भूमध्य सागर: दुनिया का सबसे आधुनिक, सबसे महंगा और सबसे शक्तिशाली परमाणु विमानवाहक पोत यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड (USS Gerald R. Ford) इन दिनों एक अजीबोगरीब संकट से जूझ रहा है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच भूमध्य सागर में तैनात हजारों अमेरिकी नौसैनिक दुश्मन की मिसाइलों से नहीं, बल्कि जहाज के खराब शौचालयों से परेशान हैं। हालत यह है कि एक सैनिक को अपनी बारी के लिए 45 मिनट से एक घंटे तक कतार में खड़ा रहना पड़ रहा है।
1.18 लाख करोड़ का जहाज, पर सिस्टम फेल
करीब 13 अरब डॉलर (1.18 लाख करोड़ रुपये) की लागत से बना यह विशालकाय युद्धपोत अपनी इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन इसका वैक्यूम कलेक्शन और होल्डिंग सिस्टम (VCHT) बड़ी सिरदर्द बन गया है। इस जहाज पर 4,600 नौसैनिकों के लिए 650 शौचालय हैं, लेकिन तकनीकी खामी के कारण अक्सर 90% शौचालय ठप हो जाते हैं।
क्यों पैदा हुआ यह ‘शौचालय संकट’?
जटिल पाइपलाइन: क्रूज जहाजों की तर्ज पर बना इसका सीवरेज सिस्टम बेहद जटिल है। पाइप संकरे होने के कारण टॉयलेट पेपर या मामूली कचरा भी पूरे सिस्टम को ब्लॉक कर देता है।
चेन रिएक्शन: सिस्टम ऐसा है कि अगर एक वॉल्व खराब होता है, तो उस पूरे जोन के दर्जनों शौचालय बंद हो जाते हैं।
लगातार खराबी: साल 2025 में ही 32 बार बड़े ब्रेकडाउन की शिकायत हुई। रिकॉर्ड के मुताबिक, महज चार दिनों में 205 बार शौचालय खराब होने की घटनाएं दर्ज की गईं।
सैनिकों की सेहत और मनोबल पर खतरा
ट्रंप प्रशासन ईरान पर हमले की धमकियां दे रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि युद्ध के मुहाने पर खड़े नौसैनिक मानसिक तनाव और शारीरिक बीमारियों के घेरे में हैं। 11 महीने से समुद्र में तैनात ये सैनिक परिवार से दूर हैं और अब बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने उनकी चुनौती बढ़ा दी है।
इंजीनियरिंग टीमें 19-19 घंटे की शिफ्ट कर रही हैं, लेकिन समुद्र के बीचों-बीच इसकी पूरी मरम्मत मुमकिन नहीं है। इसके लिए जहाज को डॉकयार्ड वापस लाना होगा, जो मौजूदा युद्ध जैसे हालातों में संभव नहीं है।
ईरान हमले की तैयारी पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सैनिक अपनी बुनियादी जरूरतों (शौच) के लिए तरसेंगे, तो उनकी युद्ध क्षमता (Combat Readiness) प्रभावित होगी। दुनिया के सबसे उन्नत एयरक्राफ्ट कैरियर का इस तरह एक ‘टॉयलेट क्राइसिस’ में फंसना अमेरिकी नौसेना की साख पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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