उत्तरकाशी के दो युवकों को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर डंकी मार्ग के जरिए म्यांमार पहुंचाने और वहां अवैध रूप से बंधक बनाकर साइबर अपराध करवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। युवकों से फर्जी फेसबुक आईडी बनवाने का काम कराया गया और मना करने पर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। सैन्य संघर्ष के दौरान मौका पाकर दोनों युवक वहां से भाग निकले और एक एनजीओ तथा भारतीय दूतावास की मदद से किसी तरह स्वदेश लौट पाए। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
जानकारी के अनुसार उत्तरकाशी निवासी दो युवकों को आरोपियों ने नौकरी का झांसा देकर पहले दिल्ली बुलाया और फिर डंकी मार्ग के जरिए म्यांमार ले गए। वहां उन्हें जबरन एक परिसर में बंद कर साइबर ठगी से जुड़ा काम करने को मजबूर किया गया। किसी तरह जान बचाकर युवक वहां से भागे और एनजीओ के सहारे भारत लौटे।
पीड़ित यशपाल बिष्ट, निवासी ग्राम चिन्यालीसौड़, उत्तरकाशी ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति लंबे समय से खराब थी। जून 2025 में उनकी मुलाकात उत्तरकाशी निवासी उनके परिचित कन्हैया बिल्जवाण से हुई। बातचीत के दौरान यशपाल ने अपनी आर्थिक परेशानी साझा की, जिस पर कन्हैया ने विदेश में नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया और दिल्ली में रहने वाले अपने चाचा केशव बिल्जवाण से संपर्क करवाया।
केशव बिल्जवाण ने व्हाट्सएप के माध्यम से बातचीत करते हुए कहा कि यदि पासपोर्ट तैयार है तो जल्द विदेश भेजा जा सकता है। जब यशपाल ने अंग्रेजी न आने की बात कही तो केशव ने कहा कि विदेश में नौकरी के लिए अंग्रेजी जरूरी है और इसके लिए ट्यूशन लेने की सलाह दी। इसके बाद केशव ने जूम एप के जरिए इंटरव्यू का लिंक भेजा और बताया कि नौकरी की बात तय हो गई है। लिंक खोलने पर केशव सहित दो विदेशी नागरिक जुड़े, जिन्होंने अंग्रेजी में इंटरव्यू लिया।
कुछ दिनों बाद केशव ने 26 जून 2025 की दिल्ली से बैंकॉक जाने की फ्लाइट का टिकट भेजा और दिल्ली बुलाया। 25 जून को यशपाल अपने दोस्त मनीष पंवार और कन्हैया के साथ दिल्ली पहुंचे, जहां केशव बिल्जवाण ने उनसे टिकट के नाम पर 13-13 हजार रुपये लिए। अगले दिन केशव उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट छोड़कर चला गया।
बैंकॉक पहुंचने पर एक अज्ञात व्यक्ति उन्हें लेने आया और मैसोट ले गया। वहां एक होटल में रात रुकवाई गई। इस दौरान युवकों को परिस्थितियां संदिग्ध लगीं, लेकिन शिवम नाम के व्यक्ति ने उन्हें आश्वस्त किया कि घबराने की कोई बात नहीं है। अगले दिन जंगल के रास्ते उन्हें अवैध रूप से म्यांमार पहुंचाया गया और डांगयांग क्षेत्र स्थित सुपना नामक कंपनी में छोड़ दिया गया।
वहां चीनी नागरिकों और एक भारतीय व्यक्ति ने उन्हें काम की जानकारी दी और कुछ कागजातों पर जबरन हस्ताक्षर कराए। 28 जून से उन्हें फेसबुक एडिटिंग सिखाई गई और अलग-अलग फोटो लगाकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाने के लिए मजबूर किया गया। कुछ दिन तक काम करने के बाद युवकों को पूरे मामले में गड़बड़ी का एहसास हुआ।
जब उन्होंने काम करने से इनकार किया तो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। कई दिनों तक उन्हें एक ही इमारत में कैद रखकर डराया-धमकाया गया। पीड़ितों ने बताया कि पूरा ऑफिस चीनी नागरिकों के नियंत्रण में था। बाद में वहां सेना के बीच संघर्ष शुरू हो गया, जिसके चलते चीनी नागरिक वहां से भाग गए। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर दोनों युवक वहां से निकलने में सफल रहे।
इसके बाद वे म्यांमार में भटकते रहे, जहां उन्हें एक एनजीओ के बारे में जानकारी मिली। दोनों युवक करीब एक महीने तक एनजीओ की शरण में रहे। बाद में भारतीय दूतावास के हस्तक्षेप से उन्हें सुरक्षित भारत लाया गया।
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर केशव बिल्जवाण और शिवम के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जा रही है और अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
