विशेष रिपोर्ट | पिथौरागढ़ (उत्तराखंड)
सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में आफत की बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते क्षेत्र की नदियां और नाले रौद्र रूप धारण कर चुके हैं, वहीं पहाड़ों से लगातार गिर रहे मलबे ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण चीन सीमा को भारत के मुख्य भू-भाग से जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग भूस्खलन की वजह से जगह-जगह ध्वस्त हो चुके हैं, जिससे सीमांत इलाकों का संपर्क देश के बाकी हिस्सों से कट गया है। इस भयानक प्राकृतिक आपदा के बावजूद, कड़ी सुरक्षा और सतर्कता के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा के जत्थे अपनी-अपनी मंजिलों की ओर बढ़ रहे हैं।
काली नदी ने धारण किया रौद्र रूप, तटीय इलाकों में दहशत का माहौल
पहाड़ों पर लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण जिले की मुख्य जलधाराएं उफान पर हैं। भारत और नेपाल की सीमा तय करने वाली काली नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर पर पहुँचकर 888.30 मीटर के आंकड़े को पार कर गया है। नदी के उग्र रूप को देखते हुए तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों के बीच भारी दहशत व्याप्त है।
मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
• बंगापानी तहसील: सर्वाधिक 82 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जहां कई स्थानों पर जलभराव और भू-कटाव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
• धारचूला तहसील: 43 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
• तेजम तहसील: 35 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
अन्य तहसीलों में भी रुक-रुक कर मध्यम से भारी बारिश का दौर जारी है। बारिश के कारण गाड़-गदेरे (स्थानीय पहाड़ी नाले) भी पूरे उफान पर हैं, जिससे निचले इलाकों में कटान का खतरा बढ़ गया है।
भूस्खलन से थमी जिंदगी: चीन सीमा से संपर्क टूटा, 11 से अधिक सड़कें बंद
बारिश के कारण कच्चे पहाड़ दरक रहे हैं, जिसका सबसे गंभीर प्रभाव सीमांत सड़कों पर पड़ा है। देश की सुरक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग और सीमा सड़क संगठन (BRO) के मार्ग जगह-जगह मलबे से पट गए हैं।
1. टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग: कूलागाड़ के पास भीषण भूस्खलन होने से पूरी तरह से बाधित हो गया है।
2. तवाघाट-लिपुलेख मार्ग: मलघाट के समीप पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें गिरने के कारण यातायात के लिए पूरी तरह बंद हो गया है।
3. मुनस्यारी-मिलम मार्ग: मलबे की वजह से अवरुद्ध होने से चीन सीमा का मुख्य धारा से संपर्क टूट गया है।
मुख्य राजमार्गों के साथ-साथ जिले की 11 से अधिक ग्रामीण और आंतरिक सड़कें भी भूस्खलन की चपेट में आकर ठप पड़ी हैं। सड़कें बंद होने से दर्जनों गांवों का तहसील मुख्यालयों से संपर्क कट चुका है। एम्बुलेंस और आवश्यक रसद सामग्रियों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रतिकूल मौसम के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा जारी
प्राकृतिक चुनौतियों और मार्ग अवरुद्ध होने के बावजूद, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की देखरेख में विभिन्न दलों का आवागमन जारी है:
• 9वां दल: आज प्रातः गुंजी से पवित्र आदि कैलाश के दर्शन के लिए रवाना हुआ। दर्शन और पूजा-अर्चना के उपरांत यह दल नाबीढांग की ओर प्रस्थान करेगा, जहां वह रात्रि विश्राम करेगा।
• 8वां दल: वर्तमान में तिब्बत (चीन) क्षेत्र में स्थित पवित्र कैलाश पर्वत की परिक्रमा कर रहा है।
• 7वां दल: मानसरोवर की परिक्रमा सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद तिब्बत के छूगू स्थान पर पहुंचेगा और सोमवार तक वापस तकलाकोट पहुंचेगा।
प्रशासन यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ठहराने तथा मौसम के अनुसार आगे बढ़ाने की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर, मलबा हटाने का कार्य तेजी से जारी
आपदा की इस घड़ी में जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन टीम (SDRF, NDRF) और बीआरओ (BRO) की टीमें मुस्तैदी से जुटी हुई हैं। बंद पड़े राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य मार्गों से मलबा हटाने के लिए भारी जेसीबी (JCB) और पोकलैंड मशीनें तैनात की गई हैं। हालांकि, रुक-रुक कर हो रही बारिश और ऊपर से गिरते पत्थरों के कारण मार्ग खोलने के कार्य में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासनिक चेतावनी: “काली नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए तटीय इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की अपील की गई है। अत्यधिक आवश्यकता न होने पर यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।”
स्थिति की गंभीरता और आगे की चुनौती
मौसम विभाग ने आगामी दिनों के लिए भी जिले के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। लगातार जारी बारिश के कारण आने वाले दिनों में भूस्खलन की घटनाओं में और बढ़ोतरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय निवासी, सेना के जवान और प्रशासन इस समय प्रकृति की इस दोहरी मार से जूझ रहे हैं, जहां एक तरफ जनजीवन को पटरी पर लाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमाओं की कनेक्टिविटी को जल्द से जल्द बहाल करने का दबाव है।
