‘आपने अदालत को गुमराह किया’: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना पर लगाया 10 लाख रुपये का जुर्माना, कहा- ‘सोचकर चिंता होती है कि आप कैसे यूथ आइकन हैं
मुख्य बिंदु:
• सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने और गुमराह करने के लिए समय रैना पर कड़ी कार्रवाई की।
• अदालत ने दो हफ्ते के भीतर 10 लाख रुपये की जुर्माना राशि जमा करने का आदेश दिया।
• यह मामला ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) शो में दिव्यांगों और SMA मरीजों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़ा है।
• प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समय रैना ने कोर्ट को “घुमा रखा है।”
नई दिल्ली:
देश की शीर्ष अदालत ने मशहूर स्टैंड-अप कॉमेडियन और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर समय रैना को अदालत को गुमराह करने और उसके आदेशों की अवहेलना करने का दोषी पाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए समय रैना पर 10 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जुर्माने की राशि जमा नहीं की गई, तो उनके खिलाफ दंडात्मक कानूनी कार्रवाई (Coercive Action) शुरू की जाएगी।
यह मामला समय रैना के बेहद लोकप्रिय यूट्यूब शो ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ (India’s Got Latent) के पहले सीजन के दौरान दिव्यांगों और गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों पर की गई विवादित टिप्पणियों से जुड़ा हुआ है।
”आपने कोर्ट को घुमा रखा है”: सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस जेवी मोहाना की पीठ ने समय रैना के रवैये पर भारी नाराजगी जताई। कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कॉमेडियन ने अदालत को पूरी तरह से गुमराह किया है और कोर्ट की गरिमा का मजाक उड़ाया है।
बेंच ने कहा, “समय रैना ने अदालत के निर्देशों का पालन नहीं किया। उन्होंने पीठ के सामने जो आश्वासन दिए थे, उनका जमीनी आचरण उन वादों से बिल्कुल अलग है। उन्होंने अदालत को घुमा रखा है।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने रैना के ‘यूथ आइकन’ होने पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा, “समय रैना किस तरह के यूथ आइकन (युवाओं के आदर्श) हैं, यह सोचकर भी चिंता होती है।”
क्या है पूरा विवाद और मामला?
इस पूरे विवाद की शुरुआत साल 2025 में यूट्यूब पर प्रसारित हुए ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ के दो एपिसोड्स से हुई थी। इन एपिसोड्स में समय रैना और अन्य कॉमेडियन्स ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित मरीजों और एक नवजात शिशु के इलाज को लेकर मज़ाक उड़ाया था। इसके अलावा शो के दौरान दृष्टिबाधित (blind) और भेंगेपन (cross-eyed) से ग्रस्त लोगों पर भी आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं।
इस कंटेंट के सामने आने के बाद ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन’ (Cure SMA Foundation) सहित अन्य कंटेंट क्रिएटर्स जैसे रणवीर अल्लाहबादिया और आशीष चंचलानी ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद यह मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचा। कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए पहले भी कॉमेडियन्स को समन जारी किए थे और अपने प्लेटफॉर्म्स पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के निर्देश दिए थे।
आश्वासन देकर मुकर गए समय रैना: फाउंडेशन की दलील
सुनवाई के दौरान ‘क्योर एसएमए फाउंडेशन’ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि 28 वर्षीय कॉमेडियन ने पहले कोर्ट में यह भरोसा दिया था कि वे बीमारी से पीड़ित लोगों और फाउंडेशन से संपर्क करेंगे। लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
एडवोकेट अपराजिता सिंह ने अदालत के समक्ष कहा:
”समय रैना लगातार अपने शोज़ कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कोर्ट के आदेश के मुताबिक न तो एसएमए फाउंडेशन से संपर्क किया और न ही इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों की सुध ली। मुझे नहीं पता कि वह किस तरह के यूथ आइकन हैं, यह सोचकर भी मुझे डर लगता है।”
इस दलील को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय रैना को आदेश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर 10 लाख रुपये की राशि जमा करें।
अक्टूबर 2025 में जारी किया था संयुक्त माफीनामा
इससे पहले, विवाद के तूल पकड़ने के बाद अक्टूबर 2025 में समय रैना और शो से जुड़े अन्य चार कॉमेडियन्स ने एक संयुक्त बयान जारी कर खेद व्यक्त किया था। इस बयान में समय रैना, विपुल गोयल, सोनाली ठक्कर, निशांत तंवर और बलराज घई के हस्ताक्षर थे।
बयान में कहा गया था:
”हम हमारे शो के कारण पहुंची ठेस और दर्द के लिए गहरा खेद व्यक्त करते हैं। भविष्य में हम अधिक सतर्क रहेंगे और इस समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की पूरी कोशिश करेंगे।”
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि केवल कागजी माफी या बयान जारी करना काफी नहीं है, बल्कि अदालत के समक्ष किए गए वादों को असल जिंदगी में लागू करना जरूरी है, जिसमें समय रैना पूरी तरह विफल रहे।
दिव्यांगों के संरक्षण के लिए बन सकता है सख्त कानून
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक बड़ा संकेत भी दिया है। सुनवाई के दौरान उन्होंने सॉलिसिटर जनरल से चर्चा करते हुए कहा कि देश में दिव्यांग व्यक्तियों को मानसिक ठेस और अपमान से बचाने के लिए एससी/एसटी (SC/ST) एक्ट की तर्ज पर एक सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है, ताकि दिव्यांगों को निशाना बनाकर किए जाने वाले भद्दे चुटकुलों को एक दंडनीय अपराध बनाया जा सके।
सॉलिसिटर जनरल ने भी इस बात पर सहमति जताई कि किसी भी व्यक्ति की गरिमा की कीमत पर ‘ह्यूमर’ या मनोरंजन को स्वीकार नहीं किया जा सकता।







