ऋषिकेश।

उत्तराखंड के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल ऋषिकेश से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के ऐतिहासिक त्रिवेणी घाट पर गंगा स्नान के दौरान एक छोटा सा चश्मा बचाने की कोशिश में 17 वर्षीय किशोर पानी के बेहद तेज बहाव की चपेट में आ गया और देखते ही देखते नदी में बह गया। यह दर्दनाक हादसा रविवार सुबह उस समय हुआ जब देहरादून से चार दोस्तों का एक समूह ऋषिकेश घूमने आया हुआ था। दोस्तों के सामने ही उनका साथी लहरों में विलीन हो गया, जिससे घाट पर चीख-पुकार मच गई।

​सूचना मिलते ही स्थानीय जल पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। हालांकि, गंगा का वेग तेज होने के कारण खबर लिखे जाने तक लापता किशोर का कुछ पता नहीं चल पाया है। इस घटना के बाद से किशोर के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

​देहरादून से दोस्तों के साथ आया था ऋषिकेश घूमने

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के ओल्ड कनाट प्लेस, चकराता रोड का रहने वाला 17 वर्षीय आयुष थापा पुत्र सुनील थापा, अपने तीन अन्य दोस्तों के साथ ऋषिकेश की यात्रा पर आया था। दोस्तों ने पुलिस को बताया कि वे सभी सप्ताहांत (वीकेंड) पर ऋषिकेश के प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन और घूमने की योजना बनाकर घर से निकले थे।

​रविवार की सुबह करीब 7:30 बजे चारों दोस्त स्नान करने और अध्यात्म का आनंद लेने के लिए त्रिवेणी घाट पहुंचे थे। सुबह का समय होने के कारण घाट पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल थी और चारों दोस्त गंगा के ठंडे पानी में नहाने का आनंद ले रहे थे। लेकिन किसे पता था कि चंद मिनटों की एक छोटी सी भूल इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगी।
​चश्मा उठाने के चक्कर में गहराया संकट

​एसडीआरएफ (SDRF) ढालवाला के निरीक्षक कवींद्र सजवाण ने घटना के विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि यह हादसा रविवार सुबह लगभग 7:40 बजे घटित हुआ। चश्मदीदों और दोस्तों से की गई पूछताछ के मुताबिक, जब आयुष थापा गंगा नदी में नहा रहा था, तभी अचानक उसका चश्मा आंखों से फिसलकर पानी में गिर गया।

​आयुष ने तुरंत चश्मे को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन पानी के प्रवाह के कारण चश्मा तेजी से आगे की ओर बहने लगा। चश्मे को डूबने से बचाने की धुन में आयुष भी पानी के भीतर कुछ कदम आगे बढ़ गया। त्रिवेणी घाट पर गंगा का तल कहीं-कहीं अचानक गहरा है और पानी की गति अत्यंत तीव्र है। जैसे ही आयुष ने आगे कदम बढ़ाया, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह मुख्य धारा के तेज बहाव की चपेट में आ गया।
​दोस्तों के सामने ही हुआ ओझल, मची चीख-पुकार

​आयुष को पानी के तेज बहाव में बहता और संघर्ष करता देख घाट के किनारे खड़े उसके दोस्तों के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू किया और आसपास मौजूद स्थानीय लोगों व नाविकों से मदद की गुहार लगाई। आयुष कुछ दूरी तक पानी की सतह पर हाथ-पैर मारता हुआ दिखाई दिया, लेकिन नदी का वेग इतना भयानक था कि वह कुछ ही सेकंडों में गहरे पानी में समा गया और आँखों से ओझल (अदृश्य) हो गया।

​घाट पर मौजूद लोगों ने तुरंत इस घटना की जानकारी स्थानीय पुलिस चौकी और आपदा प्रबंधन टीम को दी। सूचना मिलते ही जल पुलिस के गोताखोर और एसडीआरएफ ढालवाला के जवान अपने आधुनिक सुरक्षा उपकरणों, नावों और राफ्ट के साथ मौके पर पहुंच गए।
​रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

​घटना के तुरंत बाद से ही जल पुलिस और एसडीआरएफ के जवानों द्वारा संयुक्त रूप से गंगा की लहरों के बीच सघन सर्च ऑपरेशन (खोज अभियान) चलाया जा रहा है। गोताखोरों की टीम त्रिवेणी घाट से लेकर नीचे बैराज तक के इलाके में आयुष की तलाश कर रही है। हालांकि, पहाड़ों में हो रही हल्की बारिश के कारण नदी का जलस्तर और बहाव दोनों ही चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, जिससे रेस्क्यू टीम को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​ऋषिकेश पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देहरादून में आयुष के परिजनों को इस अनहोनी की सूचना दी। बेटे के गंगा में बहने की खबर सुनते ही माता-पिता और सगे-संबंधी बदहवास हालत में ऋषिकेश त्रिवेणी घाट पहुंचे। घाट पर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे भगवान से अपने लाडले की सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।

​प्रशासन की सख्त चेतावनी: खतरे को गंभीरता से लें पर्यटक

​इस दुखद घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, जल पुलिस और एसडीआरएफ ने ऋषिकेश आने वाले सभी श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और विशेषकर युवा पर्यटकों के लिए एक सख्त चेतावनी और एडवाइजरी जारी की है।

​प्रशासन ने अपील की है कि:
• ​प्रतिबंधित क्षेत्रों से दूर रहें: गंगा नदी के जिन तटों और घाटों को संवेदनशील या स्नान के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया है, वहां भूलकर भी न जाएं।
• ​चेतावनी बोर्ड का पालन करें: घाटों पर प्रशासन द्वारा लगाए गए सुरक्षा और चेतावनी बोर्डों पर लिखे निर्देशों को गंभीरता से पढ़ें और उनका पालन करें।
• ​सुरक्षित स्थानों पर ही नहाएं: केवल उन्हीं घाटों पर स्नान करें जहां सुरक्षा जंजीरें (Safety Chains) लगी हों और पानी का बहाव नियंत्रित हो। जंजीर छोड़कर आगे गहरे पानी में जाने का दुस्साहस कतई न करें।
• ​सुरक्षा बलों से करें संपर्क: किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति या सुरक्षा संबंधी सहायता के लिए घाटों पर तैनात जल पुलिस या एसडीआरएफ के जवानों से तुरंत संपर्क करें।
​ऋषिकेश पुलिस का कहना है कि जरा सी लापरवाही हंसते-खेलते परिवारों को जीवन भर का गम दे जाती है, इसलिए नदी की लहरों को हल्के में न लें और सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखें।

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