22 अगस्त से दफ्तर से नदारद था चतुर्थ श्रेणी कर्मी जितेंद्र थपलियाल; अक्सर बिना बताए अनुपस्थित रहने की आदत के चलते सहकर्मियों को नहीं हुआ था कोई संदेह।
पौड़ी गढ़वाल:
उत्तराखंड के पौड़ी जिले से एक सनसनीखेज और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय स्थित लोक निर्माण विभाग (PWD) की आवासीय कॉलोनी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का शव उसके बंद सरकारी क्वार्टर से बरामद किया गया। मृतक पिछले 11 दिनों से न तो कार्यालय पहुंचा था और न ही आसपास नजर आ रहा था। शव से तेज दुर्गंध उठने पर पड़ोसियों ने अनहोनी की आशंका जताई, जिसके बाद पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को बाहर निकाला।
दुर्गंध उठने पर पड़ोसियों में मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक, घटना पौड़ी स्थित लोक निर्माण विभाग की विभागीय कॉलोनी की है। बुधवार को कॉलोनी के लोगों को जितेंद्र प्रसाद थपलियाल के आवास से असहनीय सड़ांध और बदबू का अहसास हुआ। दरवाजा अंदर से बंद था और कई बार आवाज लगाने के बाद भी अंदर से कोई हरकत नहीं हुई। शक गहराने पर स्थानीय निवासियों और साथी कर्मचारियों ने बिना देर किए पौड़ी कोतवाली पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। कमरे का मुख्य दरवाजा भीतर से बंद होने के कारण पुलिस को ताला और दरवाजा तोड़ना पड़ा। अंदर कदम रखते ही कमरे का मंजर देखकर हर कोई सन्न रह गया। कमरे में कर्मचारी का शव फर्श पर पड़ा हुआ था और वह कई दिन पुराना होने के कारण बुरी तरह सड़ने लगा था।
22 अगस्त से कार्यालय से लापता था कर्मचारी
मृतक की शिनाख्त जितेंद्र प्रसाद थपलियाल के रूप में हुई है, जो लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता गढ़वाल कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद पर सेवारत था। जांच में सामने आया कि जितेंद्र विभागीय कॉलोनी स्थित सरकारी आवास में अकेला ही रहता था।
रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि वह बीते 22 अगस्त से दफ्तर नहीं आया था। करीब 11 दिनों तक किसी ने इस बात पर खास ध्यान नहीं दिया कि वह कहां है। जब आवास से तेज दुर्गंध पूरे परिसर में फैलने लगी, तब जाकर इस दुखद घटना का पर्दाफाश हुआ।
आदत बनी अनदेखी की वजह: सहकर्मियों को क्यों नहीं हुआ शक?
विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जितेंद्र थपलियाल अक्सर बिना पूर्व सूचना या अवकाश लिए कार्यालय से गायब हो जाता था। सहकर्मियों के अनुसार, उसका व्यवहार कार्य के प्रति काफी समय से लापरवाह बना हुआ था। वह पहले भी कई-कई दिनों तक अचानक कार्यालय से नदारद रहता था और बाद में वापस लौट आता था।
इसी पुरानी कार्यप्रणाली के चलते जब वह 22 अगस्त को ड्यूटी पर नहीं आया, तो किसी को कोई अनहोनी की आशंका नहीं हुई। दफ्तर के लोगों को लगा कि वह हमेशा की तरह कुछ दिन अनुपस्थित रहकर खुद ही लौट आएगा। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि वह शराब पीने का आदी था, जिसके चलते अक्सर उसका स्वास्थ्य और काम प्रभावित रहता था।
विभाग की ओर से पहले भी जारी हो चुके थे नोटिस
विभागीय सूत्रों ने पुष्टि की है कि जितेंद्र के लगातार बिना बताए अनुपस्थित रहने के आचरण को लेकर प्रशासन सख्त कदम उठा चुका था। उसकी लापरवाही को देखते हुए उच्चाधिकारियों द्वारा उसे पूर्व में कई बार औपचारिक चेतावनी दी गई थी। इतना ही नहीं, अनुशासनहीनता के चलते उसका वेतन रोकने के आदेश भी जारी किए गए थे। हालांकि, इन विभागीय कार्रवाइयों के बावजूद उसके व्यवहार में अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला था।
पुलिस जांच जारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
कोतवाल पौड़ी जयपाल सिंह नेगी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी थी। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और कमरे से आवश्यक साक्ष्य जुटाए।
शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शव की स्थिति देखकर प्रतीत होता है कि मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
कोतवाल नेगी के अनुसार, मृतक के परिजनों को इस अनहोनी की आधिकारिक सूचना दे दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस सभी कोणों—स्वाभाविक मौत, अत्यधिक नशा, बीमारी या किसी अन्य परिस्थिति—से मामले की गहन जांच में जुटी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिजनों के बयानों के आधार पर ही आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी।
