नैनीताल/पिथौरागढ़: भगवान शिव के पावन धाम कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस वर्ष एक बड़ी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय और कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा पहले की तुलना में काफी महंगी हो गई है। प्रति यात्री यात्रा शुल्क में लगभग 35 हजार रुपये की वृद्धि की गई है, जिसके बाद अब एक श्रद्धालु को इस पवित्र यात्रा के लिए कुल 2.09 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
डॉलर की मजबूती बनी महंगाई का कारण
अधिकारियों के अनुसार, यात्रा खर्च में इस बड़ी बढ़ोतरी के पीछे का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की कीमत में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत है। पिछले वर्ष (2025) इस यात्रा का कुल खर्च लगभग 1.74 लाख रुपये था। लेकिन इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय विनिमय दरों (Exchange Rates) में बदलाव और तिब्बत (चीन) के क्षेत्र में लगने वाले शुल्कों में वृद्धि के कारण इसे बढ़ाकर 2.09 लाख रुपये कर दिया गया है
कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) के महाप्रबंधक विजय नाथ शुक्ला ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए बताया कि सरकार ने नए शुल्क ढांचे की घोषणा कर दी है और इसी के साथ यात्रियों का पंजीकरण भी शुरू हो गया है।
KMVN और विदेश मंत्रालय का शुल्क विभाजन
कैलाश मानसरोवर यात्रा दो हिस्सों में पूरी होती है—भारतीय क्षेत्र और तिब्बती क्षेत्र।
• भारतीय क्षेत्र: भारत के भीतर यात्रा, आवास, भोजन और गाइड आदि की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम की होती है। पिछले वर्ष KMVN प्रति यात्री 57 हजार रुपये शुल्क लेता था, जिसे इस बार बढ़ाकर 65 हजार रुपये कर दिया गया है (8000 रुपये की सीधी वृद्धि)।
• तिब्बत क्षेत्र: चीन के कब्जे वाले तिब्बत में प्रवेश के लिए वीजा और अन्य प्रबंधों के लिए विदेश मंत्रालय के माध्यम से लगभग 1400 डॉलर का भुगतान करना होता है। डॉलर की कीमत बढ़ने के कारण भारतीय मुद्रा में यह राशि काफी अधिक हो गई है।
यात्रियों की संख्या में इजाफा, रूट में भी बदलाव
एक तरफ जहां यात्रा महंगी हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकार ने शिवभक्तों के लिए एक राहत की खबर भी दी है। इस वर्ष यात्रा के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को दोगुना कर दिया गया है।
• पिछले वर्ष: केवल 10 समूहों में कुल 250 यात्री ही मानसरोवर जा सके थे।
• इस वर्ष: योजना के अनुसार 50-50 यात्रियों के कुल 10 दल भेजे जाएंगे, यानी इस बार 500 यात्री दर्शन कर सकेंगे।
यात्रा का ऐतिहासिक सफर और बदला हुआ मार्ग
कैलाश मानसरोवर यात्रा का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1947 में आजादी के बाद यह यात्रा विधिवत रूप से शुरू हुई थी, लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध के कारण इसे लंबे समय तक बंद रखना पड़ा। 1981 में कूटनीतिक प्रयासों के बाद इसे पुनः शुरू किया गया, जो 2019 तक निर्बाध रूप से चली।
2020 में कोरोना महामारी और उसके बाद भारत-चीन सीमा पर उपजे तनाव के कारण यह यात्रा 2024 तक रुकी रही। वर्ष 2025 में जब इसे दोबारा शुरू किया गया, तो सुरक्षा और सुगमता को देखते हुए पुराने लिपुलेख मार्ग में बदलाव किया गया। अब यह यात्रा टनकपुर और चंपावत के रास्ते आयोजित की जा रही है। इस नए रूट की खासियत यह है कि श्रद्धालुओं को रास्ते में कुमाऊं के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों जैसे जागेश्वर धाम और चितई गोलू देवता मंदिर के दर्शन करने का भी सौभाग्य मिलता है।
श्रद्धालुओं के लिए निर्देश
केएमवीएन के महाप्रबंधक ने स्पष्ट किया है कि कुल शुल्क में यात्रा खर्च, वीजा फीस, तिब्बत में रहने-खाने का प्रबंध, गाइड और मेडिकल सुविधाएं शामिल हैं। चूंकि यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में होती है, इसलिए पंजीकरण के बाद यात्रियों को सख्त मेडिकल जांच से गुजरना होगा। जो यात्री शारीरिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ पाए जाएंगे, केवल उन्हीं को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।
पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, और इच्छुक श्रद्धालु आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। यात्रा खर्च में वृद्धि के बावजूद, भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है और भारी संख्या में रजिस्ट्रेशन होने की उम्मीद है।

