उत्तरकाशी में उफनी खीर गंगा: धराली और हर्षिल क्षेत्र में अलर्ट जारी, प्रशासन ने कहा— ‘अफवाहों से बचें, सुरक्षा पहली प्राथमिकता’
उत्तरकाशी।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम के बदलते मिजाज के बीच संवेदनशील नदी-नालों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला शुरू हो गया है। जनपद उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्र धराली में बहने वाली खीर गंगा नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाने से प्रशासन और स्थानीय पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है।
एहतियात के तौर पर हर्षिल थाना पुलिस ने नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों और स्थानीय नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है।
तटीय इलाकों में मुनादी, सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह
धराली और आसपास के क्षेत्रों में खीर गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तत्परता दिखाई है। हर्षिल पुलिस की टीमों ने नदी किनारे बसे गांवों और बस्तियों में जाकर लोगों को जागरूक किया। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि नदी का बहाव तेज होने के कारण कोई भी व्यक्ति नदी के नजदीक न जाए।
इसके साथ ही, निचले और संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों से आग्रह किया गया है कि वे एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। हर्षिल थाना प्रभारी के अनुसार, नदी के आसपास किसी भी तरह की अनावश्यक आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते टाला जा सके।
प्रशासन की अपील: ‘अफवाहों पर न दें ध्यान, दिशा-निर्देशों का करें पालन’
अक्सर देखा गया है कि आपदा या नदी का जलस्तर बढ़ने जैसी स्थितियों में सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर कई तरह की भ्रामक खबरें या अफवाहें फैलने लगती हैं, जिससे आम जनता के बीच अनावश्यक डर का माहौल बन जाता है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन और हर्षिल पुलिस ने स्थानीय जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर बिल्कुल भी ध्यान न दें।
प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी जानकारी या स्थिति की पुष्टि केवल आधिकारिक स्रोतों से ही करें। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
”जन सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। नदी के जलस्तर
पर 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए हमारी टीमें मुस्तैद हैं। अगर किसी भी नागरिक को खतरे की आशंका होती है, तो वे तुरंत पुलिस या कंट्रोल रूम को सूचित करें।”
— स्थानीय प्रशासन, उत्तरकाशी
आपदा प्रबंधन विभाग की रिपोर्ट: ‘स्थिति नियंत्रण में, लेकिन सावधानी जरूरी’
खीर गंगा के जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी को लेकर जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाई ने स्थिति को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में इस मौसम में नदी-नालों के जलस्तर का बढ़ना एक सामान्य प्राकृतिक घटनाक्रम है। ग्लेशियरों के पिघलने या ऊपरी इलाकों में होने वाली हल्की बारिश के कारण भी पानी का बहाव तेज हो जाता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। आपदा प्रबंधन विभाग ने संबंधित सभी विभागों और रिस्पांस टीमों को अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
आपदा प्रबंधन अधिकारी के मुताबिक, स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और फिलहाल घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है।
चौबीसों घंटे रखी जा रही है पैनी नजर
उत्तरकाशी जिला प्रशासन के अनुसार, धराली और हर्षिल के संवेदनशील क्षेत्रों में जलस्तर की मॉनिटरिंग के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। पुलिस और राजस्व विभाग के अधिकारी पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं।
इसके साथ ही, यदि आने वाले घंटों में पानी का स्तर और अधिक बढ़ता है, तो प्रशासन ने अतिरिक्त एहतियाती कदम उठाने और प्रभावितों को सुरक्षित शिविरों में शिफ्ट करने की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है।
स्थानीय निवासियों और क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों से भी अनुरोध किया गया है कि वे नदी के घाटों, पुलों और संवेदनशील मोड़ों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति या आपदा की आशंका होने पर तत्काल पुलिस अथवा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना देने की व्यवस्था की गई है, ताकि त्वरित कार्रवाई (Quick Response) की जा सके।







