देहरादून / रानीपोखरी:
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से सटे रानीपोखरी इलाके में सोमवार की देर रात एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। देहरादून एयरपोर्ट (जॉलीग्रांट) के स्टेट गेस्ट हाउस की सुरक्षा में तैनात पुलिस के एक हेड कांस्टेबल की उनके सरकारी आवास पर संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई।
शुरुआती जांच और मौके के हालात को देखकर हर कोई हैरान है, क्योंकि हेड कांस्टेबल के शरीर पर एक-दो नहीं, बल्कि उनकी सरकारी कार्बाइन से लगातार 11 गोलियां लगने की बात सामने आ रही है। इस खौफनाक हादसे के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की गहन तफ्तीश शुरू कर दी है।
रात के सन्नाटे में गूंजी ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज
यह दर्दनाक और रहस्यमयी घटना सोमवार रात करीब 10:30 बजे की है। मृतक की पहचान 49 वर्षीय हेड कांस्टेबल सुनील के रूप में हुई है, जो मूल रूप से पुलिस विभाग में कार्यरत थे और वर्तमान में देहरादून एयरपोर्ट स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में गार्ड ड्यूटी पर तैनात थे। सुनील वर्तमान में रानीपोखरी के नागाघेर इलाके में अपने परिवार के साथ रह रहे थे।
परिजनों और चश्मदीदों के अनुसार, सोमवार की रात को सुनील अपने घर के बरामदे में मौजूद थे। इसी दौरान अचानक रात के सन्नाटे को चीरती हुई ताबड़तोड़ गोलियों की आवाज गूंज उठी। जब तक परिवार के लोग और आसपास के पड़ोसी कुछ समझ पाते और बरामदे की तरफ दौड़ते, तब तक हेड कांस्टेबल सुनील खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर चुके थे। उनकी सरकारी सर्विस कार्बाइन उनके पास ही पड़ी हुई थी।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें
घर के बरामदे में सुनील को लहूलुहान और अचेत अवस्था में देखकर परिजनों के होश उड़ गए। चीख-पुकार के बीच आनन-फानन में स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें तुरंत नजदीकी जॉलीग्रांट स्थित हिमालयन हॉस्पिटल ले जाया गया। हालांकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अस्पताल के डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद हेड कांस्टेबल सुनील को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, अत्यधिक गोलियां लगने और शरीर से बहुत ज्यादा खून बह जाने के कारण अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मौत हो चुकी थी। पुलिस विभाग ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमॉर्टम (PM) के लिए भेज दिया है।
कार्बाइन से 11 गोलियां चलना बना सबसे बड़ा रहस्य
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला और संदिग्ध पहलू यह है कि हेड कांस्टेबल सुनील के शरीर पर एक या दो नहीं, बल्कि कुल 11 गोलियां लगी हैं। रानीपोखरी के थाना प्रभारी (थानाध्यक्ष) राजेंद्र खोलिया ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि हेड कांस्टेबल को उनकी खुद की ही सरकारी कार्बाइन से 11 गोलियां लगी हैं।
पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि एक के बाद एक 11 गोलियां एक साथ कैसे चल गईं? आमतौर पर किसी हादसे या मिसफायर की स्थिति में एक या दो राउंड फायर होते हैं, लेकिन पूरी मैगजीन खाली हो जाना या लगातार 11 राउंड फायर होना कई गंभीर संदेह पैदा करता है।
क्या यह कार्बाइन का कोई तकनीकी फॉल्ट (बर्स्ट मोड पर होना) था, क्या यह कोई सोची-समझी खुदकुशी थी, या फिर इसके पीछे कोई और गहरी साजिश है? पुलिस इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर हर एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है।
उच्च अधिकारियों ने संभाला मोर्चा, गहन जांच शुरू
हादसे की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया है। एसपी देहात (SP Rural) वन जया बलोनी ने मीडिया को बताया कि मामले की बेहद बारीकी से जांच की जा रही है। घटना के वक्त घर में कौन-कौन मौजूद था, हेड कांस्टेबल सुनील का पिछले कुछ दिनों में कैसा व्यवहार था और क्या वे किसी तरह के मानसिक तनाव से गुजर रहे थे, इन सभी बातों का पता लगाया जा रहा है।
इसके साथ ही, बैलिस्टिक और फोरेंसिक टीमों को भी जांच में शामिल किया गया है। फोरेंसिक टीम ने घटना स्थल (बरामदे) से खून के नमूने, खाली कारतूस के खोखे और मृतक की कार्बाइन को अपने कब्जे में ले लिया है। हथियार की तकनीकी जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या ट्रिगर दबने के बाद हथियार में कोई तकनीकी खराबी आई थी जिसके कारण लगातार गोलियां चलीं।
विभाग और परिवार में शोक की लहर
इस असमय और दर्दनाक हादसे के बाद हेड कांस्टेबल सुनील के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात पर यकीन नहीं कर पा रहे हैं कि ड्यूटी से घर लौटने के बाद सुनील के साथ ऐसा खौफनाक हादसा हो जाएगा। वहीं, देहरादून पुलिस महकमे ने भी अपने एक अनुशासित और कर्तव्यनिष्ठ साथी को खो दिया है, जिससे पुलिस विभाग में शोक की लहर है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुनील स्वभाव से बेहद मिलनसार व्यक्ति थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और फोरेंसिक जांच पूरी होने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले के पीछे के सच को तलाशने में दिन-रात जुटी हुई है।

