नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के तहत लिव-इन संबंधों के अनिवार्य पंजीकरण को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने इस दौरान कहा कि जब दो लोग बिना शादी के एक साथ रह रहे हैं, तो उनकी निजता का दावा कैसे किया जा सकता है? कोर्ट ने यह भी कहा कि जब समाज और पड़ोसी यह जानते हैं, तो पंजीकरण में गोपनीयता का सवाल कहां है?

 

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि राज्य सरकार का अनिवार्य पंजीकरण की व्यवस्था गपशप को संस्थागत रूप में बदलने जैसा है, और सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इससे निजता का उल्लंघन हो रहा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की है।

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