकी का विरोध किया और अपने मोबाइल से वीडियो बनाने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मी आपा खो बैठे। पुलिस ने उनका फोन छीन लिया और अतिरिक्त बल बुलाकर उन्हें जबरन गाड़ी में डालकर थाने ले गए।
परिजनों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप:
बेरहमी से पिटाई: थाने के भीतर दरोगा रविंद्र सिंह बुंदेला, चौकी इंचार्ज शैलेंद्र सिंह और हेड कांस्टेबल प्रदीप कुमार ने दो अन्य सिपाहियों के साथ मिलकर जवान को लात-घूंसों से पीटा।
गंभीर चोटें: पिटाई के कारण नीतीश के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उनके कान का पर्दा फट गया।
लापरवाही: डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति देखते हुए उर्सला अस्पताल रेफर किया था, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उन्हें वहां नहीं ले जाकर मामले को दबाने की कोशिश की।
शांतिभंग का चालान: खुद को बचाने के लिए पुलिस ने घायल जवान का धारा 151 (शांतिभंग) में चालान कर दिया।
सोशल मीडिया पर आक्रोश और विभागीय हलचल
वर्तमान में घायल जवान का इलाज 7 एयरफोर्स हॉस्पिटल, कानपुर में चल रहा है। जैसे ही चोटों की तस्वीरें और घटना का विवरण सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, वायुसेना के अधिकारियों तक यह बात पहुंची। इसके बाद कानपुर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया।
जांच के आदेश: क्या मिलेगी सजा?
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने जांच के आदेश दिए हैं। हालांकि, पुलिस का शुरुआती बयान यह है कि नीतीश ‘संदिग्ध अवस्था’ में मिले थे और पहचान पत्र मांगने पर उन्होंने अभद्रता की थी।
फिलहाल, एडीसीपी साउथ योगेश कुमार को इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सौंपी गई है। वायुसेना और आम जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या वर्दी का रौब दिखाने वाले दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही होगी?

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