देहरादून:
उत्तराखंड में मौसम के बदलते मिजाज के बीच मौसमी और संक्रामक बीमारियों ने स्वास्थ्य तंत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। प्रदेश में इन्फ्लुएंजा वायरस (H1N1) का दायरा तेजी से फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी ताजा बुलेटिन के अनुसार, राज्य में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 557 तक पहुंच गई है। बीते 24 घंटे में 24 नए मामलों की पुष्टि हुई है। राहत की बात यह है कि कुल संक्रमितों में से 472 मरीज इलाज के बाद पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 83 सक्रिय मरीजों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। संक्रमण के कारण राज्य में अब तक 2 मरीजों की मौत दर्ज की गई है।
24 घंटे में 24 नए मामले: राजधानी देहरादून बना हॉटस्पॉट
बीते 24 घंटों के भीतर मिले 24 नए मरीजों में से अकेले देहरादून जिले से 12 मरीज सामने आए हैं, जबकि शेष 12 मामले अन्य जिलों से दर्ज किए गए हैं। आंकड़ों से स्पष्ट है कि राजधानी देहरादून इस समय वायरस के प्रसार का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग ने अब तक स्वाइन फ्लू की पुष्टि के लिए कुल 1572 संदिग्ध सैंपलों की जांच की है, जिसमें से अकेले देहरादून जिले से 370 और अन्य जिलों से 187 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं।
बुजुर्ग और बच्चे सबसे आसान शिकार: आयु वर्ग के अनुसार आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट ने इस बात की तस्दीक की है कि H1N1 वायरस का सबसे गंभीर असर कमजोर इम्यूनिटी वाले समूहों—विशेष रूप से मासूम बच्चों और बुजुर्गों—पर देखा जा रहा है। आयु वर्ग के आधार पर सामने आए 557 मामलों का विश्लेषण इस प्रकार है:
- 1 से 10 वर्ष: 88 बच्चे
- 11 से 20 वर्ष: 47 मरीज
- 21 से 30 वर्ष: 62 मरीज
- 31 से 40 वर्ष: 50 मरीज
- 41 से 50 वर्ष: 54 मरीज
- 51 से 60 वर्ष: 87 मरीज
- 61 से 70 वर्ष: 94 मरीज (सर्वाधिक प्रभावित वर्ग)
- 71 से 80 वर्ष: 61 मरीज
- 81 से 100 वर्ष: 14 मरीज
लिंग आधारित आंकड़ों पर नजर डालें तो संक्रमण में पुरुषों की संख्या महिलाओं से अधिक है। कुल दर्ज 557 मामलों में 298 पुरुष और 259 महिला मरीज शामिल हैं।
तिहरी मार: स्वाइन फ्लू के साथ डेंगू और कोरोना भी सक्रिय
उत्तराखंड में इस वक्त केवल स्वाइन फ्लू ही चुनौती नहीं बना हुआ है, बल्कि कोरोना और डेंगू के मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्थिति को ‘ट्रिपल अटैक’ जैसा बना दिया है।
- डेंगू का प्रकोप: राज्यभर में वेक्टर जनित बीमारियों की निगरानी के लिए अब तक 30,606 संदिग्ध सैंपल जांचे गए हैं। इनमें से 184 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है, जिसमें 86 मरीज देहरादून जिले के और 98 अन्य जिलों के हैं। वर्तमान में 158 मरीज रिकवर हो चुके हैं, जबकि 26 एक्टिव मामलों का उपचार चल रहा है।
- कोरोना के मामले: कोविड संक्रमण की जांच के लिए जुटाए गए 787 सैंपलों में से 53 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें 26 मामले देहरादून और 27 मरीज अन्य जिलों से जुड़े हैं।
स्वाइन फ्लू (H1N1) के प्रमुख लक्षण
चिकित्सकों के अनुसार, मौसम में ठंडक और नमी बढ़ने के कारण वायरस के प्रसार की गति तेज हो जाती है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:
- अचानक तेज बुखार आना और तेज ठंड या कंपकंपी लगना।
- लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी और सीने में जकड़न।
- गले में तेज दर्द, खराश और निगलने में तकलीफ।
- सिरदर्द के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में तेज ऐंठन।
- अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और जल्दी थकान महसूस होना।
- नाक बहना या सांस लेने में भारीपन और सांस फूलना।
- बच्चों में मुख्य रूप से उल्टी और दस्त (डायरिया) के लक्षण दिखाई देना।
बचाव और आवश्यक सावधानियां
संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनसामान्य से कोविड-उपयुक्त व्यवहार दोहराने की अपील की है:
- भीड़-भाड़ वाले और बंद स्थानों पर अनिवार्य रूप से सर्जिकल या एन-95 मास्क लगाएं।
- हाथों को बार-बार साबुन-पानी से 20 सेकंड तक धोएं अथवा एल्कोहल-युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
- खांसते या छींकते समय हमेशा मुंह और नाक को डिस्पोजेबल टिशू या रुमाल से ढकें।
- आंख, नाक और मुंह को बिना हाथ धोए बार-बार छूने से बचें।
- यदि बुखार या खांसी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत खुद को आइसोलेट करें और परिजनों से सुरक्षित दूरी बनाएं।
- पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी, सूप और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा भरपूर आराम लें।
- बिना रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की सलाह के कोई भी एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवा न लें।
स्वास्थ्य महकमे का निर्देश: मॉनिटरिंग और जांच तेज करने के आदेश
प्रदेश में बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) और अस्पताल प्रभारियों को सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड और आवश्यक दवाओं का स्टॉक दुरुस्त रखने को कहा गया है।
”जिले के सभी स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सा प्रभारियों को लगातार मॉनिटरिंग के निर्देश जारी किए गए हैं। अस्पतालों की फ्लू ओपीडी में आने वाले संदिग्ध मरीजों की सघन जांच, त्वरित उपचार और स्थिति पर बारीक नजर रखी जा रही है। मामलों में जरा सी भी वृद्धि दिखने पर तत्काल नियंत्रण संबंधी कदम उठाने के आदेश हैं।”
— डॉ. मनोज शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), देहरादून
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इन्फ्लुएंजा वायरस से डरने या पैनिक करने के बजाय समय पर पहचान और चिकित्सीय परामर्श ही इस संक्रमण से बचाव का सबसे कारगर रास्ता है।
