​ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ों में रेल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण ‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट की समय सीमा (डेडलाइन) में बदलाव किया गया है। अब इस परियोजना का पहला चरण जून 2028 तक पूरा होगा, जिसके तहत ट्रेनों का संचालन ऋषिकेश से ब्यासी तक शुरू कर दिया जाएगा। वहीं, परियोजना के अंतिम छोर यानी कर्णप्रयाग तक ट्रेन को पहुंचाने का अंतिम लक्ष्य दिसंबर 2029 तय किया गया है।

​हाल ही में रेलवे की स्थायी संसदीय समिति ने उत्तराखंड पहुंचकर इस पूरी परियोजना के कार्यों की जमीनी समीक्षा की, जिसके बाद कार्यदायी संस्था रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के अधिकारियों ने प्रगति रिपोर्ट और नई समय सीमा की आधिकारिक जानकारी साझा की है।

​संसदीय समिति ने किया स्थलीय निरीक्षण, कार्यों को परखा

​संसद द्वारा गठित रेलवे की स्थायी समिति ने हाल ही में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के विभिन्न निर्माण खंडों का विस्तृत निरीक्षण किया। समिति रेल मंत्रालय के कामकाज, बजट, नई योजनाओं और यात्री सुविधाओं की समीक्षा करती है। इस बार अध्यक्ष डॉ. सीएम रमेश के नेतृत्व में 20 सांसदों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल परियोजना की प्रगति देखने उत्तराखंड पहुंचा था।

​संसदीय समिति के सदस्यों ने धारी देवी तक बनी सुरंगों के भीतर जाकर तकनीकी कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में आरवीएनएल (RVNL) के उप महाप्रबंधक (सिविल) ओपी मालगुड़ी ने समिति को बताया कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अब जून 2028 तक ब्यासी और दिसंबर 2029 तक कर्णप्रयाग तक पूरी तरह से रेल सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

​पहले दिसंबर 2028 था लक्ष्य, जानिए क्यों बढ़ी डेडलाइन?

​शुरुआती कार्ययोजना के अनुसार, इस पूरी परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा कर ट्रेन को कर्णप्रयाग तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, हिमालयी क्षेत्र की बेहद जटिल और विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण निर्माण कार्य में कई तरह की प्राकृतिक और तकनीकी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

​पहाड़ों के भीतर भारी मात्रा में पानी का निकलना, कमजोर चट्टानें (फ्रेजाइल रॉक मास), निर्माण सामग्री को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाने की समस्या और मौसम की अनिश्चितता के कारण काम की रफ्तार पर असर पड़ा है। उदाहरण के लिए, ढालवाला से शिवपुरी के बीच बन रही 10.8 किलोमीटर लंबी मुख्य सुरंग की खोदाई का काम अभी पूरा होना बाकी है। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए रेलवे ने व्यावहारिक समय सीमा को संशोधित किया है।

​125 किमी का सफर: 83 फीसदी हिस्सा सुरंगों के भीतर

​ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है। करीब 125 किलोमीटर लंबी इस पूरी रेल लाइन का लगभग 104 किलोमीटर (यानी 83 प्रतिशत) हिस्सा पहाड़ों को चीरकर बनाई जा रही सुरंगों के भीतर से गुजरेगा

इस रूट पर कुल 16 मुख्य सुरंगें और आपातकालीन निकासी के लिए 12 निकास (एस्केप) सुरंगें बनाई जा रही हैं। इसके अलावा, गहरी घाटियों और नदियों को पार करने के लिए 19 प्रमुख और 31 छोटे पुलों का निर्माण किया जा रहा है।
​आरवीएनएल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वर्तमान में कार्य की स्थिति इस प्रकार है:

• ​सुरंग निर्माण: 16 में से 13 मुख्य सुरंगों की खोदाई का काम लगभग 95 प्रतिशत (98 किलोमीटर) पूरा हो चुका है।
• ​पुल निर्माण: 19 में से 8 प्रमुख रेल पुल बनकर पूरी तरह तैयार हैं, जिनमें अलकनंदा नदी पर बना ब्रिज संख्या-8 और ब्रिज संख्या-9 शामिल हैं।
• ​सिग्नलिंग कार्य: ट्रैक के साथ-साथ इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग का काम अक्टूबर 2026 से शुरू कर दिया जाएगा।

​परियोजना में शामिल हैं 13 स्टेशन, कर्णप्रयाग बनेगा सबसे बड़ा हब

​इस पूरी रेल लाइन पर कुल 13 रेलवे स्टेशन होंगे। पुराने स्टेशनों में बीरभद्र शामिल है, जहां कुछ अपग्रेडेशन कार्य हुए हैं। इसके अलावा योगनगरी ऋषिकेश से वर्तमान में ट्रेनों का संचालन हो रहा है। शुरुआती खंड के तहत शिवपुरी और ब्यासी स्टेशनों पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वहीं, आगे के स्टेशनों जैसे—देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धारीदेवी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और वहां भी निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है।

​इस परियोजना का सबसे बड़ा और मुख्य टर्मिनल स्टेशन कर्णप्रयाग होगा। कर्णप्रयाग रेलवे स्टेशन को एक बड़े रेल टर्मिनस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ट्रेनों के रख-रखाव और सुचारू संचालन के लिए कुल 26 लाइनें बिछाई जाएंगी।

​दूरी और समय की गणित: 6 घंटे का सफर सिर्फ ढाई घंटे में

​योगनगरी ऋषिकेश से ब्यासी स्टेशन की दूरी 27.69 किलोमीटर है, जिसे पहले चरण में चालू किया जाएगा। इसके बाद ब्यासी से कर्णप्रयाग की दूरी 92.60 किलोमीटर है, जो दूसरे चरण में जुड़ेगी। (बता दें कि बीरभद्र से योगनगरी ऋषिकेश के बीच 5.7 किमी का ट्रैक मार्च 2020 से ही चालू है)।

​इस रेल परियोजना के पूरी तरह संचालित होने के बाद उत्तराखंड के विकास में एक नया अध्याय जुड़ेगा। वर्तमान में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग की सड़क मार्ग से यात्रा में लगभग 6 घंटे का समय लगता है, जो रेल सेवा शुरू होने के बाद घटकर मात्र 2.5 घंटे रह जाएगा। समय की इस भारी बचत से न केवल चारधाम यात्रियों और तीर्थयात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी, बल्कि गढ़वाल के पर्वतीय जिलों में लॉजिस्टिक्स, स्थानीय व्यापार और पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।

​यह परियोजना न केवल उत्तराखंड के आम नागरिकों के लिए जीवनरेखा साबित होगी, बल्कि चीन सीमा के नजदीक होने के कारण सामरिक दृष्टिकोण से भारतीय सेना के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी। हालांकि नई डेडलाइन से इंतजार थोड़ा बढ़ गया है, लेकिन उम्मीद है कि सुरक्षा मानकों को सर्वोपरि रखते हुए यह प्रोजेक्ट अपनी नई समय सीमा के भीतर देश को समर्पित कर दिया जाएगा।

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