नई दिल्ली: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को चाक-चौबंद कर लिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे संकट को देखते हुए भारत सरकार ने तेल और रसोई गैस (LPG) की निर्बाध आपूर्ति के लिए रणनीतिक कदम उठाए हैं। देश के 33 करोड़ एलपीजी उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने आपूर्ति के पांच नए वैश्विक मार्ग खोज निकाले हैं।
मिडिल ईस्ट के संकट पर भारत का ‘मास्टरस्ट्रोक’
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 88% और रसोई गैस की 55% आपूर्ति आयात के जरिए पूरी करता है। पारंपरिक रूप से इसका बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों (सऊदी अरब, कतर, यूएई) से होर्मुज के रास्ते आता था। लेकिन युद्ध की स्थिति को देखते हुए, भारत ने अपनी निर्भरता को डायवर्सिफाई (विविध) कर दिया है। अब भारत अपनी जरूरतों का 70% हिस्सा उन रास्तों से मंगवा रहा है जो होर्मुज के विवादित क्षेत्र से बाहर हैं।
1. रूस: संकट का सबसे बड़ा साथी
इस ऊर्जा संकट के बीच रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षक बनकर उभरा है। मार्च के पहले 11 दिनों में ही रूस से तेल आयात 50% बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। हालांकि रियायती दरों में कमी आई है, लेकिन अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की विशेष छूट के बाद इंडियन ऑयल और रिलायंस जैसी दिग्गज कंपनियों ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल के सौदे सुरक्षित कर लिए हैं।
2. अमेरिका और उत्तरी ध्रुव की ओर रुख
घरेलू कमी को पूरा करने के लिए ‘गेल’ (GAIL) और अन्य रिफाइनरियों ने अमेरिका से एलएनजी (LNG) के बड़े सौदे किए हैं। इसके अलावा, भारत ने पहली बार कनाडा और नॉर्वे जैसे देशों से संपर्क साधा है, ताकि प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में आई 25% की कमी को तुरंत भरा जा सके।
3. लैटिन अमेरिका और अफ्रीका: नए रणनीतिक साझेदार
भारत ने पहली बार गुयाना से सीधे कच्चे तेल की खरीद शुरू की है। इंडियन ऑयल और एचपीसीएल (HPCL) ने वहां से 40 लाख बैरल तेल मंगवाया है। इसके साथ ही नाइजीरिया और अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से भी अतिरिक्त खेप मंगवाई जा रही है, जो पूरी तरह से सुरक्षित समुद्री रास्तों से भारत पहुंच रही है।
आंकड़ों में भारत की ऊर्जा शक्ति
विवरण आंकड़े
दैनिक तेल खपत 5.8 मिलियन बैरल
आयात पर निर्भरता 88%
होर्मुज से बाहर का नया रूट 70% (पहले 55%)
कुल LPG उपभोक्ता 33 करोड़
सरकार का एक्शन मोड: घर-घर पहुंचेगी गैस
आपूर्ति में किसी भी तरह के व्यवधान को रोकने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरियों को LPG उत्पादन अधिकतम करने के सख्त निर्देश दिए हैं। अल्जीरिया और ऑस्ट्रेलिया से खरीदे गए दो बड़े एलएनजी कार्गो पहले ही भारत के रास्ते में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है: “भारत अब केवल एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। हम दुनिया के 40 अलग-अलग देशों से तेल और गैस खरीद रहे हैं। यह रणनीतिक बदलाव भविष्य में किसी भी युद्ध जैसी स्थिति में देश की रसोई और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखेगा।”
इस कदम से न केवल गैस की किल्लत का डर खत्म हुआ है, बल्कि बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी। सरकार का यह ‘एक्शन मोड’ बताता है कि भारत अब वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर और तैयार है।

