बॉलीवुड की आइकॉनिक फिल्मों में शुमार मैं हूं ना को लेकर एक दिलचस्प किस्सा एक बार फिर चर्चा में है। इस फिल्म में चांदनी चोपड़ा के किरदार को निभाने वाली सुष्मिता सेन को आज भी दर्शक याद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रोल शुरुआत में उनके लिए नहीं लिखा गया था? हाल ही में फिल्म की निर्देशक फराह खान ने बताया कि चांदनी के लिए उनकी पहली पसंद कोई और थीं।
फराह खान के मुताबिक, फिल्म की प्लानिंग के शुरुआती दौर में इस किरदार के लिए समीरा रेड्डी को चुना गया था। फराह ने बताया कि उन्होंने समीरा को एक म्यूजिक वीडियो में देखा था और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस से वह काफी प्रभावित हुई थीं। उन्हें लगा था कि पारंपरिक भारतीय परिधानों में समीरा का लुक और उनकी पर्सनैलिटी चांदनी चोपड़ा के कैरेक्टर से पूरी तरह मेल खाती है।
चांदनी का किरदार एक खूबसूरत, सॉफ्ट और एलिगेंट कॉलेज प्रोफेसर का है, जो फिल्म में रोमांस का अहम हिस्सा बनती है। फराह का मानना था कि समीरा रेड्डी के चेहरे के एक्सप्रेशन और उनका शांत अंदाज इस रोल को नेचुरल तरीके से उभार सकता है। लेकिन जैसे-जैसे फिल्म प्रोडक्शन के करीब पहुंची, कास्टिंग से जुड़ी परिस्थितियां बदलने लगीं।
दरअसल, उसी समय समीरा रेड्डी ने एक दूसरी फिल्म के लिए कमिटमेंट कर ली थी। शूटिंग शेड्यूल के ओवरलैप होने की वजह से वह ‘मैं हूं ना’ को समय नहीं दे पा रही थीं। फराह खान ने बताया कि फिल्म की टाइमलाइन काफी टाइट थी और ऐसे में टीम के पास इंतजार करने का विकल्प नहीं था। मजबूरी में मेकर्स को दूसरे ऑप्शन्स पर विचार करना पड़ा।
यहीं से सुष्मिता सेन की एंट्री हुई। जब उन्हें चांदनी चोपड़ा का रोल ऑफर किया गया, तो उन्होंने इसे पूरे आत्मविश्वास के साथ स्वीकार किया। फिल्म रिलीज होने के बाद सुष्मिता का यह किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया। साड़ी में उनका ग्रेसफुल लुक, दमदार डायलॉग डिलीवरी और शाहरुख खान के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री ने फिल्म को और यादगार बना दिया।
2004 में रिलीज हुई ‘मैं हूं ना’ फराह खान की बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी और यह बॉक्स ऑफिस पर भी बड़ी हिट साबित हुई। फिल्म के गाने, स्टाइल और किरदार आज भी 2000 के दशक की याद दिलाते हैं। फराह के इस खुलासे से यह साफ होता है कि फिल्म इंडस्ट्री में कास्टिंग के फैसले सिर्फ टैलेंट नहीं, बल्कि टाइमिंग और अवेलेबिलिटी पर भी निर्भर करते हैं। कई बार मेकर्स की पहली पसंद बदल जाती है, लेकिन नतीजा फिर भी यादगार बन जाता है—जैसा कि चांदनी चोपड़ा के किरदार के साथ हुआ।
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