देहरादून/पांवटा साहिब:
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर इन दिनों भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। चमोली जिले के कर्णप्रयाग में बीते दिनों हुए एक पार्किंग विवाद की चिंगारी अब दोनों राज्यों के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच गई है। पंजाब से आए करीब 200 निहंग सिखों के जत्थे ने उत्तराखंड में प्रवेश करने को लेकर हिमाचल-उत्तराखंड की पांवटा साहिब-कुल्हाल सीमा पर जमकर हंगामा किया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए देहरादून पुलिस और जिला प्रशासन ने एहतियातन सीमा को पूरी तरह सील कर दिया है।
इस बीच, दोनों राज्यों के पुलिस-प्रशासन और निहंगों के प्रतिनिधियों के बीच हुई कई दौर की वार्ता बेनतीजा रही है। निहंगों ने उत्तराखंड सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे बैरियर तोड़कर उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश कर जाएंगे।
क्या है पूरा विवाद? (क्रोनोलॉजी)
विवाद की शुरुआत गत 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई थी। सिखों के पवित्र तीर्थस्थल हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे चार निहंग सिखों का स्थानीय होटल संचालक और व्यापारियों के साथ पार्किंग को लेकर मामूली विवाद हो गया। देखते ही देखते इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि निहंगों ने अपने पारंपरिक हथियारों से स्थानीय लोगों पर हमला कर दिया, जिसमें चार स्थानीय नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कानून हाथ में लेने के आरोप में चारों निहंगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। वर्तमान में इनमें से तीन निहंग चमोली जिला कारागार में न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि एक घायल निहंग का पुलिस अभिरक्षा के तहत ऋषिकेश एम्स (AIIMS) में इलाज चल रहा है।
पंजाब से उत्तराखंड कूच और हाई-वोल्टेज ड्रामा
कर्णप्रयाग में निहंगों की गिरफ्तारी और उन पर दर्ज मुकदमों के विरोध में पंजाब के निहंगों में भारी नाराजगी फैल गई। उन्होंने इसके विरोध में ‘उत्तराखंड कूच’ का सामूहिक ऐलान किया। गुरुवार को करीब 200 निहंगों का जत्था गाड़ियों और घोड़ों के साथ हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब पहुंच गया।
गुरुवार पूरा दिन कुल्हाल सीमा पर प्रदर्शन करने के बाद, देर रात निहंगों ने चालाकी से पुलिस को चकमा दिया और देहरादून की सीमा में प्रवेश कर गए। इस घटना से देहरादून पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। रातभर शहर के विभिन्न चौकों और रूटों पर नाकेबंदी कर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। आखिरकार, देर रात करीब ढाई बजे पुलिस टीमों ने सूझबूझ से काम लेते हुए सभी निहंगों को वापस पांवटा साहिब सीमा की तरफ खदेड़ दिया।
सीमाएं सील, आला अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
शुक्रवार सुबह निहंग सिख एक बार फिर संगठित होकर देहरादून में प्रवेश करने की जिद पर अड़ गए। कानून-व्यवस्था बिगड़ने के खतरे को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने पांवटा साहिब-कुल्हाल सीमा को पूरी तरह से ब्लॉक और सील कर दिया। सीमा पर भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और दंगा नियंत्रण वाहनों को तैनात किया गया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के जिलाधिकारी (DM) डॉ. आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमेन्द्र डोबाल खुद कुल्हाल सीमा पर पहुंचे। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से मुआयना किया और मौके पर तैनात पुलिस कप्तानों व जवानों को सख्त निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था से किसी भी कीमत पर कोई समझौता न किया जाए।
तीन घंटे की महावार्ता रही बेनतीजा
तनाव को कम करने के लिए शुक्रवार देर शाम पांवटा साहिब गुरुद्वारे में एक हाई-लेवल मीटिंग बुलाई गई। करीब तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में देहरादून के डीएम डॉ. आशीष चौहान, एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल और हिमाचल प्रदेश के पांवटा प्रशासन के अधिकारियों के साथ निहंगों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने हिस्सा लिया।
वार्ता के दौरान निहंगों की ओर से मुख्य रूप से चार मांगें रखी गईं:
1. कर्णप्रयाग में गिरफ्तार किए गए चारों निहंगों को तत्काल और बिना शर्त रिहा किया जाए।
2. ऋषिकेश एम्स में भर्ती घायल निहंग सिख का सरकारी खर्चे पर उच्च स्तरीय इलाज सुनिश्चित हो।
3. निहंगों पर मुकदमा दर्ज करने वाले और कथित तौर पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
4. स्थानीय स्तर पर निहंगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाए।
इन मांगों पर देहरादून प्रशासन ने कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देते हुए विचार करने के लिए दो दिन (48 घंटे) का समय मांगा है।
48 घंटे का अल्टीमेटम और आगे की रणनीति
प्रशासन द्वारा समय मांगे जाने पर निहंगों ने अल्टीमेटम जारी कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे रविवार शाम तक पांवटा साहिब गुरुद्वारे में ही डेरा डाले रखेंगे। यदि रविवार शाम तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे उत्तराखंड की सीमा पर लगे बैरिकेड्स को तोड़कर जबरन देहरादून और कर्णप्रयाग की तरफ कूच करेंगे।
हालांकि, गतिरोध को थोड़ा कम करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने बीच का रास्ता निकालते हुए निहंगों के पांच प्रतिनिधियों को कर्णप्रयाग जाने की विशेष अनुमति दे दी है। यह पांच सदस्यीय दल चमोली जेल में बंद अपने साथियों से मुलाकात करेगा और ऋषिकेश एम्स में घायल निहंग का हालचाल भी जानेगा।
अफवाहों से बचें, स्थिति नियंत्रण में: प्रशासन
इस पूरे घटनाक्रम पर देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने अपने आधिकारिक बयान में कहा:
”जनपद में शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर पैनी नजर रखी जा रही है। हिमाचल और अन्य संभावित प्रवेश मार्गों पर प्रभावी नाकेबंदी लागू है। यदि कोई भी अराजक तत्व कानून को अपने हाथ में लेने या शांति भंग करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आम जनता से अनुरोध है कि सोशल मीडिया पर चल रही किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।”
फिलहाल सीमा पर स्थिति तनावपूर्ण लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में बनी हुई है। खुफिया एजेंसियां और दोनों राज्यों का पुलिस प्रशासन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में हैं ताकि रविवार को अल्टीमेटम की अवधि समाप्त होने से पहले मामले का कोई शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

