उत्तराखंड में मानसून का कहर: उफनते नालों में जान दांव पर लगाने को मजबूर ग्रामीण, रुद्रप्रयाग में स्कूल बं
देहरादून/उत्तरकाशी:
उत्तराखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही आपदा और दुश्वारियों का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश के कारण नदियां-नाले उफान पर हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
उत्तरकाशी के सीमांत मोरी विकासखंड में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जहां ग्रामीण और वाहन चालक उफनते खड्डों को पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। वहीं, रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है।
मोरी के पांच गांवों पर संपर्क कटने का मंडराया खतरा
उत्तरकाशी जनपद के मोरी विकासखंड अंतर्गत बड़ासु पट्टी के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में मानसून की शुरुआत ने ही तबाही का मंजर दिखाना शुरू कर दिया है।
सांकरी–गंगाड़–ओसला मोटर मार्ग पर स्थित हलारा और पूर्ति खड्ड (बरसाती नाले) इस समय उफान पर हैं। भारी बारिश के चलते इन दोनों खड्डों में जलस्तर अत्यधिक बढ़ गया है और सड़क पर पानी का तेज बहाव बह रहा है।
इस विकट स्थिति के कारण पवाणी, ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और तालुका समेत पांच प्रमुख गांवों का संपर्क मोरी विकासखंड मुख्यालय और जिला मुख्यालय से पूरी तरह कटने की कगार पर पहुंच गया है। यदि आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो ये गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ जाएंगे।
पुल न होने से हर साल पैदा होते हैं हालात, जान हथेली पर रख रहे लोग
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हलारा और पूर्ति खड्ड पर स्थायी पुल न होना इस क्षेत्र की सबसे बड़ी त्रासदी बन चुका है। हर साल मानसून में यहां यही खौफनाक नजारा देखने को मिलता है। इस बार भी पहली ही बारिश में दोनों नाले रौद्र रूप अख्तियार कर चुके हैं।
पानी का बहाव इतना तेज है कि दोपहिया वाहनों को पार कराने के लिए 5 से 10 लोगों को मिलकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं, चारपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों के बहने का खतरा हर पल बना रहता है। स्थानीय निवासी नौनियाल राणा, जनक रावत, जयचंद राणा और वरदान सिंह ने रोष व्यक्त करते हुए कहा:
”बरसात शुरू होते ही हमारा संपर्क देश-दुनिया से कट जाता है। हलारा और पूर्ति खड्ड वर्षों से हमारे लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं। हर साल हम प्रशासन से पुल निर्माण और सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की मांग करते हैं, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। इसका खामियाजा हजारों की आबादी को भुगतना पड़ रहा है।”
किसानों की आजीविका पर संकट, मरीजों और बच्चों की बढ़ी मुश्किलें
यह संकट ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में नगदी फसलों का सीजन चल रहा है। स्थानीय किसान इस समय सेब, राजमा और चौलाई जैसी मुख्य फसलों को बाजार तक पहुंचाने की तैयारियों में जुटे हैं। ग्रामीणों को डर है कि यदि सड़क मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा, तो उनकी मेहनत की फसल खेतों और गोदामों में ही सड़ जाएगी, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
इसके अलावा, मार्ग बंद होने से:
• आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं: गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक पहुंचाना लगभग असंभव हो जाएगा।
• स्कूली बच्चे: जान जोखिम में डालकर उफनते नाले पार करने को मजबूर हैं, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है।
• रसद आपूर्ति: आवश्यक वस्तुओं और खाद्यान्न की किल्लत होने की आशंका बढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अधिकारियों को कई बार ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल खोखले आश्वासन ही हाथ लगे। प्रशासन हर साल केवल अस्थायी इंतजाम कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
जिलाधिकारी का रुख: पीएमजीएसवाई को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मोरी क्षेत्र की स्थिति का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया:
”मोरी क्षेत्र में खड्डों के उफान पर होने की जानकारी मिलते ही पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को मौके पर जाकर आवश्यक कदम उठाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। मानसून के दौरान जनता की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अधिकारियों को सड़क मार्ग पर आवाजाही सुचारू रखने और आपदा मद से तुरंत वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्थाएं तैयार करने को कहा गया है। प्रशासन पूरी स्थिति पर पैनी नजर रख रहा है।”
रुद्रप्रयाग में मूसलधार बारिश: स्कूल बंद, नदियों के किनारे जाने पर रोक
दूसरी ओर, रुद्रप्रयाग जनपद में भी भारी बारिश ने तांडव मचाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही मूसलधार बारिश के कारण अलकनंदा और मंदाकिनी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर चेतावनी के स्तर के करीब पहुंच रहा है।
सुरक्षा के लिहाज से एहतियाती कदम उठाते हुए रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने शुक्रवार को जनपद के सभी शासकीय और निजी विद्यालयों में एक दिवसीय अवकाश (स्कूल बंद) घोषित कर दिया है।
इसके साथ ही, प्रशासन ने एडवाइजरी जारी कर स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे नदियों, गदेरों (बरसाती नालों) और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के समीप बिल्कुल न जाएं और बेहद सतर्क रहें।
निष्कर्ष: स्थायी समाधान की दरकार
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मानसून की यह शुरुआत आने वाले दिनों के लिए बड़ी चेतावनी है। मोरी विकासखंड के ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक हलारा और पूर्ति खड्ड पर मजबूत और स्थायी पुलों का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक आपदा प्रबंधन के सारे दावे खोखले साबित होंगे।
शासन-प्रशासन को केवल आपदा के समय जागने के बजाय, इन संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी बुनियादी ढांचे का विकास करना होगा ताकि ग्रामीण अपनी जान दांव पर लगाने को मजबूर न हों।

