​देहरादून:

​पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) पर बढ़ते दबाव के बीच उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कमर कस ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन संरक्षण और अनुशासन की अपील के बाद, उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने ऊर्जा और ईंधन बचत के लिए इतने व्यापक स्तर पर कड़े कदम उठाए हैं।

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में ‘ईंधन अनुशासन’ (Fuel Discipline) को लेकर आठ ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। सरकार का लक्ष्य न केवल सरकारी खर्च कम करना है, बल्कि आम जनता को भी ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।

​सादगी की शुरुआत खुद से: आधी होगी मंत्रियों की फ्लीट

​धामी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासन की शुरुआत सत्ता के गलियारों से होगी। कैबिनेट ने निर्णय लिया है कि मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों के काफिले (फ्लीट) में वाहनों की संख्या अब आधी कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसकी शुरुआत स्वयं अपने काफिले से की है। अब उनके साथ चलने वाले सुरक्षा और प्रशासनिक वाहनों की संख्या को घटाकर मात्र पांच कर दिया गया है। यह कदम न केवल ईंधन बचाएगा बल्कि सड़कों पर आम जनता को लगने वाले जाम से भी राहत दिलाएगा।

​सरकारी कार्यप्रणाली में ‘डिजिटल’ बदलाव

​ईंधन बचाने के लिए भौतिक आवाजाही को कम करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए दो महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं:

• ​वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: अब सरकारी विभागों की बैठकों के लिए अधिकारियों को एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी। बैठकों को अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आधारित बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
• ​वर्क फ्रॉम होम (WFH): सरकार ने सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ की संस्कृति को पुनर्जीवित करने और प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होगा और ईंधन की भारी बचत होगी।

​इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर 50% अनिवार्य कोटा

​उत्तराखंड की नई ईवी नीति को और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। सरकार ने तय किया है कि भविष्य में होने वाली नई सरकारी गाड़ियों की खरीद में 50 प्रतिशत वाहन अनिवार्य रूप से ‘इलेक्ट्रिक’ होंगे। इसके साथ ही, पूरे राज्य में चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क बिछाने के लिए युद्ध स्तर पर काम शुरू किया जाएगा ताकि निजी उपयोगकर्ताओं को भी ईवी अपनाने में आसानी हो।

​आम जनता के लिए ‘नो व्हीकल-डे’ का आह्वान

​सरकार ने जनता से अपील की है कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन ‘वाहन रहित दिवस’ (No Vehicle Day) के रूप में मनाएं। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। परिवहन विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे सरकारी बसों की संख्या, उनकी फ्रीक्वेंसी और क्षमता में तत्काल सुधार करें ताकि लोगों को निजी वाहनों की जरूरत न पड़े।

​एसी (AC) के उपयोग और बहु-विभागीय अधिकारियों पर लगाम

​ऊर्जा बचत की इस मुहिम में केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि बिजली भी शामिल है। सरकारी और निजी इमारतों में एयर कंडीशनर (AC) के तापमान और उपयोग के समय को सीमित करने के लिए गाइडलाइंस जारी की जाएंगी। साथ ही, उन अधिकारियों के लिए नियम सख्त किए गए हैं जो एक से अधिक विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे अधिकारी अब एक दिन में केवल एक ही सरकारी वाहन का उपयोग कर सकेंगे, भले ही वे अलग-अलग विभागों के काम से बाहर जाएं।

​निष्कर्ष: ‘देवभूमि’ से ‘ऊर्जा भूमि’ की ओर

​धामी सरकार के ये आठ फैसले केवल प्रशासनिक आदेश नहीं हैं, बल्कि एक दूरदर्शी सोच का परिणाम हैं। पश्चिम एशिया के अस्थिर हालातों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आने वाले संभावित उछाल से राज्य की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह ‘फ्यूल डिसिप्लिन’ मील का पत्थर साबित होगा। यदि इन नियमों का कड़ाई से पालन हुआ, तो उत्तराखंड न केवल पर्यावरण संरक्षण में मिसाल पेश करेगा, बल्कि सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ को भी कम कर सकेगा।

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