उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल ने पेराई सत्र 2025-26 को सुचारु और सफल बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा वित्तीय निर्णय लिया है। कैबिनेट ने प्रदेश की चीनी मिलों को 270 करोड़ रुपये की शासकीय प्रतिभूति (स्टेट गारंटी) प्रदान करने को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से चीनी मिलों को बैंकों से ऋण प्राप्त करने में आसानी होगी और उनकी वित्तीय चुनौतियां काफी हद तक कम होंगी।
स्टेट गारंटी का मतलब यह है कि राज्य सरकार बैंकों को यह आश्वासन देगी कि यदि किसी कारणवश चीनी मिल ऋण चुकाने में असमर्थ रहती है, तो उसकी भरपाई राज्य सरकार स्वयं करेगी। सरकार की इस गारंटी से बैंकों का जोखिम घटेगा, जिससे वे चीनी मिलों को बिना किसी हिचक के कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराएंगे।
इस फैसले का सीधा लाभ यह होगा कि चीनी मिलों को गन्ना खरीद, श्रमिकों की मजदूरी, बिजली और ईंधन खर्च, मशीनों के रखरखाव तथा अन्य जरूरी परिचालन खर्चों के लिए समय पर धन मिल सकेगा। इससे पेराई सत्र बिना किसी रुकावट के चल पाएगा और उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
पर्याप्त ऋण सुविधा मिलने से चीनी मिलों की नकदी स्थिति मजबूत होगी, जिसका सबसे बड़ा फायदा गन्ना किसानों को मिलेगा। किसानों को उनके गन्ने का भुगतान समय पर हो सकेगा और भुगतान में देरी की समस्या काफी हद तक समाप्त होगी। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और वे लगातार गन्ना आपूर्ति के लिए प्रोत्साहित होंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि यह निर्णय केवल चीनी मिलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। गन्ना आधारित उद्योगों को मजबूती मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
गन्ना सचिव रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि सरकार की इस पहल से चीनी मिलें आसानी से बैंक ऋण लेकर अपने संचालन को बेहतर ढंग से चला सकेंगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला प्रदेश के चीनी उद्योग को मजबूती देने के साथ-साथ किसान, मिल और बैंक के बीच भरोसे की कड़ी को और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, 270 करोड़ रुपये की स्टेट गारंटी को पेराई सत्र 2025-26 को सफल बनाने की दिशा में एक निर्णायक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है, जिससे उत्तराखंड का चीनी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ मिलेगा।
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