पौड़ी गढ़वाल। उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में मानव और वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में आने से मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा रही हैं। ताजा सनसनीखेज मामला पौड़ी गढ़वाल जिले से सामने आया है, जहां कोट विकासखंड के अंतर्गत एक आदमखोर गुलदार ने दिनदहाड़े एक बुजुर्ग महिला पर जानलेवा हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया। गुलदार का हमला इतना वीभत्स था कि उसने महिला का सिर धड़ से अलग कर दिया और शव को नोच-नोच कर खाने लगा। इस रूह कपां देने वाली घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों का गुस्सा वन विभाग के खिलाफ सातवें आसमान पर है।
घास लेने गई थी बुजुर्ग महिला, झाड़ियों में घात लगाए बैठा था काल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार (9 जून) को कोट विकासखंड की सितोनस्यूं पट्टी स्थित ग्राम पंचायत वड्डा के वाडियूं (देवार) गांव की रहने वाली 60 वर्षीय प्रभा देवी अपने मवेशियों के लिए घास लेने के लिए खेतों की तरफ गई थीं। बताया जा रहा है कि यह जगह उनके घर से महज 200 मीटर की दूरी पर थी। महिला को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मौत चंद कदमों की दूरी पर झाड़ियों में घात लगाए बैठी है। जैसे ही प्रभा देवी खेतों में घास काटने लगीं, पहले से छिपे बैठे गुलदार ने उन पर अचानक हमला बोल दिया।
रूह कंपा देने वाला मंजर: खंडहर में शव को नोच रहा था गुलदार
जब काफी देर तक प्रभा देवी घर वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों को चिंता होने लगी। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों और ग्रामीणों ने खेतों की तरफ जाकर उनकी खोजबीन शुरू की। तलाश करते हुए ग्रामीण जब थोड़ा आगे बढ़े, तो वहां का नजारा देखकर हर किसी के पैरों तले जमीन खिसक गई।
गुलदार महिला पर हमला करने के बाद उनके शव को घसीटकर करीब 50 मीटर ऊपर स्थित एक पुराने निर्जन (खंडहर) मकान के भीतर ले गया था। वहां वह बेहद क्रूरता से महिला के शव को नोच-नोच कर खा रहा था। गुलदार ने महिला के सिर को धड़ से पूरी तरह अलग कर दिया था। ग्रामीणों ने बिना हिम्मत हारे तुरंत शोर मचाना और हल्ला करना शुरू किया। ग्रामीणों के भारी शोर-शराबे और पत्थरों के डर से गुलदार अंततः शव को वहीं छोड़कर पास के घने जंगल की तरफ भाग निकला।
वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
घटना की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग की टीम को दी गई। सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। हालांकि, मौके पर पहुंचते ही विभागीय अधिकारियों को ग्रामीणों के भारी आक्रोश और तीखे विरोध का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों के मुख्य आरोप और मांगें:
• लगातार अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से गुलदार की सक्रियता बनी हुई थी और इसकी सूचना कई बार विभाग को दी गई, लेकिन वन विभाग ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
• आदमखोर घोषित करने की मांग: आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि इस गुलदार को तुरंत ‘आदमखोर’ घोषित किया जाए और इसे पकड़ने के लिए क्षेत्र में पिंजरा लगाया जाए। यदि आवश्यकता पड़े तो ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए इसे तुरंत ढेर करने के आदेश जारी किए जाएं।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बढ़ता वन्यजीवों का आतंक
पौड़ी गढ़वाल समेत उत्तराखंड के तमाम पहाड़ी जिलों में गुलदार, भालू और बाघ जैसे हिंसक जीवों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। रिहायशी इलाकों में जंगली जानवरों की धमक से लोग शाम होते ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। हाल ही में पौड़ी जिले से ही एक और मामला सामने आया था, जहां एक गुलदार मुर्गी के बाड़े में घुस गया था और उसने करीब 10 मुर्गियों को अपना शिकार बना डाला था। खेती-किसानी और पशुपालन पर निर्भर रहने वाले ग्रामीणों के लिए अब अपने खेतों में जाना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
प्रशासन की अपील: अकेले न जाएं जंगल, बरतें सतर्कता
शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वन विभाग के अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और उचित मुआवजे के साथ-साथ आदमखोर को जल्द से जल्द काबू में करने का भरोसा दिलाया है।
वन विभाग की चेतावनी:
“क्षेत्र में गुलदार की मौजूदगी को देखते हुए सभी ग्रामीणों से बेहद सतर्क रहने की अपील की जा रही है। कोई भी व्यक्ति, विशेषकर महिलाएं और बच्चे, अकेले सुनसान रास्तों या जंगलों की तरफ न जाएं। सुबह और शाम के वक्त समूहों में ही बाहर निकलें और अपने घरों के आसपास की झाड़ियों को साफ रखें।”
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर पहाड़ के गांवों की सुरक्षा और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस आदमखोर गुलदार से ग्रामीणों को निजात दिलाने के लिए कितनी जल्दी कदम उठाता है।

