भारतीय संगीत जगत की ‘मधुर आवाज’ कही जाने वाली श्रेया घोषाल अपनी बेबाक राय के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान उन्होंने लाइव कॉन्सर्ट में ‘लिप-सिंकिंग’ (Lip-syncing) करने वाले कलाकारों पर तीखा हमला बोला है। श्रेया ने इसे न केवल आलस बताया, बल्कि इसे संगीत की दुनिया में एक ‘बेइज्जती’ करार दिया है।
“यह आलस है, कला नहीं”: श्रेया घोषाल का कड़ा रुख
राज शमानी के साथ एक पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए श्रेया ने स्पष्ट किया कि लाइव शो का मतलब वास्तव में ‘लाइव’ गाना होना चाहिए। उन्होंने कहा:
“लिप-सिंक करना एक आलसी काम है। इसका सीधा मतलब है कि आपने पर्याप्त मेहनत नहीं की है। एक कलाकार के तौर पर मेरे अपने कुछ सिद्धांत हैं और मुझे यह स्वीकार्य नहीं है।”
श्रेया का मानना है कि जब प्रशंसक आपको लाइव सुनने के लिए टिकट खरीदते हैं, तो उन्हें रिकॉर्डेड आवाज सुनाना उनके भरोसे के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर कोई कलाकार मंच पर अपनी आवाज का जादू नहीं बिखेर सकता, तो उसे उस ‘राजगद्दी’ या सफलता का सम्मान करना चाहिए जो जनता ने उसे दी है।
खुद के लिए भी तय किए कड़े मानक
श्रेया ने केवल दूसरों की आलोचना नहीं की, बल्कि खुद के लिए भी ऊंचे मानक तय किए। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद बुरा लगेगा अगर वह कभी ऐसा प्रदर्शन करें जिसे वह खुद दोबारा न सुन सकें। उनके अनुसार, एक गायक को हर दिन रियाज करना चाहिए और अपनी कला को निखारना चाहिए, न कि सफलता मिलने के बाद उसे हल्के में लेना चाहिए।
विवादों के घेरे में ‘लिप-सिंकिंग’ और एपी ढिल्लों
श्रेया घोषाल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर लाइव परफॉर्मर्स की गुणवत्ता को लेकर बहस छिड़ी हुई है। हाल ही में मशहूर पंजाबी सिंगर एपी ढिल्लों को ‘द ग्रेट इंडियन कपिल शो’ में उनके परफॉर्मेंस के लिए काफी ट्रोल किया गया था। दर्शकों का आरोप था कि उन्होंने लाइव गाने के बजाय लिप-सिंक का सहारा लिया। इसके पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गायकों को स्टेज पर रिकॉर्डेड गानों का इस्तेमाल करने के लिए आलोचना झेलनी पड़ी है।
श्रेया घोषाल: संघर्ष से शिखर तक का सफर
श्रेया का यह अनुशासन ही है जिसने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है। उनके करियर की कुछ मुख्य बातें:
डेब्यू: मात्र 16 साल की उम्र में फिल्म ‘देवदास’ के गाने ‘बैरी पिया’ से करियर की शुरुआत की।
उपलब्धि: अपनी पहली ही फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया।
बहुमुखी प्रतिभा: उन्होंने हिंदी के अलावा बंगाली, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम जैसी कई भाषाओं में अपनी आवाज दी है।
प्रसिद्ध गीत: ‘जादू है नशा है’, ‘ये इश्क हाय’, ‘धीरे जलना’ और हालिया ‘मातृभूमि’ जैसे गीतों ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।
निष्कर्ष: असली हुनर बनाम दिखावा
श्रेया घोषाल की यह खरी-खोटी उन उभरते हुए और स्थापित कलाकारों के लिए एक सीख है जो शॉर्टकट अपनाते हैं। उनका संदेश साफ है—अगर आपने संगीत की दुनिया में अपना नाम कमाया है, तो उसे बरकरार रखने के लिए हर दिन कड़ी मेहनत और ईमानदारी की जरूरत होती है। लाइव कॉन्सर्ट केवल रोशनी और डांस का नाम नहीं, बल्कि सुरों के साथ दर्शकों के जुड़ाव का नाम है।
Add A Comment

