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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ का आशियाना इलाका पिछले कुछ दिनों से एक ऐसी खौफनाक वारदात की गवाह बना है, जिसने रिश्तों की गरिमा और इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। शराब और दवा कारोबारी मानवेन्द्र सिंह की हत्या के आरोपी बेटे अक्षत को जब पुलिस तफ्तीश के लिए वापस उसी ‘क्राइम सीन’ पर लेकर पहुंची, तो मंजर देखने लायक था। कल तक जो बेटा बेखौफ होकर पिता के शरीर पर वार कर रहा था, आज कानून के शिकंजे में उसकी रूह कांपती नजर आई।
अपराध बोध या कानून का खौफ?
मंगलवार को जब लखनऊ पुलिस की टीम आरोपी अक्षत को हथकड़ियों में जकड़कर उसके घर ले गई, तो वहां का माहौल भारी था। पुलिस का मकसद साफ था—वारदात के हर पहलू को समझना, सबूतों का मिलान करना और उस खौफनाक रात की कड़ियों को जोड़ना।
हैरानी की बात यह है कि जिस युवक ने ठंडे दिमाग से अपने पिता को गोली मारी और फिर पहचान छिपाने के लिए शव के टुकड़े-टुकड़े कर दिए, उसके चेहरे पर अब आत्मविश्वास का नामोनिशान नहीं था। घर की दहलीज पार करते ही अक्षत के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं और माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगीं।
हर कमरे में बिखरी थी कत्ल की दास्तां
पुलिस अक्षत को घर के उन तमाम हिस्सों में ले गई, जहां उसने इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया था। पूछताछ के दौरान पुलिस ने उससे कई तीखे सवाल किए:
गोली कहाँ चलाई गई?
शव को काटने के लिए किन औजारों का इस्तेमाल हुआ?
साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश कैसे की गई?
जैसे-जैसे पुलिस उसे घर के अलग-अलग कोनों में घुमा रही थी, अक्षत की घबराहट बढ़ती जा रही थी। वह बुरी तरह डरा और सहमा हुआ था। शायद घर की दीवारें उसे उस रात की चीखें और खून के धब्बे याद दिला रही थीं।
रिश्तों का कत्ल और समाज में दहशत
मानवेन्द्र सिंह की हत्या ने न केवल उनके परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि समाज में भी एक गहरी चिंता पैदा कर दी है। एक बेटा, जिसे बुढ़ापे की लाठी बनना था, वही अपने पिता का काल बन गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अक्षत ने प्रारंभिक पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है, लेकिन पुलिस अब वैज्ञानिक साक्ष्यों (Forensic Evidence) के जरिए केस को अदालत में पुख्ता करना चाहती है।
पुलिस की कार्रवाई और अगला कदम
लखनऊ पुलिस इस मामले में बेहद मुस्तैद नजर आ रही है। क्राइम सीन के रिक्रिएशन के दौरान फोरेंसिक टीम ने भी कई महत्वपूर्ण नमूने एकत्र किए हैं। पुलिस का मानना है कि अक्षत ने अकेले ही इस वारदात को अंजाम दिया या इसमें कोई और भी शामिल था, इस पहलू पर भी जांच जारी है।
फिलहाल, सलाखों के पीछे पहुंचा यह ‘कसाई’ बेटा अब कानून के उस कड़े प्रहार का सामना कर रहा है, जिससे बचना उसके लिए नामुमकिन है। लखनऊ के इस हत्याकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के हाथ अंततः मुजरिम की गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं।

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