Demo

हाइलाइट्स:

• ​बड़ा फैसला: नेपाल सरकार ने भारतीय आमों की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगाई。
• ​मुख्य कारण: आमों में कीटनाशकों (Pesticides) की अत्यधिक मात्रा और सीमा पर क्वारंटाइन सुविधा का न होना。
• ​दोहरा झटका: हाल ही में जापान द्वारा बैन लगाए जाने के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल ने भी बंद किए दरवाजे。
• ​बाजार का हाल: प्रतिबंध से नेपाल के स्थानीय किसानों को मुनाफा, लेकिन आम जनता पर महंगाई की मार पड़ने का खतरा。

​काठमांडू/नई दिल्ली।

गर्मियों के इस मौसम में फलों के राजा ‘आम’ को लेकर भारत के फल उत्पादक किसानों और निर्यातकों के लिए एक बेहद निराश करने वाली खबर सामने आई है। जापान के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल ने भी भारतीय आम के आयात पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाल सरकार ने यह कड़ा कदम भारतीय आमों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कीटनाशकों की अधिकता और सीमावर्ती क्षेत्रों में उचित जांच व क्वारंटाइन सुविधाओं के अभाव का हवाला देते हुए उठाया है। इस फैसले से भारतीय कृषि बाजार और सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है。

​न्यूज़ एजेंसी पीटीआई (PTI) की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

​न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि भारतीय आमों की खेप में तय मानकों से कहीं अधिक कीटनाशक पाए गए हैं। इसके साथ ही, भारत से सटे नेपाल के सीमावर्ती इलाकों, विशेषकर मधेश प्रांत में, आयातित फलों की शुद्धता और गुणवत्ता जांचने के लिए पर्याप्त क्वारंटाइन लैब्स और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नेपाल सरकार ने फिलहाल भारतीय आमों की एंट्री पर पूरी तरह रोक लगाना ही मुनासिब समझा है।

​इस प्रतिबंध का सीधा असर नेपाल के फल बाजारों में देखने को मिल रहा है, जहां अब भारतीय आमों की जगह पूरी तरह से नेपाल के घरेलू बागानों में उगाए गए आमों ने ले ली है。

​नेपाल के स्थानीय किसानों की चांदी, उत्पादन को मिला बढ़ावा

​इस प्रतिबंध का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। मधेश प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारिता मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ज्ञवाली ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय आमों पर लगी इस रोक से नेपाल के स्थानीय किसानों को सीधा और बड़ा फायदा पहुंचा है। अब उन्हें भारतीय आमों की सस्ती और भारी आवक से प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ रही है, जिससे उनके अपने उत्पादों को सही और वाजिब दाम मिल रहे हैं।

​ज्ञवाली के मुताबिक, मधेश प्रांत के सिराहा, सप्तरी और धनुषा जिले नेपाल में आम उत्पादन के मुख्य केंद्र हैं। स्थानीय स्तर पर इस फैसले को घरेलू कृषि और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नेपाल का घरेलू उत्पादन पूरे देश की भारी मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त नहीं है。

​व्यापारियों ने जताई चिंता: आसमान छू सकते हैं आम के दाम

​नेपाल सरकार के इस फैसले से जहां किसान खुश हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय व्यापारी और आम उपभोक्ता बेहद परेशान हैं。 जानकीपुरधाम के फल और सब्जी व्यापारी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुरवे ने चेतावनी दी है कि भारतीय आम पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से घरेलू बाजार में आम की भारी किल्लत हो जाएगी। नेपाल में आम का सीजन बेहद सीमित होता है और यहां स्थानीय उत्पादन मध्य मई से मध्य जुलाई (केवल दो महीने) तक ही चलता है。 ऐसे में सालभर की मांग को पूरा करने के लिए भारतीय आमों का आयात बेहद जरूरी है।
​व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि भारतीय आमों पर पूरी तरह से बैन लगाना कोई समझदारी भरा समाधान नहीं है। इसके बजाय सीमा पर क्वारंटाइन व्यवस्था और लैब टेस्टिंग को मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि सख्त गुणवत्ता जांच के बाद सुरक्षित भारतीय आमों को देश में आने दिया जा सके।

​पिछले साल केले पर लगा था बैन, दोगुनी हुई थीं कीमतें

​फिलहाल नेपाल की राजधानी काठमांडू में आम की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है। लेकिन बाजार के जानकारों का कहना है कि आवक कम होने के कारण आने वाले दिनों में कीमतें बहुत जल्द दोगुनी हो सकती हैं।
​उपभोक्ताओं का डरना इसलिए भी लाजिमी है क्योंकि पिछले साल भी नेपाल सरकार ने इसी तरह भारतीय केले के आयात पर रोक लगा दी थी。 उस प्रतिबंध का नतीजा यह हुआ कि नेपाल में जो केला पहले 120 से 150 रुपये दर्जन मिलता था, उसकी कीमत बढ़कर सीधे 250 से 300 रुपये दर्जन तक पहुंच गई। आम नेपाली नागरिक पहले से ही इस बढ़ी हुई महंगाई से त्रस्त हैं और अब आम के महंगे होने के डर ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है。

​भारत के लिए दोहरा झटका: जापान के बाद नेपाल की नाखुशी

​भारतीय फल निर्यात सेक्टर के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। हाल ही में जापान जैसे विकसित और बड़े देश ने भी इन्हीं तकनीकी और रासायनिक कारणों (कीटनाशकों की अधिकता) का हवाला देकर भारतीय आमों की खेप को अपने यहाँ प्रतिबंधित कर दिया था। जापान के इस कड़े कदम के तुरंत बाद अब पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध भारतीय आम निर्यात को बहुत बुरी तरह प्रभावित करेगा। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की छवि पर असर पड़ेगा, बल्कि देश के बड़े फल उत्पादकों की अर्थव्यवस्था को भी तगड़ा झटका लगेगा。

​भारतीय आम अपनी मिठास और बेहतरीन स्वाद के लिए पूरी दुनिया में मशहूर हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीटनाशकों (Pesticides) के अत्यधिक इस्तेमाल को लेकर लगातार उठ रहे सवाल भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए एक अलार्मिंग सिचुएशन हैं। Live Almora News का मानना है कि भारत सरकार और कृषि मंत्रालयों को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। किसानों को जैविक खेती और कीटनाशकों के सीमित उपयोग के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ, निर्यात से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब टेस्टिंग सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि वैश्विक मंच पर भारतीय ‘फलों के राजा’ का दबदबा बरकरार रह सके।

Share.
Leave A Reply

Live Almora

Stay connected with Live Almora – your trusted source for local news, events, and updates from Almora and across Uttarakhand. Real stories, real voices, right from the hills.

Contact Us-  
Aryan Sharma
Kalli mitti gaon
Thano road
Raipur dehradun
Phone – 91934 28304