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अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद उत्तराखंड सरकार ने राजस्व पुलिस (पटवारी) व्यवस्था को खत्म करने का फैसला लिया था। यह वह व्यवस्था है जिसमें गांवों में पुलिस का काम राजस्व विभाग के अधिकारी (पटवारी) देखते हैं। सरकार ने वादा किया था कि इसे छह महीने में खत्म कर दिया जाएगा, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ।

 

इस मामले में देरी को लेकर आयोग ने सरकार से जवाब मांगा है। दरअसल, अंकिता हत्याकांड में राजस्व पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। जब उसके परिवार ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करानी चाही, तो स्थानीय पटवारी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। बाद में इस लापरवाही के चलते उसे निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया।

 

इस घटना के बाद लोगों ने मांग की कि गांवों में भी रेगुलर पुलिस तैनात की जाए, क्योंकि पटवारी व्यवस्था अपराधों को रोकने में नाकाम साबित हो रही है। सरकार ने भी इसे खत्म करने का ऐलान किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

 

ब्रिटिश जमाने से चली आ रही इस व्यवस्था पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस घटना ने इसकी खामियों को और उजागर कर दिया। अब सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह जल्द से जल्द इस पर फैसला

ले।

 

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