देहरादून की सड़कों पर चलने वाले विक्रम अब नए नियमों के दायरे में आ गए हैं। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश पर क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTA) ने यह साफ कर दिया है कि अब किसी भी विक्रम में चालक के अलावा केवल छह यात्री ही बैठ सकेंगे। यानी चालक के बगल वाली सीट पर सवारी नहीं बैठ पाएगी। नियम तोड़ने पर चालक और मालिक दोनों पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
10 सितंबर तक की मोहलत
आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक विक्रम मालिकों को 10 सितंबर तक का समय दिया गया है। इस अवधि में आगे की सीट हटाकर चालक का केबिन बंद करना अनिवार्य होगा। इसके बाद नियमों का पालन न करने वाले वाहनों का फिटनेस नवीनीकरण और टैक्स संबंधी कामकाज रोक दिया जाएगा और उन्हें सड़क पर चलने की अनुमति भी नहीं मिलेगी।
कैसा होगा चालक का केबिन
नए नियमों के अनुसार चालक का केबिन लोहे या फाइबर की चादर से पूरी तरह ढका होना चाहिए। चाहें तो लोहे की रॉड भी लगाई जा सकती है। इसके बाद ही परमिट शर्तों के तहत विक्रम को सड़क पर चलाने की अनुमति मिलेगी। पीछे की दोनों सीटों पर केवल छह यात्रियों को ही बैठाया जा सकेगा। अभी अधिकांश विक्रम चालक आठ यात्री पीछे और दो आगे बैठा लेते हैं, जिससे अक्सर ओवरलोडिंग और दुर्घटनाएं होती हैं।
अदालत का आदेश स्पष्ट
हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि सभी विक्रम “सिक्स प्लस वन” श्रेणी में ही चलेंगे। यानी एक चालक और छह यात्री। आदेश की अनदेखी करने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना और परमिट शर्तों का उल्लंघन मानकर कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी हटाई गई थी सीट
साल 2019 में भी विक्रमों से आगे की सीटें हटाई गई थीं और चालक का केबिन लोहे की रॉड से बंद कराया गया था। लेकिन कुछ समय बाद चालकों ने फिर से सवारी बैठाना शुरू कर दिया था।
2021 का विवाद और ताजा फैसला
साल 2021 में परिवहन मुख्यालय ने विक्रमों को “सेवन प्लस वन” श्रेणी में मानने का आदेश जारी किया था, जिसे सिटी बस यूनियन ने अदालत में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने वह आदेश निरस्त कर दिया और अब सभी विक्रमों को “सिक्स प्लस वन” श्रेणी में ही चलाने का निर्णय दिया है।
कितने विक्रम होंगे प्रभावित
वर्तमान में शहर में करीब 784 विक्रम पंजीकृत हैं। इनमें से कुछ पहले 7+1 और कुछ 6+1 श्रेणी में चलते थे। लेकिन अब सभी को एक समान सिक्स प्लस वन में ही चलाना अनिवार्य होगा।
नए नियम लागू होने के बाद उम्मीद है कि देहरादून की सड़कों पर ओवरलोडिंग कम होगी। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार चालक और मालिक सख्ती से नियमों का पालन करेंगे या फिर पहले की तरह आदेशों को
नजरअंदाज कर देंगे।