मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल पैदा कर दी है। जहाँ दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, वहीं भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी सफलता हासिल की है। रूस से एक लाख टन से अधिक कच्चा तेल लेकर आ रहा विशाल टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ अब भारत के मंगलुरु तट पर पहुंच चुका है।
चीन की ओर मुड़ा रास्ता अब भारत की ओर
जहाज ट्रैकिंग डेटा और आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, रूसी तेल टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ शुरुआत में चीन के रिझाओ बंदरगाह की ओर जा रहा था। हालांकि, मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्वी एशियाई जलक्षेत्र के पास इस टैंकर ने अपना रास्ता बदल लिया और भारत की ओर रुख किया।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विदेश सचिव राजेश सिन्हा ने पुष्टि की कि इस टैंकर में लगभग 7.7 लाख बैरल कच्चा तेल भरा है। वर्तमान में यह टैंकर मंगलुरु तट से 18 नॉटिकल मील की दूरी पर है, जहाँ से पाइपलाइन के माध्यम से तेल को MRPL (मंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड) की सुविधा तक पहुँचाया जाएगा।
अमेरिका से आई LPG की खेप
केवल रूस ही नहीं, भारत ने पश्चिमी देशों से भी ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक मार्ग खोल दिए हैं। आज ही ‘पाइक्सिस पायनियर’ नामक एक मालवाहक जहाज अमेरिका के टेक्सस से भारी मात्रा में LPG लेकर न्यू मंगलुरु बंदरगाह पहुंचा है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण खाड़ी देशों से होने वाली एलपीजी की आपूर्ति बाधित हुई है, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अमेरिका जैसे अन्य स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं।
मिडिल ईस्ट संकट और $100 का आंकड़ा
ईरान और इजरायल के बीच जारी संघर्ष ने समुद्री व्यापार मार्ग, विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। आंकड़ों के मुताबिक:
दुनिया के लगभग 700 जहाज युद्ध क्षेत्र के आसपास फंसे हुए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई होने वाला 20% कच्चा तेल समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
यही कारण है कि कच्चे तेल की कीमतें पिछले कई दिनों से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं।
भारत की रणनीति: रूसी तेल पर बढ़ता भरोसा
भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूसी तेल की खरीद में रिकॉर्ड वृद्धि की है। अमेरिका द्वारा रूसी तेल के आयात को अस्थायी रूप से बढ़ाने की अनुमति मिलने के बाद, भारत ने अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। पिछले 21 दिनों में, भारतीय ध्वज वाले चार बड़े जहाज तेल और गैस का स्टॉक लेकर सुरक्षित रूप से भारतीय तटों पर पहुंचे हैं।
मुख्य बिंदु: एक नजर में
विवरण जानकारी
जहाज का नाम एक्वा टाइटन (रूस)
तेल की मात्रा 7.7 लाख बैरल (1 लाख टन से अधिक)
गंतव्य परिवर्तन चीन से भारत की ओर मोड़ा गया
रिफाइनरी MRPL, मंगलुरु
अन्य आपूर्ति पाइक्सिस पायनियर (अमेरिका से LPG)
निष्कर्ष
वैश्विक अशांति और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में बाधाओं के बावजूद, भारत सरकार की सक्रिय कूटनीति और विविधीकरण रणनीति रंग ला रही है। ‘एक्वा टाइटन’ का भारत आना न केवल हमारी रिफाइनरियों के लिए राहत की खबर है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की बढ़ती क्रय शक्ति और रणनीतिक स्वायत्तता को भी दर्शाता है।
