उदयपुर / केलांग (लाहौल-स्पीति):
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहौल-स्पीति में शुक्रवार को एक अत्यंत हृदयविदारक सड़क दुर्घटना की खबर सामने आई है। तांदी-संसारी राष्ट्रीय राजमार्ग पर उदयपुर-किलाड़ मार्ग के समीप अचानक हुए भीषण भूस्खलन की चपेट में एक टाटा सूमो वाहन आ गया।
पहाड़ी से गिरे भारी-भरकम पत्थरों और मलबे की वजह से वाहन में सवार 13 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दुखद हादसे के बाद समूचे जनजातीय क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
कैसे और कहाँ हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुल्लू से पांगी की तरफ जा रही एक टाटा सूमो टैक्सी (HP-01M-2210) कडू नाला के पास पहुँची ही थी कि अचानक पहाड़ी दरक गई। विशालकाय चट्टानें और मलबा सीधी रफ्तार में आ रही गाड़ी पर आ गिरे। चट्टानों का वजन और प्रभाव इतना भयानक था कि वाहन पूरी तरह से मलबे के नीचे दबकर चकनाचूर हो गया।
शुरुआती विवरण के मुताबिक, टाटा सूमो में चालक समेत कुल 14 लोग सवार थे। बताया जा रहा है कि उदयपुर-किलाड़ मार्ग बीते दिन से भूस्खलन और मलबे के कारण अवरुद्ध था, जिसके चलते ये सभी यात्री तिंदी नामक स्थान पर रुके हुए थे। शुक्रवार दोपहर जैसे ही सीमा सड़क संगठन (BRO) ने मार्ग को यातायात के लिए बहाल किया, यह वाहन पांगी के लिए रवाना हो गया। परंतु रास्ते में कडू नाला के समीप नियति को कुछ और ही मंज़ूर था और कुछ ही मिनटों में यह बड़ा हादसा घटित हो गया
राहत और बचाव कार्य: खराब मौसम बनी बड़ी चुनौती
दुर्घटना की सूचना मिलते ही पास में तैनात सीमा सड़क संगठन (BRO) के कर्मचारियों ने तुरंत स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव कार्य प्रारंभ किया। घटना की भयावहता को देखते हुए लाहौल पुलिस, तिंदी थाना पुलिस, उदयपुर उपमंडल प्रशासन के उच्चाधिकारी, जिला उपायुक्त तथा पुलिस अधीक्षक की टीमें दलबल के साथ मौके पर पहुँच गईं।
इसके साथ ही, पांगी क्षेत्र के कार्यकारी आवासीय आयुक्त एवं एसडीएम अमनदीप सिंह भी प्रशासनिक दल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं और राहत अभियानों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी कर रहे हैं।
हालांकि, घटनास्थल पर रुक-रुक कर हो रही बारिश और पहाड़ी से लगातार गिर रहे छोटे-बड़े पत्थरों के कारण बचाव अभियान में भारी बाधा आ रही है।
प्रशासन और बीआरओ की भारी मशीनरी युद्ध स्तर पर सड़क से मलबा हटाकर क्षतिग्रस्त वाहन तक पहुँचने और शवों को बाहर निकालने के अथक प्रयास कर रही है।
मृतकों की पहचान और प्रशासनिक रुख
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना में मारे गए यात्रियों के शवों की स्थिति को देखते हुए उनकी पहचान में थोड़ा समय लग रहा है। यही वजह है कि जिला प्रशासन ने अभी तक मृतकों के नामों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।
पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन शवों को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी व चिकित्सीय प्रक्रियाओं को पूरा करने में जुटे हैं।
प्रशासन की जनता से अपील: अफवाहों से बचें
हादसे की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों और मीडिया माध्यमों से विशेष अपील जारी की है।
प्रशासन ने कहा है कि:
“घटनास्थल पर राहत कार्य जारी है। किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी, झूठी सूचियों या सोशल मीडिया पर तैरती अफवाहों पर बिल्कुल विश्वास न करें। मृतक यात्रियों की पहचान की पुष्टि होते ही केवल आधिकारिक स्रोतों से ही प्रामाणिक जानकारी साझा की जाएगी।”
जनजातीय मार्गों पर भूस्खलन का बढ़ता ख़तरा
लाहौल-स्पीति और पांगी-भरमौर जैसे दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून तथा मौसम के परिवर्तन के दौरान पहाड़ दरकने का खतरा हमेशा बना रहता है। तांदी-संसारी राजमार्ग रणनीतिक और स्थानीय आवाजाही दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन कडू नाला जैसे कई संवेदनशील पैच यहाँ लगातार यात्रियों के लिए जानलेवा साबित होते रहे हैं।
प्रशासन ने यात्रियों और वाहन चालकों को सलाह दी है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और केवल मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने पर ही अपना सफर शुरू करें। फिलहाल, पूरी घाटी इस भीषण हादसे के स्तब्धकारी प्रभाव में है और बचाव दल मलबे को साफ करने के काम में जुटे हुए हैं।

