मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच गहराते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को हिलाकर रख दिया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Hormuz Strait), जहाँ से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, अब एक युद्ध क्षेत्र में तब्दील होता दिख रहा है। इस गंभीर संकट के बीच पाकिस्तानी नौसेना ने अपनी ऊर्जा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए ‘ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर’ (Operation Muhafiz-ul-Bahr) की शुरुआत की है।
क्या है ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर?
पाकिस्तानी नौसेना द्वारा शुरू किया गया यह मिशन मुख्य रूप से अपने व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए है। इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तानी युद्धपोत ‘पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉरपोरेशन’ के उन जहाजों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा) दे रहे हैं, जो कच्चा तेल और अन्य महत्वपूर्ण ईंधन लेकर आ रहे हैं। हाल ही में पाकिस्तानी युद्धपोतों ने दो व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित कराची बंदरगाह तक पहुँचाया है।
सीधे टकराव से बचाव की रणनीति
पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, उनकी नौसेना सीधे हॉर्मुज स्ट्रेट के अत्यंत खतरनाक और विवादित हिस्से में प्रवेश नहीं कर रही है। इसके बजाय, पाकिस्तानी युद्धपोत कराची से खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर के मार्गों पर तैनात हैं। पाकिस्तान की रणनीति रक्षात्मक है; वह अपनी सप्लाई चेन को तो सुरक्षित रखना चाहता है, लेकिन ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे सीधे युद्ध में शामिल होने का जोखिम नहीं उठाना चाहता।
पाकिस्तान में गहराता आर्थिक और ऊर्जा संकट
हॉर्मुज मार्ग में बाधा आने के कारण पाकिस्तान के भीतर हालात काफी चिंताजनक हो गए हैं:
ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि: पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर तक की ऐतिहासिक बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ गया है।
स्टॉक की कमी: रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के पास कच्चे तेल का स्टॉक मात्र 10 दिनों का और एलपीजी का केवल 15 दिनों का शेष बचा है।
आपातकालीन कदम: ऊर्जा बचाने के लिए सरकार ने स्कूलों और कॉलेजों को 2 हफ्तों के लिए बंद कर दिया है और दफ्तरों में ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया गया है।
वैश्विक प्रभाव और चुनौतियाँ
हॉर्मुज संकट केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है। ऐसी स्थिति में जहाजों को अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ से होकर लंबा रास्ता तय करना होगा, जिससे शिपिंग लागत और समय दोनों बढ़ जाएंगे।
फिलहाल, पाकिस्तान के लिए ‘ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर’ एक अनिवार्य सुरक्षा कवच बन गया है। जब तक ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव कम नहीं होता, तब तक समुद्री व्यापारिक मार्गों पर यह अनिश्चितता बनी रहेगी और पाकिस्तान जैसे तेल-आयात निर्भर देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता रहेगा।
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