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पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। जगह-जगह चट्टानें और मलबा गिरने से जिले की परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सबसे बड़ा संकट कैलास मानसरोवर मार्ग पर खड़ा हुआ है, जहाँ धारचूला से लगभग 54 किलोमीटर दूर नज्यांग के पास विशाल चट्टानों के दरकने से मुख्य मार्ग पूरी तरह ठप हो गया है।

इसके अलावा चीन सीमा को जोड़ने वाला प्रसिद्ध मुनस्यारी-मिलम मार्ग भी दूसरे दिन बंद रहा। इन प्रमुख मार्गों सहित जिले की कुल 16 ग्रामीण सड़कें बंद होने से 20 उच्च हिमालयी गांव दुनिया से अलग-थलग पड़ गए हैं, जिससे क्षेत्र की लगभग एक लाख से अधिक की आबादी सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।

​तवाघाट-लिपुलेख मार्ग नज्यांग में ठप, फंसे दर्जनों वाहन

​सोमवार की रात से लगातार जारी बारिश के बाद टनकपुर-तवाघाट मार्ग तवाघाट के पास बंद हो गया था, जिसे सीमा सड़क संगठन (BRO) की टीमों ने मशक्कत के बाद खोल दिया। इसके खुलने से दारमा घाटी का संपर्क तो बहाल हो गया, लेकिन तवाघाट-लिपुलेख मार्ग पर गर्बाधार और नज्यांग के पास हालात और बिगड़ गए।

​नज्यांग के पास मंगलवार शाम को पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरककर सड़क पर आ गिरा। इस वजह से धारचूला से गुंजी और उच्च हिमालयी इलाकों की ओर जाने वाले दर्जनों वाहन रास्ते में ही फंस गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकांश वाहन चालक वापस लौट गए। इनमें गुंजी में चल रहे विभिन्न विकास और निर्माण कार्यों के लिए सीमेंट और अन्य आवश्यक सामग्री ले जा रहे भारी वाहन भी शामिल थे।

कई अन्य वाहन देर शाम तक सड़क खुलने के इंतजार में दोनों ओर कतारों में खड़े रहे। प्रशासन और बीआरओ की टीमें देर शाम तक सड़क से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने के प्रयासों में जुटी रहीं।

​मुनस्यारी-मिलम मार्ग भी लगातार दूसरे दिन बंद

​सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील चीन सीमा को जोड़ने वाला मुनस्यारी-मिलम मार्ग बोगडियार के पास लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। मलबे और भारी पत्थरों के गिरने से इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप पड़ा है।

इन दोनों प्रमुख सीमांत मार्गों के बंद होने के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्र के 20 सीमांत गांवों का जिला मुख्यालय और अन्य क्षेत्रों से संपर्क कट गया है। इन इलाकों में राशन, दवाइयों और दैनिक उपभोग की वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है।

​नंदा देवी बेस कैंप और ल्वां गांव का संपर्क टूटा

​मुनस्यारी क्षेत्र में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। मल्ला जोहार स्थित नंदा देवी बेस कैंप और ल्वां गांव को जोड़ने वाली पैदल पुलिया तेज बहाव में बह गई, जिससे इस पूरे क्षेत्र का संपर्क दूसरे दिन भी कटा रहा। इस घटना से स्थानीय निवासियों के साथ-साथ चरवाहों और ट्रेकर्स की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

​वर्तमान समय में नंदा देवी बेस कैंप क्षेत्र के बुग्यालों में हजारों की संख्या में भेड़-बकरियां मौजूद हैं और लगभग एक दर्जन चरवाहे वहाँ डेरा डाले हुए हैं। परंपरा और मौसम के चक्र के अनुसार, 15 अगस्त के आसपास इन उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात की संभावना शुरू हो जाती है, जिसके कारण चरवाहे अपनी भेड़-बकरियों को निचले इलाकों में लाना शुरू कर देते हैं। ऐसे में पुलिया का बह जाना उनके सुरक्षित लौटने के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इसके अतिरिक्त, नंदा देवी बेस कैंप जाने वाले ट्रेकर्स भी इसी मार्ग का उपयोग करते हैं।

​प्रशासनिक मुस्तैदी और राहत कार्य

​मार्ग बंद होने और पुलिया बहने की सूचना मिलने के तुरंत बाद तहसील प्रशासन हरकत में आया है। प्रशासन की ओर से राजस्व टीम को प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति का जायजा लेने और राहत कार्यों की निगरानी के लिए भेजा गया है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता के आधार पर प्रभावित ग्रामीणों और चरवाहों तक सहायता पहुँचाने का काम किया जा रहा है। बह गई पुलिया का निर्माण भी जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा ताकि संपर्क बहाल हो सके।

​16 सड़कें अब भी बंद, जनजीवन पर बड़ा असर

​पिथौरागढ़ जिले में हो रही अनवरत बारिश से मंगलवार सुबह तक कुल 22 सड़कें बंद हो गई थीं। हालांकि, दिन में कड़ी मशक्कत के बाद थल-मुनस्यारी स्टेट हाईवे समेत तीन ग्रामीण सड़कों को यातायात के लिए खोल दिया गया, जिससे कुछ हद तक राहत मिली। लेकिन अब भी जिले की 16 ग्रामीण सड़कें पूरी तरह बाधित हैं।

​मार्गों के बंद होने से एक ओर जहाँ सीमांत क्षेत्रों में आवश्यक सामान की सप्लाई रुक गई है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय व्यापार पर भी गहरा असर पड़ रहा है। सीमांत क्षेत्रों के लोग अब जल्द से जल्द मौसम के साफ होने और मलबे की सफाई का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनका जनजीवन सामान्य पटरी पर लौट सके।

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