पिथौरागढ़ में आसमानी आफत: तवाघाट हाईवे बंद होने से चीन सीमा का संपर्क टूटा, बाराबीसी सहित दर्जनों ग्रामीण सड़कें बदहाल
पिथौरागढ़
उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। मॉनसून की भारी बारिश के चलते संवेदनशील पहाड़ियों से लगातार मलबा और भारी बोल्डर गिर रहे हैं, जिसके कारण सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण धारचूला-तवाघाट नेशनल हाईवे पूरी तरह से ठप हो गया है।
तवाघाट के समीप मुख्य मार्ग बंद होने की वजह से चीन सीमा को जोड़ने वाला संपर्क पूरी तरह से कट गया है। इस रास्ते के बंद होने से दारमा, चौदास और व्यास वैली का शेष दुनिया से सड़क संपर्क टूट गया है, जिससे सीमांत क्षेत्र में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर भी संकट गहराने लगा है।
बीआरओ युद्धस्तर पर मार्ग खोलने में जुटा
चीन सीमा की संवेदनशीलता और सामरिक महत्व को देखते हुए बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) की टीमें भारी मशीनों और जेसीबी के साथ मलबे को हटाने के काम में जुटी हुई हैं।
हालांकि, पहाड़ी से लगातार रुक-रुक कर गिर रहे पत्थरों और मलबे के कारण राहत व बचाव कार्य में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सीमांत क्षेत्र के कई गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से पूरी तरह कट जाने के कारण स्थानीय निवासियों में भी चिंता का माहौल है।
बाराबीसी क्षेत्र के संपर्क मार्गों की स्थिति दयनीय, ग्रामीण परेशान
हाईवे के साथ-साथ पिथौरागढ़ के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों की सड़कें भी इस समय बदहाली के आंसू रो रही हैं। विशेष रूप से बाराबीसी क्षेत्र की कई मुख्य और लिंक सड़कें इन दिनों पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
लंबे समय से रखरखाव न होने और अब लगातार हो रही मानसूनी बारिश के कारण सड़कों पर गहरे-गहरे गड्ढे बन गए हैं। डामर पूरी तरह उखड़ चुका है और सड़क की सतह मलबे में तब्दील हो गई है।
क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग लंबे समय से उपेक्षा का शिकार हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
• मेलापानी-देवलथल मार्ग
• देवलथल-उड़ाई मार्ग
• उड़ाई-खोला संपर्क मार्ग
• मसराड़ी-मरौठ रोड
• बुंगाछीना-हरिनंदा मार्ग
• सुवालेख-रसैपाटा मार्ग
• चमू बैंड-धुरौली मार्ग
• देवलथल-कनालीछीना मार्ग
इन सभी मार्गों पर जगह-जगह सड़क का एक बड़ा हिस्सा या तो भूस्खलन की भेंट चढ़ चुका है या फिर गहरे मलबे के नीचे दब गया है। इसके चलते वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वाले राहगीरों को भी जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा भारी असर, दुर्घटनाओं का बढ़ा खतरा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बदहाल सड़कों के कारण क्षेत्र की पूरी अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन पटरी से उतर गया है। सड़कों की दुर्दशा की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को हो रही है।
समय पर वाहन न मिलने और रास्ते बंद होने से मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में घंटों की देरी हो रही है। इसके साथ ही, स्थानीय किसानों के सामने अपने कृषि उत्पादों और नकदी फसलों को मुख्य बाजार तक पहुंचाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
दुर्घटनाओं को न्योता देते जलभराव वाले गड्ढे:
बरसात के इस मौसम में सड़कों पर बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक गहराई और स्थिति का अंदाजा नहीं मिल पाता। इसके कारण आए दिन दुपहिया और चौपहिया वाहन इन गड्ढों में फंसकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग और प्रशासन मानसून से पहले की तैयारियों में पूरी तरह विफल रहा है।
ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
सड़कों की इस खस्ताहाल स्थिति को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार ने शासन-प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) को आड़े हाथों लेते हुए जल्द से जल्द इन सड़कों की मरम्मत करने और इन्हें तत्काल गड्ढा मुक्त बनाने की मांग की है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विभाग ने जल्द ही इन बदहाल ग्रामीण सड़कों को दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होगी और प्रशासन के खिलाफ एक उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।
विभाग का क्या है कहना?
इस पूरे मामले पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) पिथौरागढ़ के जूनियर इंजीनियर (JE) अजय सिंह ने बताया कि विभाग सड़कों की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। देवलथल-मेलपानी सड़क की स्थिति को सुधारने के लिए वहां इंटरलांकिंग टाइल्स लगाने का एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही बजट और प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, काम शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, अन्य बदहाल सड़कों को भी यातायात के लिए सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं और संवेदनशील जगहों पर मलबे की सफाई की जा रही है।

