जहां आमतौर पर फसलों, फलों या मुर्गी-बकरी पालन का व्यवसाय सुना जाता है, वहीं चीन में एक अलग तरह की खेती तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है—बांस चूहों का पालन। यहां लोग विशेष फार्महाउस या शेड बनाकर बड़े आकार के इन चूहों को पालते हैं और फिर उन्हें बेचकर अच्छी कमाई करते हैं।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
स्थानीय भाषा में बांस रैट्स कहे जाने वाले ये जीव साधारण घरों के चूहों से कई गुना बड़े होते हैं। इनका वज़न 2 से 3 किलो तक पहुंच सकता है, जिस कारण इनकी मार्केट डिमांड लगातार बढ़ रही है। पालन की शुरुआत अक्सर जंगलों से होती है, जहां लोग इनके बिल ढूंढकर इन्हें पकड़ते हैं और पिंजरों में रखते हैं। एक पिंजरे में आमतौर पर 2–3 चूहे रखे जाते हैं, और वहीं से इनका प्रजनन शुरू हो जाता है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
एक मादा बांस चूहा एक बार में 4–5 बच्चों को जन्म देती है, जिससे इनकी संख्या जल्दी बढ़ जाती है। इन्हें पोषक आहार दिया जाता है ताकि वज़न तेजी से बढ़ सके। जब इनके दांत पूरी तरह विकसित हो जाते हैं और आकार पर्याप्त हो जाता है, तब इन्हें बाजार में बेच दिया जाता है।
खाने में इनका उपयोग विविध तरीकों से होता है—चीन में इन्हें अक्सर लहसुन और मिर्च के साथ सूप बनाकर खाया जाता है, जबकि कई लोग इन्हें ग्रिल करके भी पसंद करते हैं। कम लागत और तेज मुनाफे के कारण बांस चूहों की खेती चीन में एक उभरता हुआ व्यवसाय बनती जा रही
- है।

