उज्जैन: धर्म और आस्था की नगरी उज्जैन में शनिवार की भोर एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुरू हुई। देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर भगवान महाकाल की भव्य भस्म आरती में हिस्सा लिया। बाबा महाकाल के दरबार में शीश नवाने के बाद उन्होंने न केवल देश की प्रगति की कामना की, बल्कि समाज को वैचारिक संकीर्णता से ऊपर उठने का एक गहरा संदेश भी दिया।
अहंकार और नफरत के त्याग का आह्वान
भस्म आरती के दिव्य दर्शनों के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति काफी भावुक और गंभीर नजर आए। उन्होंने वर्तमान सामाजिक परिदृश्य को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही। धनखड़ ने कहा, “आज के समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अहंकार, नफरत, बदले की भावना और जलन जैसे विकारों से ऊपर उठें। जब हम इन नकारात्मकताओं को त्यागेंगे, तभी एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण संभव है।”
उन्होंने आगे कहा कि उनकी प्रार्थना केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संपूर्ण राष्ट्र के कल्याण के लिए है। उन्होंने भगवान महाकाल से प्रार्थना की कि भारत निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर रहे और हर नागरिक के जीवन में शांति और समृद्धि आए।
किसानों और जवानों के प्रति जताया सम्मान
एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले जगदीप धनखड़ ने अपनी जड़ों को याद करते हुए अन्नदाताओं और सीमाओं के प्रहरियों की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा:
“मैं एक किसान पुत्र हूँ और भली-भांति जानता हूँ कि देश की नींव में हमारे किसानों का पसीना और सैनिकों का रक्त है। इनका बलिदान और योगदान अतुलनीय है, जिसका कर्ज यह देश कभी नहीं उतार सकता।”
सार्वजनिक जीवन में धनखड़ की सक्रियता
गौरतलब है कि स्वास्थ्य कारणों से उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ लंबे समय तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे थे। हालांकि, हाल के महीनों में उनकी सक्रियता फिर से बढ़ी है।
गणतंत्र दिवस 2026: इस वर्ष की परेड में वे वीआईपी दीर्घा में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के समीप बैठे नजर आए थे, जिसने उनके सार्वजनिक जीवन में वापसी के संकेत दिए थे।
उज्जैन यात्रा: महाकाल की यह यात्रा न केवल उनकी धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि उनके उस संकल्प को भी दोहराती है जिसमें वे समाज में सकारात्मक बदलाव देखना चाहते हैं।
सुरक्षा के कड़े प्रबंध
पूर्व उपराष्ट्रपति की गरिमा और सुरक्षा को देखते हुए उज्जैन प्रशासन द्वारा कड़े इंतजाम किए गए थे। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी उनका गर्मजोशी से अभिवादन किया। धनखड़ ने सभी का हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना की।
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महाकाल की शरण में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़: भस्म आरती के बाद दिया मानवता और भाईचारे का बड़ा संदेश
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