Kedarnath Power Supply Project: सोनप्रयाग से धाम तक 33 KV लाइन को मिली मंजूरी, अब नहीं गुल होगी बत्ती
Kedarnath power supply project के तहत हिमालय की गोद में बसे बाबा केदार के धाम को अब चौबीसों घंटे निर्बाध और सुरक्षित बिजली मिलेगी। चारधाम यात्रा के दौरान विषम मौसम, भारी बर्फबारी और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अक्सर केदारनाथ धाम में विद्युत व्यवस्था चरमरा जाती थी। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने सोनप्रयाग से केदारनाथ तक नई 33 केवी विद्युत लाइन बिछाने की बहुप्रतीक्षित योजना को हरी झंडी दे दी है।
इस महत्वपूर्ण कदम से न केवल मुख्य मंदिर परिसर जगमगाएगा, बल्कि यात्रा मार्ग पर रुकने वाले लाखों श्रद्धालुओं, सुरक्षा बलों और स्थानीय व्यापारियों को भी कड़ाके की ठंड में बिजली की सुचारू सुविधा मिल सकेगी।
Kedarnath Power Supply Project: पुरानी 11 KV लाइन की जगह ओवरहेड सिस्टम
केदारनाथ धाम में वर्तमान में बिजली आपूर्ति के लिए सोनप्रयाग से धाम तक 11 केवी की भूमिगत (अंडरग्राउंड) केबल लाइन बिछी हुई थी। वर्ष 2013 की भीषण आपदा और उसके बाद लगातार होने वाले भूस्खलन व भारी हिमपात के कारण यह केबल कई जगहों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी थी। जमीन के भीतर खराबी आने पर फॉल्ट ढूंढना और अत्यधिक ठंड में केबल की मरम्मत करना ऊर्जा निगम के कर्मचारियों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण साबित होता था।
इसी समस्या को दूर करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने क्षतिग्रस्त 11 केवी लाइन को हटाकर उसकी जगह 33 केवी डबल सर्किट ओवरहेड लाइन तैयार करने का प्रस्ताव रखा था। नए ढांचे में मजबूत लाटिस टावरों (Lattice Towers) का सहारा लिया जाएगा, जिससे बर्फबारी और पत्थरों के गिरने से लाइन को कम से कम नुकसान पहुंचे।
11.12 करोड़ रुपये की लागत और वित्तीय मॉडल
इस वृहद प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लगभग 11.12 करोड़ रुपये का वित्तीय खाका तैयार किया गया है:
परियोजना का बजट: 11.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत।
ऋण व्यवस्था: कुल लागत का 70 प्रतिशत हिस्सा रूरल इलेक्ट्रिफ़िकेशन कॉरपोरेशन (REC Limited) से ऋण के रूप में लिया जाएगा।
राज्य सरकार का अंशदान: शेष 30 प्रतिशत धनराशि उत्तराखंड राज्य सरकार अपनी इक्विटी के माध्यम से वहन करेगी।
लाइन की लंबाई: सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक लगभग 10.40 किलोमीटर के कठिन पहाड़ी क्षेत्र में नए मजबूत टावर खड़े किए जाएंगे।
यूपीसीएल बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स पहले ही इस बजट प्रस्ताव को पास कर चुका है, जिसके बाद अब नियामक आयोग से भी इसे आधिकारिक वित्तीय सहमति मिल गई है।
आगामी रोपवे और 33/11 KV सब-स्टेशन को मिलेगा सीधा लाभ
यह नया बिजली ढांचा सिर्फ एक तात्कालिक मरम्मत नहीं है, बल्कि केदारनाथ घाटी के सुनहरे भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान है।
प्रस्तावित 33/11 केवी सब-स्टेशन: केदारनाथ धाम में एक आधुनिक सब-स्टेशन बनाया जा रहा है, जिसे पूर्ण क्षमता से चलाने के लिए 33 केवी की हाई-वोल्टेज लाइन अनिवार्य थी।
सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे प्रोजेक्ट: केंद्र और राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘केदारनाथ रोपवे’ के संचालन के लिए भारी मात्रा में विद्युत लोड की आवश्यकता होगी। नई 33 केवी लाइन इस मेगा प्रोजेक्ट की ऊर्जा जरूरतों को भी आसानी से पूरा करेगी।
स्थानीय सुविधाएं: धाम में संचालित अस्पताल, वाई-फाई नेटवर्क, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली और एसडीआरएफ/एनडीआरएफ के बेस कैंपों को बिना रुकावट पावर बैकअप मिल सकेगा।
UERC की चेतावनी और सुरक्षा मानकों के सख्त निर्देश
उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) ने परियोजना को कार्योत्तर (Post-Facto) मंजूरी देते हुए यूपीसीएल की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी भी की है। आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना पूर्व अनुमति के टेंडर निकालना और काम शुरू करना नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, केदारनाथ यात्रा की संवेदनशीलता और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस बार इसे विशेष राहत दी गई है।
आयोग ने निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य के दौरान केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के सुरक्षा नियमों का 100% पालन किया जाए। खासकर 250 मीटर की स्पैन सीमा (दो खंभों या टावरों के बीच की अधिकतम दूरी) का कड़ाई से ध्यान रखा जाए, ताकि तेज बर्फीली हवाओं में तार टूटने का खतरा न रहे।
