उत्तराखंड: देहरादून में बड़ा हादसा, बिजली का खंभा लगाते समय करंट की चपेट में आए 5 कर्मचारी; 1 की मौत, 4 गंभीर रूप से झुलसे
देहरादून उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में रविवार को एक बड़ा और दर्दनाक हादसा हो गया। यहाँ पथरीबाग के ओम सिटी इलाके में बिजली का नया खंभा खड़ा करते समय पांच संविदा कर्मचारी हाई वोल्टेज करंट की चपेट में आ गए। 11 हजार कीवी (11 KV) की चालू लाइन से खंभा छू जाने के कारण करंट इतनी तेजी से फैला कि एक कर्मचारी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। सभी मृतक और घायल कर्मचारी उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को देहरादून के पथरीबाग स्थित ओम सिटी के पास केंद्र सरकार की पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत बिजली के सुदृढ़ीकरण और नए खंभे लगाने का काम चल रहा था। ऊर्जा विभाग से अनुबंधित एक निजी कंपनी के अधीन ठेकेदार के माध्यम से ये मजदूर काम कर रहे थे।
जब मजदूर लोहे के भारी-भरकम खंभे को जमीन में गाड़ने के लिए खड़ा कर रहे थे, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने या लापरवाही के चलते वह खंभा पास से ही गुजर रही 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से टकरा गया। खंभा लोहे का होने के कारण उसमें पलक झपकते ही बेहद तेज करंट दौड़ गया। खंभे को पकड़कर खड़े पांचों कर्मचारी करंट की चपेट में आ गए और चीखते हुए जमीन पर गिर पड़े। करंट का झटका इतना जोरदार था कि उमेश कुमार नाम के एक कर्मचारी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
मृतक और घायल सभी उत्तर प्रदेश के निवासी
हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोगों और साथी कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत बिजली आपूर्ति बंद कराई और सभी झुलसे हुए कर्मचारियों को पास के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया।
मृतक की पहचान: उमेश कुमार, निवासी- जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश।
घायलों की पहचान: पप्पू, जसमान और दो अन्य कर्मचारी (सभी निवासी- अमरोहा, उत्तर प्रदेश)।
अस्पताल में भर्ती कराए गए चारों घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने का प्रयास कर रही है। वहीं, पुलिस ने मृतक उमेश के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और उत्तर प्रदेश से देहरादून पहुंचे उसके परिजनों को सौंप दिया है। जवान बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे अधिकारी और कंपनी
इस गंभीर हादसे के बाद बिजली विभाग (UPCL) और काम करा रही अनुबंधित कंपनी के अधिकारियों के बीच हड़कंप मच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी विभाग और कंपनी के उच्च अधिकारी इस काम से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। नियमानुसार, जब भी किसी चालू लाइन के पास नया पोल लगाने का काम किया जाता है, तो उस क्षेत्र का शटडाउन (बिजली बंद) लिया जाना अनिवार्य होता है।
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या काम शुरू करने से पहले शटडाउन लिया गया था? अगर चालू लाइन में काम हो रहा था, तो इसकी अनुमति किसने दी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और कंपनी द्वारा सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई, जिसके कारण एक गरीब मजदूर को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस टीम अस्पताल और घटनास्थल पर पहुंची। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है।
एसपी सिटी (SP City) प्रमोद कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया, “अस्पताल के माध्यम से पुलिस को सूचना मिली थी कि करंट लगने से कुछ कर्मचारियों को भर्ती कराया गया है, जिनमें से एक की मौत हो चुकी है। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की और शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। घायल कर्मचारियों का इलाज चल रहा है। इस पूरे मामले में यदि परिजनों की ओर से तहरीर (शिकायत) मिलती है या सुरक्षा नियमों में लापरवाही की बात सामने आती है, तो संबंधित कंपनी और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
RDSS योजना और सुरक्षा पर सवाल
पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) का मुख्य उद्देश्य बिजली व्यवस्था को आधुनिक और सुरक्षित बनाना है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठेकेदार कितने लापरवाह हैं, यह इस घटना से साफ हो जाता है। बिना पुख्ता सुरक्षा उपकरणों (जैसे इंसुलेटेड ग्लव्स, सेफ्टी शूज और हेलमेट) और बिना शटडाउन के इतनी संवेदनशील जगह पर काम करवाना सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ है।
अब देखना होगा कि उत्तराखंड ऊर्जा विभाग और जिला प्रशासन इस दर्दनाक हादसे के दोषियों पर क्या कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में किसी और मजदूर को अपनी जान न गंवानी पड़े।

