चमोली (उत्तराखंड)
हिमालय के महाकुंभ के रूप में विख्यात ऐतिहासिक श्री नंदा देवी बड़ी जात यात्रा के दौरान उच्च हिमालयी निर्जन पड़ावों में दो गांवों के ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प का मामला सामने आया है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित ‘पातर नचौणिया’ और ‘कैलुवा विनायक’ के दुर्गम क्षेत्र में नंदानगर विकासखंड के सुतोल और कनोल गांवों के लोगों के बीच पुरानी रंजिश और सीमा विवाद को लेकर तकरार हो गई, जिसने देखते ही देखते उग्र मारपीट का रूप ले लिया। इस संघर्ष में कई ग्रामीणों के चोटिल और घायल होने की सूचना है। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
पवित्र पड़ावों पर सीमा विवाद की चिंगारी
उत्तराखंड की संस्कृति और आस्था की प्रतीक नंदा देवी बड़ी जात यात्रा में लाखों श्रद्धालु नंगे पांव और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में मां नंदा के मायके से ससुराल विदाई की परंपरा का निर्वहन करते हैं। यात्रा के प्रमुख दुर्गम पड़ावों—पातर नचौणिया और कैलुवा विनायक—में दोनों गांवों के दल आमने-सामने आ गए।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुतोल और कनोल गांव के बीच चारागाह, हक-हकूक और सीमाओं को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। यात्रा के दौरान किसी पुरानी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो कुछ ही पलों में लाठी-डंडों और हाथापाई में बदल गई। अचानक हुए इस उपद्रव से यात्रा मार्ग पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। घटना में घायल हुए कुछ लोगों को साथी ग्रामीणों की मदद से प्राथमिक उपचार और नजदीकी चिकित्सा केंद्रों के लिए रवाना किया गया है।
कनेक्टिविटी न होने से सूचनाओं में देरी
घटनास्थल अत्यंत संकरा, पथरीला और आबादी से कोसों दूर है। वाण गांव से आगे का इलाका पूरी तरह निर्जन पड़ावों के अंतर्गत आता है, जहां न तो कोई स्थायी बस्ती है और न ही मोबाइल नेटवर्क की कोई सुविधा। संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप होने के कारण मौके से वास्तविक वस्तुस्थिति की जानकारी तत्काल मुख्यालय तक नहीं पहुंच सकी।
सोशल मीडिया पर जैसे ही इस घटना से जुड़े संदेश और ऑडियो-वीडियो तैरने लगे, क्षेत्र में चिंता की लहर दौड़ गई। हालांकि, तकनीकी अभाव और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण घायलों की सही संख्या और उन्हें आई चोटों की गंभीरता की आधिकारिक पुष्टि होने में समय लग रहा है।
पुलिस अधीक्षक का बयान: अतिरिक्त बल रवाना
मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना पुलिस नियंत्रण कक्ष को मिली है।
”यात्रा मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पहले से ही विभिन्न पड़ावों पर पुलिस बल और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। सूचना मिलते ही नंदानगर से सुतोल की दिशा में अतिरिक्त पुलिस बल को तत्काल रवाना कर दिया गया है। चूंकि घटनास्थल अत्यधिक ऊंचाई और निर्जन इलाके में स्थित है, इसलिए मौके पर पहुंचकर स्थिति का मुआयना करने में समय लग रहा है।”
— सुरजीत सिंह पंवार, पुलिस अधीक्षक, चमोली
पुलिस अधीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि विवाद की जड़ दोनों गांवों का पुराना सीमा विवाद बताया जा रहा है। जैसे ही यात्रा दल और ग्रामीण नीचे नंदानगर क्षेत्र की ओर लौटेंगे, घटना के सभी पहलुओं, घायलों की सटीक स्थिति और विवाद के मूल कारणों की विस्तृत जांच कर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
क्या होते हैं नंदा देवी जात के ‘निर्जन पड़ाव’?
नंदा देवी राजजात यात्रा चमोली के नौटी गांव से शुरू होकर रूपकुंड, शिलासमुद्र और होमकुंड तक जाती है। वाण गांव इस यात्रा का अंतिम आबादी वाला गांव माना जाता है। वाण से आगे गैरौली पाताल, बेदनी बुग्याल, पातर नचौणिया, कैलुवा विनायक, बगुवाबासा और रूपकुंड जैसे पड़ाव आते हैं।
इन पड़ावों को ‘निर्जन पड़ाव’ कहा जाता है क्योंकि यहां शून्य से नीचे जाने वाला तापमान, आक्सीजन की कमी, पथरीली संकरी पगडंडियां और प्राकृतिक आश्रयों के अलावा कोई मानव बस्ती नहीं होती। ऐसे संवेदनशील और आध्यात्मिक महत्व के पड़ाव पर इस प्रकार की हिंसक घटना ने न केवल सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यात्रा की गरिमा और शांति व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन और शांति समिति की अपील
फिलहाल जिला प्रशासन ने दोनों गांवों के प्रबुद्धजनों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का तनाव यात्रियों की जान जोखिम में डाल सकता है, क्योंकि वहां मौसम का मिजाज कभी भी बिगड़ सकता है। पुलिस प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और संवेदनशील रास्तों पर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया है।
